राज्य चुनाव आयोग ने अगले महीने होने वाले पंचायत चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने की बढ़ी समयसीमा वापस ले ली है। वहीं आयोग के इस फैसले के खिलाफ भाजपा ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की। इस याचिका पर अब बुधवार को सुनवाई होगी। बता दें कि सोमवार को नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख थी। इसी संबंध में कोलकाता में राज्य चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया।
राज्य निर्वाचन आयोग ने भी विपक्षी दलों की शिकायत के आधार पर इसकी समयसीमा एक दिन के लिए बढ़ा दी थी। लेकिन आयोग ने मंगलवार को अचानक अपने पहले के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें समयसीमा बढ़ाई गई थी। आयोग की ओर से जारी ताजा अधिसूचना में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने नामांकन की तारीख आगे बढ़ाने के बारे में निर्देश नहीं दिया था। तमाम दस्तावेजों के अध्ययन और सभी बिंदुओं पर विचार के बाद पहले का आदेश वापस लिया जाता है।
अधिसूचना में कहा गया है कि इस मुद्दे पर आयोग को राज्य सरकार के विशेष सचिव और तृणमूल कांग्रेस की ओर से दो अलग-अलग पत्र मिले हैं। उनमें आयोग के पहले आदेश की कानूनी खामियों का जिक्र किया गया है। आयोग की इस अधिसूचना के जारी होने के कुछ देर बाद ही भाजपा की प्रदेश शाखा ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर दी। इस पर कल सुनवाई होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले पार्टी की दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई के बाद सोमवार को पंचायत चुनावों की प्रक्रिया में हस्तेक्षप करने से इनकार कर दिया था। उसने राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को इस मुद्दे पर राज्य चुनाव आयोग के समक्ष लिखित शिकायत करने को कहा था। अदालत ने कहा था कि चुनाव संबंधित शिकायतों का निपटारा आयोग कानूनी तौर पर करेगा।
प्रदेश भाजपा का आरोप है कि राज्य चुनाव आयोग ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के दबाव में ही समयसीमा बढ़ाने का आदेश वापस लिया गया है। प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने दावा किया कि आयोग के फैसला बदलने की वजह से पार्टी के कई उम्मीदवार अपना नामांकन पत्र दाखिल नहीं कर सके हैं।