निर्दलीय विधायक रवि राणा ने सोमवार को सांसद पत्नी नवनीत कौर राणा के साथ राज्यपाल से मुलाकात के बाद दावा किया कि शिवसेना के करीब 25 विधायक सीधे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा, ‘फडणवीस का मुख्यमंत्री बनना तय है क्योंकि शिवसेना के 20 से 25 विधायक सीधे उनसे बात कर रहे हैं। फडणवीस ने पांच साल में अच्छा काम किया है, इसलिए लोग उन्हें फिर इस पद पर देखना चाहते हैं।’
राज्यपाल से मिले राउत न कहा, हम बाधा नहीं डाल रहे
मुंबई। शिवसेना नेता संजय राउत ने सोमवार को राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी से मुलाकात कर बताया कि सरकार गठन में शिवसेना की ओर से कोई कोई बाधा नहीं डाली जा रही है। हालांकि राउत ने राज्यपाल के साथ उनकी मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया। राउत ने कहा, राज्यपाल ने उन्हें बताया है कि कुछ ही समय में महाराष्ट्र में सरकार का गठन होगा। उन्होंने कहा, राज्यपाल इस मामले में संविधान के नियमों का पूरी तरह पालन कर रहे हैं।
भाजपा पर लगातार हमला कर रहे शिवसेना सांसद संजय राउत ने रविवार की रात अपने ट्विटर अकाउंट से गठबंधन निभाने की बात ‘औकात’ तक पहुंचा दी। उन्होंने दिवंगत बाल ठाकरे की तस्वीर के साथ उनका एक वक्तव्य लगाया और लिखा, दोस्ती उन्हीं से बनाओ जो निभाने की औकात रखते हों। भाजपा फिलहाल शिवसेना के हमलों का जवाब नहीं दे रही है। पार्टी के नेता भी खामोश हैं।
मराठी अखबार ने राउत को बेताल बताया
मुंबई। सियासी गतिरोध के बीच मराठी के अखबार ने बिना नाम लिये शिवसेना नेता संजय राउत को जोकर और बेताल बताया। बेताल किवदंती कथाओं में एक भूत था जो राजा विक्रमादित्य को अपने सवालों में फंसा था। संघ की ओर झुकाव रखने वाले नागपुर से प्रकाशित तरुण भारत ने अपने उद्धव और बेताल शीर्षक से प्रकाशित लेख में राउत पर हमला बोलते हुए लिखा कि वह भाजपा-शिवसेना गठबंधन को महाराष्ट्र की सत्ता में आने से रोक रहे हैं। लेख में लिखा गया कि अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने वाला है ऐसे में राज्य में पूर्ण बहुमत वाली स्थायी सरकार बहुत जरूरी है।
सियासी गतिरोध के बीच महाराष्ट्र में भाजपा के पर्यटन एवं एफडीए मंत्री जयकुमार रावल ने सोमवार को कहा कि पार्टी के कुछ नेता दोबारा चुनाव कराने को तैयार हैं।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के करीब रावल ने एक चैनल को बताया कि पार्टी नेताओं का कहना है कि नेतृत्व को शिवसेना के साथ गठबंधन को लेकर बहुत मशक्कत करने की जरूरत नहीं है।
हमें दोबारा मौका दिया जाए और इस बार हम और अधिक वोटों के साथ जीतकर सरकार बना लेंगे। मौजूदा चुनाव में भाजपा को 105 और शिवसेना को 56 सीटें मिली हैं।
पवार ने शिवसेना के पाले में डाली गेंद
महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन की गुत्थी सुलझने के बदले और उलझ गई है। कांग्रेस और भाजपा ने शिवसेना की उनके समर्थन के नाम पर भाजपा से मोलभाव की रणनीति पर पानी फेर दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष और एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने तय किया है कि जब तक शिवसेना सार्वजनिक तौर पर भाजपा ने नाता तोड़ने का फैसला नहीं करेगी, तब तक दोनों दल नई सरकार के गठन की प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेंगे। जाहिर तौर पर कांग्रेस और एनसीपी के इस रुख के बाद सूबे में नई सरकार के गठन की गेंद शिवसेना के पाले में चली गई है।
सोमवार शाम सोनिया से मुलाकात के बाद पवार ने साफ शब्दों में कहा, भाजपा-शिवसेना के पास बहुमत होने के कारण सरकार बनाने की जिम्मेदारी उनकी है। कांग्रेस और एनसीपी के पास सरकार बनाने के लिए जरूरी संख्या नहीं है। इस सिलसिले में न तो शिवसेना ने उनसे बात की है और ना ही एनसीपी ने शिवसेना से संपर्क किया है। हालांकि पवार ने भाजपा-शिवसेना के बीच जारी खींचतान को नूरा कुश्ती की जगह गंभीर मामला बताया।
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस और एनसीपी दोनों दल नहीं चाहते कि शिवसेना उनके समर्थन का दबाव दिखा कर भाजपा से मोलभाव करे। यही कारण है कि सोनिया-पवार की मुलाकात में शिवसेना की ओर से भाजपा के समर्थन के इतर सरकार बनाने की पहल का इंतजार करने पर सहमति बनी। दोनों दल नहीं चाहते कि उनकी ओर से पहल होने के बाद शिवसेना एक बार फिर से भाजपा से गठबंधन कर ले।
भाजपा 1995 के फार्मूले पर राजी
उधर, पूरे घटनाक्रम से चिंतित भाजपा ने नई सरकार में शिवसेना की भागीदारी बढ़ाने और महत्वपूर्ण मंत्रालय देने का नया फार्मूला तैयार किया है। पार्टी का कहना है कि अगर शिवसेना 1995 के फार्मूले पर सरकार बनाने के लिए भी राजी हो तो भाजपा तैयार है। तब के फार्मूले में सबसे अधिक सीटें जीतने वाले को सीएम का पद और दूसरे को डिप्टी सीएम समेत कुछ अहम मंत्रालय दिया जाना शामिल था।