कर्नाटक में भाजपा और जेडीएस मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) घोटाले को लेकर अपना विरोध जता रही है। उसने शनिवार को 10 दिवसीय पदयात्रा शुरू की, जो सोमवार को भी जारी रही। दोनों पार्टियों ने बंगलूरू के केनगेरी से अपनी पदयात्रा की शुरुआत करी, जो मैसूर में समाप्त होगी। इस पदयात्रा के दौरान दोनों पार्टियां कथित एमयूडीए और वाल्मिकी कॉरपोरेशन में हुए घोटाले को मुद्दा बनाने की कोशिश करेंगी।
आज 20 किलोमीटर की दूरी तय करेंगे नेता
पदयात्रा को 'मैसूर चलो' नाम दिया गया है। पदयात्रा तीसरे दिन केंगल से शुरू हुई, जो 20 किलोमीटर की दूरी तय करके मांड्या जिले के निदाघट्टा पहुंचेगी। केंगल में मार्च शुरू होते ही भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक बी वाई विजयेंद्र, विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक तथा जेडीएस के कई नेताओं, विधायकों और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया।
ढोल के बीच कांग्रेस सरकार के खिलाफ लगाए नारे
आज मार्च से पहले विजयेंद्र और अन्य भाजपा नेताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री केंगल हनुमंथैया के स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की। ढोल की थाप के बीच दोनों पार्टियों के बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और नेताओं ने भाजपा और जेडीएस पार्टी के झंडे और तख्तियां लेकर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनके नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के खिलाफ नारे लगाए। विपक्षी नेताओं ने मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग भी की। बता दें, जिस जगहों से पैदल यात्रा गुजरी, उस मार्ग को दोनों पार्टियों के झंडों, कई स्थानों पर प्रमुख नेताओं के चित्रों से सजाया गया था।
क्या है मामला?
सीएम सिद्धारमैया की पत्नी को मैसूर के एक महंगे इलाके में मुआवजा देने के लिए जगह आवंटित की गई थी, जिसकी संपत्ति का मूल्य उनकी उस जमीन की तुलना में अधिक था जिसे मुदा ने अधिग्रहित किया था। बता दें कि मुदा ने सीएम सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को उनकी 3.16 एकड़ जमीन के बदले 50:50 अनुपात योजना के तहत प्लॉट आवंटित किए थे, जहां मुदा ने आवासीय खाका बनाया था। विवादास्पद योजना में खाका बनाने के लिए अधिग्रहित अविकसित भूमि के बदले में भूमि खोने वाले को 50 प्रतिशत विकसित भूमि आवंटित करने की परिकल्पना की गई है।