उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
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महिलाओं को नकद आर्थिक सहायता देने की योजना भाजपा के लिए वरदान साबित हुई है। इस तरह की योजनाओं की सहायता से भाजपा ने मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली सहित कई राज्यों में सरकार बनाने में सफलता हासिल की है। अब यही स्कीम बिहार में भी आजमाने की तैयारी है। भाजपा-जेडीयू सरकार जल्द ही बिहार में महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये देने की घोषणा कर सकती है।
बिहार विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले महिलाओं के खाते में योजना की पहली किस्त पहुंचाकर बिहार सरकार महिलाओं को पूरी तरह अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश कर सकती है। इस योजना का नाम क्या हो सकता है, इस पर अभी विचार-विमर्श हो रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही इस योजना के नाम पर अंतिम मुहर लगाएंगे। कांग्रेस पहले ही बिहार में चुनाव जीतने पर 'माई बहिन मान योजना' के अंतर्गत महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये देने की घोषणा कर चुकी है।
महिला मतदाता किसके साथ
बिहार में 3.50 करोड़ महिला मतदाता हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाएं अधिक बढ़ चढ़कर वोट करती हैं। शराब बंदी योजना लागू करने के बाद महिलाएं पूरी तरह से नीतीश कुमार के साथ एकजुट होकर खड़ी हो गई हैं। इसके अलावा पंचायतों में 50 फीसदी का महिला आरक्षण देकर, छात्राओं को साइकिल देकर और जीविका कैंटीन के सहारे महिलाओं के सेल्फ हेल्प ग्रुप बनाकर उनका आर्थिक सशक्तीकरण करके नीतीश कुमार ने महिलाओं को अपने साथ कर लिया है।
लेकिन प्रशांत किशोर ने बिहार सरकार के सामने कड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं। वे महिलाओं को यह वादा कर रहे हैं कि यदि वे बिहार की सत्ता में आते हैं तो हर परिवार को न्यूनतम 20 हजार रूपये की आय होना सुनिश्चित करेंगे। अपनी जनसभाओं में वे लगातार यह अपील कर रहे हैं कि अब जनता नेताओं की बजाय अपने बच्चों के भविष्य के बारे में सोचे। लोगों की मानें तो उनकी यह अपील महिलाओं के बीच बहुत लोकप्रिय हो रही है और यह एनडीए की महिला मतदाताओं के एक वर्ग को प्रभावित कर सकती है।
'महिला मतदाता तय करेंगी बिहार का भविष्य'
बिहार की राजनीति पर गहरी पकड़ रखने वाले राजनीतिक विश्लेषक दीपक शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि राज्य में 3.5 करोड़ के लगभग महिला मतदाता हैं। पुरुषों की तुलना में महिला मतदाता अधिक संख्या में राज्य के अंदर निवास करती हैं और मतदान देने के मामले में भी महिला मतदाता ही सबसे आगे रहती हैं। यही कारण है कि लोग मानते हैं कि बिहार में कौन सरकार बनाएगा, यह महिलाएं ही तय करेंगी।
दीपक शर्मा ने कहा कि सत्तारूढ़ एनडीए के साथ-साथ राजद-कांग्रेस गठबंधन भी महिलाओं को अपने साथ साधने में जुटा हुआ है। कांग्रेस ने पहले ही महिलाओं को 2500 रुपये देने की घोषणा कर रखी है। बिहार सरकार ने अनेक योजनाओं के सहारे पहले ही महिला मतदाताओं पर अपनी पकड़ बना रखी है, लेकिन नए समीकरणों में सत्ता पक्ष कोई रिस्क नहीं लेना चाहता है, लिहाजा वह महिलाओं के लिए विशेष आर्थिक सहायता की घोषणा कर अपनी जीत पर महिलाओं के वोट की पक्की मुहर लगाना चाहता है।