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राजनीति: कोलकाता में लगे कैलाश विजयवर्गीय गो बैक के नारे वाले पोस्टर, विवाद के बाद हटे

सार

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में लगे झटकों के बाद बीजेपी में मतभेद तेजी से उभर रहा है। इसी कड़ी में शुक्रवार को कोलकाता में पार्टी के दफ्तर से लेकर एयरपोर्ट तक पार्टी के बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय के खिलाफ पोस्टर लगाए गए। इनमें कैलाश के लिए गो बैक-टीएमसी सेटिंग मास्टर लिखा गया है। इनमें कैलाश के अलावा मुकुल राय की भी तस्वीर है। हालांकि विवाद बढ़ने से पहले ही इन पोस्टरों को हटा दिया गया।
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कोलकाता में लगाया गया कैलाश विजयवर्गीय का पोस्टर - फोटो : अमर उजाला
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इन पोस्टरों के सामने आने से राज्य की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। हालांकि भाजपा ने इनके लिए तृणमूल कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है।  लेकिन हाल की घटनाओं को ध्यान में रखें तो यह भाजपा की लगातार तेज होती अंतरकलह का नतीजा माना जा रहा है। दरअसल, मुकुल रॉय कैलाश के करीबी थे। उनके टीएमसी में शामिल होने के बाद कैलाश के खिलाफ भी पार्टी में आवाजें उठ रही हैं।

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दो मई को विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद से ही कैलाश बंगाल में उतने सक्रिय नजर नहीं आए हैं। इस दौरान वे एक बार भी कोलकाता नहीं आए हैं। चुनाव से पहले पार्टी के तमाम बैठकों में शामिल रहने वाले कैलाश ने उसके बाद किसी भी बैठक में वर्चुअली भी हिस्सा नहीं लिया है। इसके अलावा वे खासकर बंगाल चुनाव और उसके नतीजों पर पत्रकारों से भी ज्यादा बात नहीं कर रहे हैं।

विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के लिए प्रदेश नेताओं के एक गुट ने कैलाश को भी जिम्मेदार ठहराया था। वैसे भी पार्टी के पुराने नेताओं और कैलाश के बीच तालमेल की कमी की खबरें सामने आती रही हैं। नेताओं की नाराजगी की वजह यह है कि कैलाश ही मुकुल राय को टीएमसी से बीजेपी में ले आए थे। मुकुल राय के टीएमसी में लौटने के बाद विरोध के स्वर अचानक तेज हो गए।
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चुनाव के नतीजों के बाद मेघालय और त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल और बीजेपी नेता तथागत राय ने अपने ट्वीट्स में प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष के अलावा कैलाश, शिव प्रकाश और अरविंद मेनन पर निशाना साधा था। राय ने अपने एक ट्वीट में कहा था, "आंटी (बुआजी) ममता, कृपया इन्हें भी तृणमूल में ले जाइए। हो सकता है कि उसे अपने दोस्त की याद आ रही हो। दोनों पूरे दिन एक साथ रहते थे।''

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