छत्तीसगढ़ सरकार ने कोर्ट को बताया कि मुकेश गुप्ता के खिलाफ दो केस दर्ज हैं और वह गिरफ्तारी से भाग रहे थे इसलिए फोन टैप कराना पड़ा। वहीं, सरकार ने बेटियों की फोन टैपिंग की बात नहीं मानी। इस पर पीठ ने कहा, मुकेश गुप्ता का आचरण खराब हो सकता है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि उनका फोन टैप किया जाए।
यह किसी सूरत में ठीक नहीं। इस तरह की बात आखिर क्यों हो रही है। छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के दौरान हुए सिविल सप्लाई घोटाले की जांच के लिए गठित एसआईटी की रिपोर्ट के बाद मुकेश के खिलाफ केस दर्ज किया है।
भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो और आर्थिक अपराध शाखा ने फरवरी 2015 में सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन के 25 ठिकानों पर छापा मारकर घोटाला उजागर किया था।
इसके अतिरिक्त पीठ ने मुकेश गुप्ता के वकील महेश जेठमलानी को कहा कि इस मामले में छत्तीसगढ़ के सीएम का नाम खींचकर राजनीतिक रंग न दिया जाए। पीठ ने याचिका से वादी के तौर पर सीएम का नाम हटाने का आदेश दिया।
वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तंखा ने कोर्ट को बताया था कि इस मामले से मुख्यमंत्री का कोई लेना देना नहीं और उनका नाम बेवजह पार्टी बनाया जा रहा है। इसलिए इसे हटाया जाए। अब इस मामले में शुक्रवार को सुनवाई होगी।