पिछले आठ साल से तकरीबन सभी राजनीतिक दलों ने चुनावी घोषणापत्रों में महिलाओं पर फोकस करना शुरू कर दिया है। इन चुनावों में भी सियासी दलों के घोषणापत्र महिलाओं के लिए लोकलुभावन वादों के इर्द-गिर्द बुने गए। इसकी वजह भी है। सभी राज्यों में आधी आबादी अब एक मजबूत वोट बैंक है। इस वोट बैंक में सांप्रदायिक ताकतें भी सेंध नहीं लगा सकतीं। साक्षरता बढ़ी है और महिलाएं स्वतंत्र निर्णय लेने लगी हैं। यही वजह है कि राज्य विधानसभा चुनावों में महिलाओं के मतदान में तेज वृद्धि हुई है। दयाशंकर शुक्ल सागर की रिपोर्ट...
पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में महिलाएं गेमचेंजर साबित हुईं। तकरीबन सभी दलों ने महिलाओं के लिए लोकलुभावन योजनाएं घोषित की थीं, लेकिन भाजपा की योजनाओं पर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी निजी गारंटी दी थी। असर यह हुआ कि मध्यप्रदेश में 'लाडली बहना योजना' और छत्तीसगढ़ में 'महतारी वंदन योजना' का एलान रंग लाया। नतीजतन दोनों राज्यों में महिलाएं पुरुषों के मुकाबले अधिक उत्साह से वोट डालने निकलीं और लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल कहे जाने वाले इन विधानसभा चुनावों में भाजपा के पास सत्ता की चाभी आ गई।
मध्य प्रदेश : बहनों ने मामा को बनाया चहेता
लाडली बहना योजना ने मामा को बनाया चहेता मध्यप्रदेश में जून में शुरू हुई 'लाडली बहना योजना' ने कमाल दिखाया। इस योजना के तहत सूबे में 23 से लेकर 60 साल तक की उम्र वाली एक करोड़ 25 लाख महिलाओं के बैंक खाते खोले गए। इनमें शिवराज सिंह सरकार हर महीने एक हजार रुपये डालने लगी। जब उनके खाते में ये रुपये आए तो कई महिलाओं ने कहा कि इतना तो उन्हें मजदूरी भी नहीं मिलती।
शिवराज सिंह चौहान ने एक कदम आगे बढ़ते हुए महिला वोटरों से वादा किया कि चुनाव जीतने पर यह राशि बढ़ाकर 3,000 रुपये कर दी जाएगी। शिवराज ने महिलाओं के लिए 'रक्षाबंधन उपहार' के रूप में सब्सिडी वाली रसोई गैस और सरकारी नौकरियों में अधिक आरक्षण का भी वादा किया। हालांकि कांग्रेस ने भी राज्य की प्रत्येक महिला को 1,500 रुपये प्रति माह देने का वादा किया था। लेकिन मप्र की 2.60 करोड़ महिलाओं ने मामा शिवराज पर भरोसा जताया। पैसे खाते में आने लगे तो भाजपा के प्रति महिलाओं का यकीन बढ़ा। इस स्कीम की देश भर में खूब चर्चा हुई।
लाडली बहना योजना रंग लाई
महिलाएं घर से निकलीं और भाजपा के लिए जमकर वोट डाले। 1993 में 100 में से सिर्फ 52 महिलाएं मतदान करती थीं। 2023 में ये आंकड़ा 76 तक पहुंच गया। आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश की 34 सीटों पर महिलाओं ने पुरुषों से ज्यादा मतदान किया है। इन 34 में अधिकाश सीटों पर भाजपा जीती। पुरुष वोटरों का रुझान भी भाजपा की तरफ रहा क्योंकि पैसे तो आखिर उनकी पत्नी के खाते में आ रहे थे। इनमें अधिकाश सीटों पर भाजपा के उम्मीदवारों ने जीत हसिल की। मसलन अलीराजपुर से चौहान नागर सिंह, पानसेमल सीट से श्याम बरडे, उज्जैन दक्षिण से डाॅ. मोहन यादव, रतलाम सिटी से चैतन्य कश्यप भइया जी और इंदौर-4 सीट से मालिनी लक्ष्मण सिंह गौड़ चुनाव जीत गईं। ऐसी कई सीटों पर जहां महिला वोटर अधिक थीं, वहां वोट भाजपा की झोली में गए।
छत्तीसगढ़ : दुर्गावती योजना के वादे ने बदल दिए समीकरण
