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आईपीएस के फोन टैपिंग पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता, कहा- ऐसा लग रहा निजता नहीं बची

Tue, 05 Nov 2019 03:44 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी मुकेश गुप्ता के फोन टैपिंग मामले में छत्तीसगढ़ सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा, ऐसा लग रहा है कि देश में निजता बची ही नहीं है। शीर्ष कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि क्या इस तरह किसी व्यक्ति के निजता के अधिकार का उल्लंघन किया जाना चाहिए?

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जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस इंदिरा बनर्जी की पीठ ने सोमवार को छत्तीसगढ़ सरकार को हलफनामा देकर यह बताने को कहा कि किसके आदेश पर और क्यों फोन टैपिंग की गई? पीठ ने पूछा कि किसी अधिकारी की बातचीत छिपकर सुनने की क्या जरूरत थी? देश में क्या हो रहा है, किसी के लिए निजता बची ही नहीं है। मुकेश गुप्ता ने कोर्ट को बताया कि उनके और उनकी दो बेटियों के फोन टैप किए गए।

कोर्ट ने गुप्ता की पैरवी कर रहे वकील के खिलाफ दायर एफआईआर के मामले में भी सुनवाई को स्वीकार कर लिया। पीठ ने इस मामले में आदेश आने तक आईपीएस अधिकारी और उनके वकील के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगा दी।

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वह गिरफ्तारी से भाग रहे थे इसलिए फोन टैप कराना पड़ा

छत्तीसगढ़ सरकार ने कोर्ट को बताया कि मुकेश गुप्ता के खिलाफ दो केस दर्ज हैं और वह गिरफ्तारी से भाग रहे थे इसलिए फोन टैप कराना पड़ा। वहीं, सरकार ने बेटियों की फोन टैपिंग की बात नहीं मानी। इस पर पीठ ने कहा, मुकेश गुप्ता का आचरण खराब हो सकता है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि उनका फोन टैप किया जाए।

यह किसी सूरत में ठीक नहीं। इस तरह की बात आखिर क्यों हो रही है। छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के दौरान हुए सिविल सप्लाई घोटाले की जांच के लिए गठित एसआईटी की रिपोर्ट के बाद मुकेश के खिलाफ केस दर्ज किया है।

भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो और आर्थिक अपराध शाखा ने फरवरी 2015 में सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन के 25 ठिकानों पर छापा मारकर घोटाला उजागर किया था।
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 याचिका से सीएम का नाम हटाने का निर्देश

इसके अतिरिक्त पीठ ने मुकेश गुप्ता के वकील महेश जेठमलानी को कहा कि इस मामले में छत्तीसगढ़ के सीएम का नाम खींचकर राजनीतिक रंग न दिया जाए। पीठ ने याचिका से वादी के तौर पर सीएम का नाम हटाने का आदेश दिया।

वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तंखा ने कोर्ट को बताया था कि इस मामले से मुख्यमंत्री का कोई लेना देना नहीं और उनका नाम बेवजह पार्टी बनाया जा रहा है। इसलिए इसे हटाया जाए। अब इस मामले में शुक्रवार को सुनवाई होगी।
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