पूर्व प्रधानमंत्री और जेडीएस प्रमुख एचडी देवगौड़ा 86 साल के हो चुके हैं। उम्र के इस पड़ाव पर तुमकुरु सीट से ऐन वक्त पर उतरने का फैसला करने वाले देवगौड़ा की राह आसान नहीं दिख रही। उनका मुकाबला भाजपा के पूर्व सांसद जीएस बसवाराजू से है। वैसे भी यहां मुद्दों के बजाय समुदायों, खासतौर से लिंगायत और वोक्कालिगा का रुख मायने रखता है।
देवगौड़ा वोक्कालिगा समुदाय से हैं, तो कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा लिंगायत से। कर्नाटक में लिंगायत की आबादी 17 फीसदी, तो वोक्कालिगा की 12 फीसदी है। तुमकुरु जिले में दोनों समुदायों में बड़े स्तर पर ध्रुवीकरण है। यहां 18 अप्रैल को मतदान होने हैं।
कर्नाटक में जेडीएस को कांग्रेस का साथ तो मिला है, लेकिन यही साथ देवगौड़ा की परेशानी का सबब भी बन सकता है। देवगौड़ा के लिए कांग्रेस ने यहां के मौजूदा सांसद मुद्दाहनुमे गौड़ा का टिकट काट दिया, जिससे वे नाराज हो गए। वे अकेले ऐसे सांसद हैं, जिनका टिकट कांग्रेस ने काटा है।
हालांकि 60 साल राजनीतिक अनुभव रखने वाले देवगौड़ा ने उनसे बातचीत कर नाराजगी को कम करने का प्रयास किया, लेकिन शुरुआती प्रचार में मुद्दाहनुमे समर्थक जेडीएस के साथ खड़े नजर नहीं आए। मुद्दाहनुमे ने भी कुछ दिन पहले ही देवगौड़ा के साथ मंच साझा किया। माना जा रहा है कि कांग्रेस आलाकमान के निर्देश के बाद वह सक्रिय हुए। वोक्कालिगा समुदाय के इन दो बड़े नेताओं में यह सहयोग कब तक रहेगा, इसे लेकर पार्टी काडर में असमंजस है।
भाजपा का संकट भी गुटबाजी
भाजपा प्रत्याशी बसवाराजू के लिए भी चुनौतियां देवगौड़ा जैसी ही हैं। वह गुटबाजी से जूझ रहे हैं। हालांकि येदियुरप्पा ने अलग-अलग गुटों को बसवाराजू के प्रचार में जुटने के निर्देश दिए हैं, लेकिन कांग्रेस-जेडीएस जैसा प्रचार नहीं दिख रहा। भाजपा का ज्यादा जोर सोशल मीडिया पर है। भाजपा हेमवती नदी के पानी में तुमकुरु को उसके हिस्से से वंचित करने में देवगौड़ा की भूमिका बताने में जुटी है और देवगौड़ा पर कई अन्य आरोप भी लगा रही है।
इस क्षेत्र में 8 विधानसभा सीटें हैं
इस क्षेत्र में 8 विधानसभा क्षेत्रों में 4 पर भाजपा, 3 पर जेडीएस और एक पर कांग्रेस काबिज है। तुमकुरु, तुरुवेकेरे, चिक्कानायाकानाहल्ली, तिपतूर विधानसभा सीट पर भाजपा, तुमकुरु ग्रामीण, गुब्बी, मधुगिरी में जेडीएस और कोराटागेरे में कांग्रेस काबिज है।
जेडीएस यहां कभी नहीं जीती
1999 में अस्तित्व में आई जेडीएस तुमकुरु सीट कभी नहीं जीती। 1996 में जनता दल जीता, तो 1998 व 2014 में कांग्रेस और 1999, 2004 व 2009 में भाजपा।
हेमवती नदी का जल बंटवारा
तुमकुरु और हासन जिले के बीच वर्ष 1980 से हेमवती नदी के बंटवारे का विवाद चल रहा है। चुनाव में हर बार यह मुद्दा उठता है। देवगौड़ा इस मामले में हासन जिले के हितों का समर्थन कर चुके हैं, इसलिए भाजपा इसी मुद्दे को लेकर उन पर हमला कर रही है। चुनावी रैलियों में भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश गौड़ा आरोप लगा चुके हैं कि हेमवती नदी का पानी तुमकुरु को देने के बजाय समुद्र में गिराया जा रहा है। वहीं, देवगौड़ा इन आरोपों से इनकार करते हैं और दावा करते हैं कि उनके पीडब्ल्यूडी मंत्री रहते करवाए गए कार्यों की वजह से ही तुमकुरु तक पानी पहुंच सका।
हाइवे के लिए भूमि अधिग्रहण
तुमकुरु में हाल में ही एनएच 206 को चार लेन में बदलने के लिए हुए भूमि अधिग्रहण से सैकड़ों किसान और ग्रामीण खुश नहीं हैं। वे अपनी जमीन का कम दाम मिलने का आरोप लगा रहे हैं। वे कहते हैं कि डेढ़ लाख गुंटा (करीब 1089 वर्ग फीट) कीमत की जमीन के उन्हें पांच-पांच हजार रुपये ही दिए गए। इसके खिलाफ 150 किसान भूख हड़ताल भी कर चुके हैं, लेकिन हाइवे अथॉरिटी के अधिकारी उनसे नहीं मिले। इससे केंद्र सरकार और भाजपा के प्रति किसानों व ग्रामीणों का गुस्सा भड़का हुआ है।
और सबसे बड़ा मुद्दा जाति
लिंगायत और वोक्कालिगा के आपसी विवाद के बीच वोक्कालिगा में अंदरुनी गुटबाजी भी बढ़ चुकी है। समुदाय के कुछ नेता भाजपा से जुड़कर आरोप लगा रहे हैं कि देवगौड़ा परिवार और जेडीएस ने उन्हें बांटकर फायदा उठाया। वोक्कालिगा की उपजाति कुंचितिगा प्रभावी संख्या रखती है, लेकिन समुदाय के नेता उनसे पक्षपात करते हैं। वे जेडीएस से ज्यादा कांग्रेस पर भरोसा करते आए हैं। ऐसे में देवगौड़ा को उन्हें अपने साथ बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रहेगा।