लगातार चल रहे किसान आंदोलन के बीच केंद्र सरकार कृषि कानूनों पर जनसर्थन जुटाने की लगातार कोशिश कर रही है। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद से तो पार्टी के सांसद और विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में बैठकें और सभाएं करके कृषि कानूनों के फायदे बता रहे हैं। पार्टी के कार्यक्रमों को भी आकर्षक बनाकर लोगों को इसकी तरफ खींचा जा रहा है। कहीं लिट्टी-चोखा पर कार्यक्रम कराया जा रहा है तो कहीं दूध-जलेबी पर किसानों को बुलाकर कृषि कानूनों की बारीकियां समझाई जा रही हैं।
भाजपा की दिल्ली प्रदेश इकाई भी लगातार बजट और कृषि कानूनों पर जनसमर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। लगातार एक सप्ताह तक चलने वाले इन कार्यक्रमों में समाज के अलग-अलग वर्गों तक पहुंचने की कोशिश जारी है। किसानों, व्यापारियों, छात्रों, महिलाओं और युवाओं के लिए अलग-अलग कार्यक्रम कर इन वर्गों तक पहुंचने की कोशिश हो रही है। पार्टी के सभी नेता बारी-बारी से इसका प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
अफवाहों से बचें किसान: भाजपा
दिल्ली भाजपा प्रदेश इकाई के प्रवक्ता खेमचंद शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए कृषि कानूनों में समय-समय पर सुधार होना चाहिए। केंद्र सरकार ने इसी सोच से किसानों के लिए अनेक नीतियों को लागू किया और किसानों को इसका फायदा मिला है। प्रधानमंत्री किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के वायदे पर आगे बढ़ने के लिए कुछ और प्रयास कर रहे हैं और इसका स्वागत करना चाहिए। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे किसी के बहकावे में न आएं ओर कृषि कानूनों को खुद पढ़कर देखें कि किस तरह यह उनके लिए फायदेमंद है।
पार्टी कार्यकर्ताओं को किसान न बताएं भाजपा-किसान नेता
किसान नेता प्रतिभा शिंदे ने अमर उजाला से कहा कि सरकार इस तरह के कार्यक्रमों में अपने ही लोगों को बुलाकर कृषि कानूनों पर चर्चा कर रही है। इससे उसे कोई लाभ नहीं मिलने वाला है। अगर उसे असली किसानों से चर्चा करनी है तो उसे आंदोलन कर रहे किसानों के पास आना चाहिए। किसान नेता ने कहा कि उन्हें सरकार से बातचीत की पहल का इंतजार है। प्रधानमंत्री को संसद से अपील करने की बजाय किसानों के पास पहुंचने की कोशिश करनी चाहिए।