पश्चिम बंगाल में आठ जुलाई को पंचायत चुनाव होने वाले हैं। चुनाव के पहले राज्य के अलग-अलग इलाकों में हिंसाएं भड़की हुई हैं। आगजनी और तोड़फोड़ तो अब आम हो चुकी है। इस बीच रविवार को एक शव मिला, जिसकी पहचान भाजपा उम्मीदवार के बहनोई के रूप में हुई है।
यह है पूरा मामला
पुलिस ने बताया कि घटना कूचबिहार जिले की है। अज्ञात आरोपियों ने शनिवार रात मृतक शंभू दास (30) को घर के बाहर बुलाया था। इसके कुछ घंटे बाद ही तालाब के पास शंभू का शव मिला। डॉक्टर की रिपोर्ट में सामने आया कि मृतक पर कई बार चाकू से वार किये गए थे। भाजपा नेता अजॉय रॉय ने टीएमसी पर निशाना साधते हुए कहा कि दास ने दिनहाटा के दासग्राम क्षेत्र से भाजपा ग्राम पंचायत उम्मीदवार बिसाखा दास का समर्थन किया था। इसलिए टीएमसी कार्यकर्ताओं ने उनकी हत्या कर दी। पश्चिम बंगाल के मंत्री उदयन गुहा ने रॉय के दावे को खारिज करते हुए कहा कि घटना में पार्टी की कोई भूमिका नहीं थी। दास राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं थे। व्यक्तिगत झगड़े के कारण दास की हत्या की गई। भाजपा पश्चिम बंगाल में हर अपराध को राजनीतिक मोड़ देती है।
राज्य में एक और हत्या
इसके अलावा, एक दिन पहले पुलिस ने कहा था कि मालदा जिले में भी टीएमसी उम्मीदवार मुस्तफा शेख पर बदमाशों ने जानलेवा हमला किया था। अस्पताल में डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। एक आंकड़े के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है।
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पिछले पंचायत चुनावों में भी खूब हुई हिंसा
पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के दौरान हिंसा का इतिहास रहा है। 2013 और 2018 के पंचायत चुनाव भी अपवाद नहीं थे। 2013 में जहां पंचायत चुनाव में हिंसा के चलते 39 लोगों की मौत हुई थी, वहीं 2018 में 21 लोग मारे गए थे। पिछले पंचायत चुनाव में 34 प्रतिशत सीटों पर टीएमसी निर्विरोध जीती थी, साथ ही 90 प्रतिशत सीटों पर टीएमसी समर्थित उम्मीदवारों ने ही जीत दर्ज की थी।