मोदी की गारंटी पर जताया भरोसा लाडली बहना योजना की लोकप्रियता देखते हुए भाजपा ने पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में 'महतारी वंदन योजना' का एलान कर दिया। इस योजना में सभी विवाहित महिलाओं को सालाना 12 हजार रुपये देने का वादा किया गया। हालांकि तुंरत बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 'छत्तीसगढ़ गृहलक्ष्मी योजना' एलान कर महिलाओं के बैंक खातों में सालाना 15,000 रुपये की मदद देने का वादा किया गया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इसके अलावा भाजपा ने रानी दुर्गावती योजना का वादा किया है। मुंगेली की रैली में पीएम मोदी ने कहा, छत्तीसगढ़ भाजपा ने आपसे जो वादे किए हैं, वो सरकार जल्द पूरा करके दिखाएगी। ये मोदी की गारंटी है।
छत्तीसगढ़ की 90 में से 50 सीटों पर महिलाओं ने ज्यादा किया मतदान
इनमें करीब 29 सीटें ऐसी हैं जिनमें महिलाओं ने निर्णायक भूमिका निभाई। कवर्धा सीट पर 1.66 लाख महिला मतदाता हैं जबकि यहां पुरुष वोटर 1.64 लाख हैं। यहां भाजपा के विजय शर्मा बीस हजार से अधिक वोटों के अंतर से जीते। इसी तरह नारायणपुर में भाजपा के केदार कश्यप, दंतेवाड़ा में चैतराम अटामी, पंडरिया में भावना बोहरा, जगदलपुर में किरन देव ने जीत हासिल की।
राजस्थान : महिला सुरक्षा के वादे ने दिलाया प्रचंड बहुमत
राजस्थान में महिलाओं को पैसा देने का वादा न कांग्रेस ने किया और न भाजपा ने। इसके बदले भाजपा ने महिला सुरक्षा का वादा किया। पार्टी ने हर जिले में महिला थाना खोलने और छात्राओं को स्कूटी जैसी सुविधाओं का वादा किया। महंगाई से राहत के लिए रसोई गैस भी कांग्रेस की गारंटी वाली कीमत से कम में उपलब्ध कराने की बात कही। लाडो प्रोत्साहन योजना का वादा किया था। इसमें राज्य सरकार राजस्थान में हर गरीब बच्ची के जन्म पर 2 लाख रुपए का सेविंग बॉन्ड देगी।
इस बार 75.45 फीसदी मतदान हुआ
प्रदेश की 74.72 प्रतिशत महिलाओं और 74.53 प्रतिशत पुरुषों ने मतदान किया है। यानी 0.19 फीसदी अधिक महिलाओं ने वोट देकर नई सरकार चुनने में बड़ी भूमिका निभाई। राजस्थान की गहलोत सरकार ने अपने आखिरी साल में महिलाओं को कई सौगातें दी थीं। इसके तहत परिवारों की महिला मुखिया के लिए इंदिरा गांधी स्मार्टफोन योजना शुरू की थी। इसमें सरकार ने 1.35 करोड़ महिलाओं को फ्री मोबाइल फोन के साथ इंटरनेट डाटा देने का लक्ष्य रखा था। ...लेकिन इसका फायदा कांग्रेस को नहीं मिला।
तेलंगाना : लक्ष्मी योजना से कांग्रेस को मिली संजीवनी
महालक्ष्मी, कल्याण लक्ष्मी योजनाओं से कांग्रेस की चांदी तेलंगाना में कांग्रेस ने महिलाओं के लिए अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक पेशकश की। कांग्रेस ने महालक्ष्मी योजना का एलान किया जिसके तहत तेलंगाना की महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये दिए जाएंगे। यानी साल के तीस हजार रुपये। यह रकम सालाना 24,000 रुपये से ज्यादा है जो कांग्रेस कर्नाटक में महिलाओं को पहले से दे रही है। कांग्रेस ने 500 रुपये में गैस सिलिंडर और महिलाओं को आरटीसी बसों में मुफ्त यात्रा का वादा भी किया। इसके अलावा कांगेस ने कल्याण लक्ष्मी/शादी मुबारक योजना का एलान किया जिसमें दुलहन को 10 ग्राम सोना और एक लाख रुपये की मदद देने का वादा किया गया। इसके अलावा कांग्रेस ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को ईपीएफ कवरेज के तहत लाने और महिलाओं को चार मंत्री पद देने का वादा कर उनका दिल जीत लिया। नतीजा यह रहा कि कांग्रेस को तेलंगाना में रिकार्ड सीटें मिलीं। इस चुनाव में महिला वोटरों ने राज्य की सरकार चुनने में निर्णायक भूमिका निभाई।