कांग्रेस ने शनिवार को कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन में मणिपुर संकट को सुलझाने की कोई राजनीतिक इच्छा नहीं है। विपक्षी पार्टी ने आरोप लगाया कि भले ही भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन के पास 60 सदस्यीय विधानसभा में 54 विधायक हों, फिर भी वह राज्य में सरकार नहीं बना पा रही है।
मणिपुर कांग्रेस प्रमुख केशम मेघचंद्र ने 'भारत छोड़ो आंदोलन' की वर्षगांठ के कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के बाद भले ही गोलीबारी रुकी हो, लेकिन लोग आज भी स्वतंत्र रूप से आवाजाही नहीं कर पा रहे हैं। इस सप्ताह की शुरुआत में संसद ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन को 13 अगस्त के बाद और छह महीने तक बढ़ाने की मंजूरी दी।
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'हम राष्ट्रपति शासन को बढ़ाने के पक्ष में नहीं'
मेघचंद्र ने कहा, हमने राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भाजपा नेतृत्व को कई बार सुझाव और ज्ञापन दिए, लेकिन केंद्र की भाजपा सरकार हमारे विचारों को गंभीरता से नहीं लेती। राष्ट्रपति शासन 13 फरवरी को लगाया गया था, जिसके बाद भले ही गोलियां चलनी बंद हो गई हों, लेकिन लोगों की आवाजाही अब भी बाधित है। उन्होंने कहा, राज्य में समाज कल्याण की योजनाएं पूरी तरह ठप पड़ी हैं और वित्तीय स्थिति बहुत खराब है। हम राष्ट्रपति शासन को और छह महीने तक बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। अब लोगों की शिकायतें सुनने वाला कोई नहीं है।
'कई गुना बढ़ गईं लोगों की परेशानियां'
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के पास मणिपुर संकट को हल करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति ही नहीं है। उन्होंने कहा, भाजपा और उसके सहयोगियों के पास 60 सदस्यीय सदन में 54 विधायक हैं, इसके बावजूद वे सरकार नहीं बना पा रहे हैं। मेघचंद्र ने दावा किया कि राज्य में विकास पूरी तरह रुक गया है और केंद्र की ओर से दी जा रही स्वास्थ्य सेवाएं भी लोगों तक नहीं पहुंच रही हैं। उन्होंने कहा, प्रशासन की विफलता के कारण लोगों की परेशानियां कई गुना बढ़ गई हैं।
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कांग्रेस ने मणिपुर के लिए कम बजट की आलोचना की
मेघचंद्र ने केंद्र की भाजपा सरकार की ओर से मणिपुर के लिए पेश किए गए बजट की भी आलोचना की। उन्होंने कहा, हाल ही में संसद में पास किया गया बजट बहुत छोटा है और राहत शिविरों के लिए आवंटित धनराशि नाकाफी है। हम इस बजट से बेहद निराश हैं।
लोकसभा में मणिपुर विनियोग विधेयक 2025 पारित
गुरुवार को लोकसभा ने मणिपुर विनियोग विधेयक, 2025 को पारित किया, जिससे राज्य को मौजूदा वित्तीय वर्ष में 30,969 करोड़ रुपये खर्च करने की अनुमति दी गई। मणिपुर में मई 2023 में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा भड़क गई थी, जिसमें अब तक 260 से ज्यादा लोगों की जान गई है। वहीं, करीब 1,500 लोग घायल हुए हैं और 70,000 से अधिक लोग बेघर हुए हैं।