उत्तर प्रदेश में नगर निकाय चुनाव में भाजपा भले ही यूपी से लेकर गुजरात तक जीत का जश्न मना रही है। लेकिन प्रदेश के 652 नगर निकायों में हुए निकाय चुनाव में 243 नगर पालिका परिषद और नगर पंचायत के अध्यक्ष पदों पर भाजपा के प्रत्याशी जमानत भी नहीं बचा सके। नगर निगम में पार्षद, नगर पालिका परिषद एवं नगर पंचायतों में सदस्य के पदों पर भी भाजपा के 46 फीसदी प्रत्याशियों की जमानत जब्त हुई है।
राज्य निर्वाचन आयोग के अपर आयुक्त वेद प्रकाश वर्मा ने सोमवार को निकाय चुनाव में जमानत जब्त के आंकड़ों का खुलासा करते हुए सूची में भाजपा को टॉप पर रखा है। 652 निकायों में महापौर और अध्यक्ष पद के लिए 7442 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा। इनमें से 6101 (81.98 प्रतिशत) प्रत्याशियों की जमानत जब्त हुई है। इसी प्रकार पार्षद और सदस्यों के 11995 पदों पर 71671 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा। 47342 (66.05 फीसदी) प्रत्याशियों की जमानत जब्त हुई है।
पढ़ें: कांग्रेस मुख्यालय के बाहर लगे पोस्टर, 'पंडित' राहुल गांधी को सभी भगवानों ने दिया आशीर्वाद
निकायों में महापौर और अध्यक्ष पदों पर भाजपा के 624 में से 184 प्रत्याशी विजयी हुए हैं। जबकि 243 (38.94 प्रतिशत) प्रत्याशियों की जमानत जब्त हुई है। निकायों में सदस्यों के पदों पर 7414 प्रत्याशियों में से 2182 प्रत्याशी विजय हुए हैं और 3413 प्रत्याशी (46.03 प्रतिशत) जमानत भी नहीं बचा सके।
हाथी की सुस्त चाल
बसपा ने प्रदेश में महापौर और अध्यक्ष के 559 प्रत्याशी को लड़ाया था। इनमें से अलीगढ़ एवं मेरठ के महापौर सहित केवल 76 निकाय अध्यक्ष के पदों पर बसपा प्रत्याशी चुनाव जीते और 410 (73.35 फीसदी) प्रत्याशियों की जमानत जब्त हुई। निकायों में सदस्यों के पद पर बसपा ने 3827 प्रत्याशियों को सिंबल पर चुनाव लड़ाया। इनमें से मात्र 627 चुनाव जीत सके और 2500 प्रत्याशियों (65.33 फीसदी) की जमानत जब्त हुई।