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कश्मीर पर तत्काल वार्ताकार की घोषणा होनी चाहिए : यशवंत सिन्हा

Mon, 24 Apr 2017 07:05 PM IST
विनोद अग्निहोत्री/ शशिधर पाठक
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फाइल फोटो
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केन्द्र सरकार को कश्मीर समस्या के समाधान के लिए बिना समय गंवाए एक व्यक्ति या किसी टीम को जम्मू-कश्मीर के सभी पक्षों से बातचीत की जिम्मेदारी सौंपने की घोषणा कर देनी चाहिए। पूर्व विदेश और वित्त मंत्री रहे भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने मांग करते हुए कहा कि इस मामले में किसी भी तरह का विलंब उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार पहले ही पिछले साल सर्दी के मौसम में बातचीत शुरू करने का समय खो चुकी है। इसलिए कश्मीर को लेकर पीडीपी के साथ तय हुए एजेंडा फॉर एलायंस पर आगे बढऩे में देरी उचित नहीं है।
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यशवंत सिन्हा ने कश्मीर के मुद्दे पर अमर उजाला से विशेष बातचीत की है। उन्होंने कहा कि कश्मीर का मुद्दा राजनीतिक है और इसे केवल कानून व्यवस्था का विषय मान लेना गंभीर भूल होगी। इसका समाधान राजनीतिक पहल और प्रकिया से ही हो सकता है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसी तर्ज पर कश्मीर समस्या का समाधान निकालने की कोशिश की थी। 2015 में भाजपा-पीडीपी का गठबंधन इसी के विस्तारित स्वरुप पर आधारित था। एजेंडा फॉर एलायंस में वाजपेयी जी की नीति पर चलते हुए इंसानियत, जम्हूरियत और कश्मीरियत को प्राथमिकता दी गई थी।

सिन्हा ने कहा कि उन्हें इसकी तकलीफ है कि केन्द्र सरकार और लोग आज 25 महीने बाद इसे भूल गए हैं। कोई इस पर चर्चा नहीं करना चाहता। जबकि कश्मीर में हालात बहुत खराब है, चार-पांच मीने कफ्र्यू रहा, हिंसा और खून-खराबा का दौर जारी है। छोटी-छोटी घटना इतना बड़ा रूप ले रही कि मानों बात हाथ से निकल रही हो।
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चिंतनशील नागरिक के तौर पर दो बार कश्मीर हो आए सिन्हा की टीम ने सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। वह केन्द्र सरकार के अगले कदम की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सिन्हा का मानना है कि वाजपेयी की नीतियों, सोच और व्यवहारिकता का अभी सही माने में अमल नहीं हो रहा है। इसके चलते कश्मीर में हालात दिन प्रतिदिन बिगड़ते जा रहे हैं। पूर्व विदेश मंत्री ने कहा कि कश्मीर में अपनी असफलताओं पर पर्दा जालकर बहाना बना रहे हैं कि वहां  जो हो रहा है वह पाकिस्तान करा रहा है। कश्मीर भारत के कब्जे में है और इसके बाद ऐसा कहना ठीक नहीं है।
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मेरठ-राजस्थान में जो हो रहा है बंद कराए सरकार

jammu - फोटो : Amar Ujala
बातचीत के सवाल पर सिन्हा का मानना है कि सभी पक्षों से बातचीत होनी चाहिए। जम्मू, कश्मीर घाटी और लद्दाख के लोगों से चर्चा होनी चाहिए। कश्मीरी पंडितों, घाटी में रह रहे पंडितों, सिक्ख समेत अन्य अल्पसंख्यक समुदाय, आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक पक्ष से जुड़े लोगों, सिविल सोसाइटी, कालेज, विश्वविद्यालय के प्रबुद्ध लोगों, पत्रकारों आदि से भी कश्मीर में उनकी समस्याओं पर चर्चा करके समाधान की पहल होनी चाहिए। इस बातचीत में हुर्रियत जैसे अलगावाववादियों को भी शामिल किया जाना चाहिए।

यशवंत सिन्हा ने कहा कि कश्मीर की समस्या को लेकर हमारी अपने लोगों से वार्ता का तो सही समय है, लेकिन पाकिस्तान के साथ बातचीत का उपयुक्त समय नहीं है। इसलिए अभी इसको लेकर पाकिस्तान से बातचीत नहीं होनी चाहिए। कश्मीर का मसला भारत का अंदरुनी मामला है और हम इसमें पाकिस्तान को शामिल करने के पक्ष में नहीं है। इसे आपस में ही मिल बैठकर सुलझाया जाना चाहिए। पूर्व विदेश मंत्री ने कहा कि कभी न कभी पाकिस्तान से बात करनी पड़ेगी, क्योंकि कश्मीर का एक बड़ा भू-भाग उसके पास है। लेकिन अभी उसका समय नहीं है।
यशवंत सिन्हा के अनुसार मेरठ, राजस्थान में कश्मीरियों को लेकर जो पोस्टर लगाए जा रहे हैं, सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए। इसका कश्मीर के मुद्दे पर बहुत खराब असर पड़ रहा है। वहां लोग बहुत गुस्से में हैं। वह कहते भी आखिर 1947 में जिस विश्वास के साथ भारत में शामिल हुए थे अब वहीं उनके लोगों को मारा-पीटा, प्रताडि़त किया जा रहा है। इसी तरह से देश में हिन्दुत्व के नाम पर हो रही गुंडागर्दी का भी वहां असर पड़ता है। यह ठीक नहीं है।
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