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पांच राज्यों के चुनाव में भाजपा को मिले 1473 करोड़: कांग्रेस से सात गुना ज्यादा; खर्च और खजाने में कितना अंतर?

Wed, 09 Sep 2026 04:36 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

चुनाव आयोग में जमा खर्च रिपोर्ट के मुताबिक पिछले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा को अपने केंद्रीय मुख्यालय में करीब 1,473 करोड़ रुपये मिले हैं। यह आंकड़ा कांग्रेस को सभी इकाइयों से मिले 207 करोड़ रुपये से सात गुना अधिक है। चुनाव के बाद जहां भाजपा का खजाना कितने रुपये बढ़ा? कांग्रेस का फंड कितना घट गया? आइए, विस्तार से जानते हैं कि दोनों दलों के  खर्च और खजाने में कितना अंतर है...
 
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पांच राज्यों के चुनाव में भाजपा और कांग्रेस को कितना चंदा मिला? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा और कांग्रेस की चुनावी कमाई में बड़ा अंतर सामने आया है। चुनाव आयोग के सामने दाखिल खर्च और आय से जुड़े ब्योरे के मुताबिक, भाजपा के केंद्रीय मुख्यालय को इस अवधि में करीब 1,472.8 करोड़ रुपये मिले। यह कांग्रेस की पांचों राज्यों और केंद्रीय इकाइयों की कुल शुद्ध प्राप्तियों 207.17 करोड़ रुपये से सात गुना से भी ज्यादा है। हालांकि, दोनों आंकड़ों की तुलना करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि भाजपा का उपलब्ध आंकड़ा केवल केंद्रीय मुख्यालय का है।

भाजपा और कांग्रेस को चुनाव के दौरान कितने रुपये मिले?

15 मार्च से 6 मई तक असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुदुचेरी के विधानसभा चुनाव हुए। इस दौरान कांग्रेस ने केंद्रीय मुख्यालय और पांचों राज्यों की इकाइयों को मिलाकर 207.17 करोड़ रुपये की शुद्ध प्राप्तियां बताईं। उसका कुल चुनावी खर्च 248.55 करोड़ रुपये रहा। दूसरी ओर, भाजपा के केंद्रीय मुख्यालय को इसी अवधि में 1,472.8 करोड़ रुपये मिले। भाजपा के केरल और पश्चिम बंगाल चुनावों के खर्च से जुड़े ब्योरे अभी सार्वजनिक नहीं हुए हैं। इसलिए भाजपा की कुल प्राप्तियां उपलब्ध आंकड़े से भी अधिक हो सकती हैं।
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चुनाव के दौरान भाजपा के खजाने में कितना इजाफा हुआ?

भाजपा के केंद्रीय मुख्यालय की वित्तीय स्थिति में चुनाव अवधि के दौरान बढ़ोतरी हुई। 15 मार्च को उसके पास करीब 6,722.6 करोड़ रुपये का समापन शेष था। 6 मई तक यह बढ़कर 7,627.2 करोड़ रुपये हो गया। यानी चुनाव अवधि में केंद्रीय मुख्यालय के पास मौजूद रकम में करीब 904.6 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई। इसके उलट कांग्रेस की केंद्रीय इकाई और पांच राज्य इकाइयों के पास चुनाव की शुरुआत में करीब 169.06 करोड़ रुपये थे। इसमें करीब 22.9 करोड़ रुपये नकद और 146.1 करोड़ रुपये बैंक खातों में थे। चुनाव खत्म होने तक यह रकम करीब 103.2 करोड़ रुपये रह गई। यानी कांग्रेस के पास करीब 65.86 करोड़ रुपये की कमी आई।

भाजपा ने असम, तमिलनाडु और पुदुचेरी में कितना खर्च किया?

  • उपलब्ध खर्च ब्योरे के अनुसार भाजपा ने असम, तमिलनाडु और पुदुचेरी में करीब 159.7 करोड़ रुपये खर्च किए। इसमें लगभग 130.4 करोड़ रुपये सामान्य पार्टी प्रचार पर और बाकी रकम उम्मीदवारों तथा उनसे जुड़े खर्च पर गई। असम में सबसे ज्यादा 96.27 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसमें 76.73 करोड़ रुपये सामान्य प्रचार और 19.54 करोड़ रुपये उम्मीदवारों पर खर्च किए गए। सामान्य प्रचार में करीब 37 करोड़ रुपये विज्ञापन और लगभग 27.3 करोड़ रुपये स्टार प्रचारकों की यात्रा पर खर्च हुए।
  • तमिलनाडु में भाजपा का खर्च 51.56 करोड़ रुपये रहा। इसमें 44.51 करोड़ रुपये सामान्य प्रचार और 7.05 करोड़ रुपये उम्मीदवारों पर खर्च हुए। मीडिया विज्ञापनों पर करीब 23.96 करोड़ रुपये, स्टार प्रचारकों की यात्रा पर 10.04 करोड़ रुपये और प्रचार सामग्री पर करीब 5.85 करोड़ रुपये खर्च किए गए। पुदुचेरी में पार्टी ने 11.90 करोड़ रुपये खर्च किए, जिसमें 9.19 करोड़ रुपये सामान्य प्रचार और 2.71 करोड़ रुपये उम्मीदवारों पर गए।

कांग्रेस ने पांच राज्यों में चुनाव प्रचार पर कितना पैसा लगाया?

कांग्रेस ने पांचों राज्यों में कुल 248.55 करोड़ रुपये खर्च किए। इसमें 143 करोड़ रुपये सामान्य पार्टी प्रचार और 105.55 करोड़ रुपये उम्मीदवारों पर खर्च किए गए। कांग्रेस के केंद्रीय मुख्यालय ने पांचों राज्यों में सामान्य प्रचार पर 40.52 करोड़ रुपये खर्च किए। उसकी राज्य और स्थानीय इकाइयों ने इसी मद में 102.49 करोड़ रुपये खर्च किए। सामान्य प्रचार में सबसे ज्यादा खर्च केरल में हुआ, जहां कांग्रेस ने 59.28 करोड़ रुपये लगाए। इसके बाद असम में 22.62 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इस तरह चुनावी खर्च के उपलब्ध आंकड़ों में भाजपा और कांग्रेस के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है, लेकिन प्राप्तियों की सीधी तुलना करते समय भाजपा के केवल केंद्रीय मुख्यालय के आंकड़े और कांग्रेस के केंद्रीय व राज्य स्तर के संयुक्त आंकड़े होने का अंतर समझना जरूरी है।
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