सिंधिया की मौजूदगी में अपने संक्षिप्त संबोधन भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने दो बार राजमाता का नाम लिया। नड्डा के याद करने की गहराई से लग रहा था कि वह ज्योतिरादित्य से भी यही उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन सिंधिया घराने के भाजपा में शामिल हुइ कद्दावर नेता दादी से दूरी बनाए रखी।
ज्योतिरादित्य ने भाजपा ज्वाइन करने के बाद बताया कि उनके जीवन में दो तारीखें महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के जीवन में कुछ तारीख होती हैं, जो उसके जीवन के पूरे ध्येय को बदल देती है। उन्होंने कहा कि ये दोनों तारीखें 30 सितंबर 2001 और 10 मार्च 2020 है।
30 सितंबर को उनके पूज्य पिता माधव राव सिंधिया की दुर्घटना में मृत्यु हुई थी और 10 मार्च 2020 को उनके पिता की 75वीं वर्षगांठ थी। सिंधिया ने कहा कि उनके पिता ने और 18 साल के राजनीतिक जीवन में स्वयं उन्होंने भारत माता की जनसेवा को ही पहला लक्ष्य बताया। उन्होंने कहा कि उनके पिता ने और उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में रह कर यही करने की कोशिश की। लेकिन दादी की बनाई पार्टी में दादी को ही भूल गए।
भाजपा मुख्यालय के जिस प्रेसवार्ता हाल में ज्योतिरादित्य ने हरे किनारे वाला भगवा पटका धारण कर भाजपा की सदस्यता ली, वहां कुछ भाजपा के नेता भी मौजूद थे। कुछ भाजपा मुख्यालय के अन्य कमरे में बैठकर सिंधिया के भाजपा में आने की औपचारिकता देख रहे थे। लेकिन यह सत्र समाप्त होने के बाद एक बड़े नेता की जुबान पर भी सिंधिया का यह संस्कार था।
इस दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया के चेहरे का भाव लगातार नई रंगत ले रहा था। इसमें उत्साह कम और तनाव ज्यादा था। इतना ही नहीं वे मीडिया का सवाल लेने के लिए भी तैयार नहीं थे। अपनी बात खत्म करके चुपचाप वरिष्ठ नेताओं के साथ चले गए। सिंधिया के चेहरे पर तनाव के दो-तीन क्षण आए। खासकर जब भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने उनके गले में भगवाई पटका डाला।
कभी तिरंगे किनारे के गमछे से खुद को सजाने वाले सिंधिया का उस समय भाव कुछ और कहानी कह रहा था। हालांकि उन्होंने कहा भी मन दु:खी और व्यथित है। हालांकि इस व्यथा को उन्होंने कांग्रेस पार्टी में अपनी उम्मीदें पूरी न हो पाने, वहां जड़ता आने, मध्यप्रदेश सरकार के भीतर ट्रांसफर उद्योग चलने, भ्रष्टाचार बढ़ने और मंदसौर के किसानो की पीड़ा से जोड़ा। यही कारण उन्होंने कांग्रेस छोड़ने के बताए।