फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

क्या वरुण गांधी से डरती है बीजेपी?

Mon, 30 Jan 2017 02:58 PM IST
रजनीश कुमार / बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
जगह- उत्तर प्रदेश में पीलीभीत जिले का बरखेरा गांव। तारीख- 9 मार्च और साल 2009 व्यक्ति- वरुण गांधी 29 साल के वरुण ने एक रैली को संबोधित करते हुए बीजेपी नेता के रूप में 'विवादास्पद बयान' देकर सुर्खियों में आए थे।
विज्ञापन


इस बयान के बाद लगा कि भारतीय जनता पार्टी को वरुण गांधी के रूप में युवा चेहरा मिल गया। वही वरुण इन दिनों अपनी पार्टी में हाशिए पर हैं। जब तक बीजेपी की कमान राजनाथ के पास रही तब तक वरुण गांधी की पार्टी में सम्मानजनक हैसियत रही। वे पार्टी महासचिव रहे, पश्चिम बंगाल में पार्टी के प्रभारी भी रहे।

अमित शाह के आने के बाद वरुण बहाशिए पर

जब बीजेपी में नरेंद्र मोदी को पीएम प्रत्याशी बनाने के लिए उठापटक जारी थी तब वरुण ने राजनाथ की तुलना अटल से करते हुए पीएम उम्मीदवार बनाने की वकालत की थी। वरुण ने एक मई, 2013 को कहा था, ''वाजपेयी की सोच बहुत अच्छी थी। उनका शासनकाल देश के हर बच्चे को याद है।

मैं पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूं कि आज की तारीख में देश में कोई व्यक्ति जाति और मजहब की दीवार तोड़कर लोगों को साथ ला सकता है तो वह आदरणीय राजनाथ सिंह हैं।'' यह बात वरुण ने राजनाथ सिंह की मौजूदगी में बरेली के पास एक जनसभा में कही थी। बीजेपी की कमान जब अमित शाह के हाथ में आई तो उन्होंने वरुण गांधी को पार्टी महासचिव से हटा दिया। उनसे बंगाल की भी जिम्मेदारी वापस ले ली गई। 

पार्टी लाइन से अलग बयानबाजी

कोलकाता के ब्रिगेड परेड मैदान में छह फरवरी, 2014 को मोदी ने रैली की थी। मोदी की रैली के बाद इस बात की चर्चा हो रही थी कि भारी संख्या में लोग मोदी को सुनने पहुंचे थे। लेकिन उस वक्त वरुण ने मीडिया से बातचीत में कहा था, ''मीडिया के पास ग़लत आंकड़ा है।

यह सच नहीं है कि रैली में दो लाख से ज्यादा लोग आए थे। रैली में 45 से 50 हजार के बीच लोग आए थे।'' अगस्त, 2014 में अमित शाह ने अपनी नई टीम की घोषणा की और वरुण गांधी को पार्टी महासचिव पद से हटा दिया गया। आज की तारीख में वरुण गांधी 37 साल के हैं लेकिन पार्टी में उनकी हैसियत गुमनाम सी हो गई है।

वरुण का क्या होगा?

क्या बीजेपी वरुण गांधी से डरती है? क्या नेहरू-गांधी खानदान के वरुण महज एक सांसद होने पर संतोष कर लेंगे? क्या उनका भविष्य अब अमित शाह और नरेंद्र मोदी की बीजेपी में नहीं है? राजनीतिक विश्लेषक अभय कुमार दुबे का कहना है कि तीनों बातें सही हैं। इलाहाबाद में जब पिछले साल जून में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई थी

तब वरुण के समर्थकों ने अपनी ताकत दिखाई थी, लेकिन यह नरेंद्र मोदी और अमित शाह को पसंद नहीं आया था। अभय कुमार दुबे कहते हैं, ''वरुण गांधी की संघ की पृष्ठभूमि नहीं है। वह स्वतंत्र रूप से सोचने वाले व्यक्ति हैं। मोदी और शाह की बीजेपी उत्तर प्रदेश में किसी मजबूत नेतृत्व को विकसित नहीं करना चाहती है। 
 

वरिष्ठ नेता के वरुण  से डर

उत्तर प्रदेश में यदि कोई लोकप्रिय नेता बीजेपी में उभरकर सामने आता है तो उससे बड़ा नेता कोई नहीं होगा। बीजेपी नहीं चाहती कि रमन सिंह और शिवराज सिंह चौहान की तरह उत्तर प्रदेश में किसी मजबूत नेता का उभार हो।'' उन्होंने कहा, ''उत्तर प्रदेश में वरुण संभावनाओं से भरे नेता हैं। उनकी स्वीकारोक्ति प्रदेश की सभी जातियों में संभव है।

वह बीजेपी की तरफ से एक मजबूत नेता के रूप में उभर सकते थे, लेकिन शाह और मोदी की बीजेपी को वरुण के ज्यादा लोकप्रिय होने का डर है। अटल और कल्याण सिंह में भी विवाद हुआ था, लेकिन कल्याण सिंह को फिर से लाया गया था। तब की बीजेपी शाह और मोदी की बीजेपी से अलग थी। तब बीजेपी में एक सुपारिभाषित क्षेत्रीय नेतत्व के लिए स्पेस थी।

'' अभय कुमार दुबे कहते हैं, "वरुण नेहरू-गांधी परिवार से हैं और उनकी महत्वाकांक्षा केवल सांसद तक ही सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि अभी की बेजीपी में वरुण का भविष्य नहीं दिखता।" वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन का मानना है कि कांग्रेस मुक्त भारत की सोच रखने वाली पार्टी में वरुण का भविष्य काफी धुंधला है।
 
विज्ञापन

अस्तित्व की लड़ाई

उन्होंने कहा, ''उत्तर प्रदेश में वरुण का मंसूबा तगड़ा किरदार निभाने का है, लेकिन बीजेपी इस मंसूबे को फिलहाल कामयाब नहीं होने देगी। यूपी में वरुण बीजेपी को शायद जिंदा कर सकते हैं पर इसके लिए पहले उन्हें बीजेपी में जिंदा होना होगा।'' उन्होंने कहा, ''इस बात को वरुण भी अब बखूबी समझने लगे हैं। आजकल वरुण जो लिखते हैं उनमें सामाजिक न्याय और सहभागिता की बात करते हैं।

उन्हें पता है कि बीजेपी के राज में यह होने से रहा। वरुण गांधी को अमित शाह राजनाथ का आदमी समझते हैं। वरुण के जिस विवादास्पद बयान की चर्चा गर्म रही वह बीजेपी में कोई नई बात नहीं थी। योगी आदित्यनाथ जैसे नेता पहले से ही यहां मौजूद हैं। बीजेपी का जो वर्तमान नेतृत्व है, उसमें वरुण का भविष्य न के बराबर है।''
 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें