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बिहार की तर्ज पर यूपी में BJP ने पिछड़ी जातियों पर लगाया दांव

Mon, 30 Jan 2017 03:09 AM IST
हिमांशु मिश्र/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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भाजपा - फोटो : amar ujala
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भले ही बिहार के इतर उत्तर प्रदेश में भाजपा की चुनावी रणनीति अलग है, मगर चेहरा, टिकट वितरण के मामले में पार्टी ने बिहार की तर्ज पर ही अपनी रणनीति बनाई है। मसलन पार्टी ने अब तक घोषित 370 सीटों पर गैरयादव पिछड़ी जातियों पर ज्यादा भरोसा जताया है। 
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बिहार में विभिन्न जातियों को लुभाने के लिए पार्टी ने सहयोगी दलों पर भरोसा जताया था। इसके उलट इस सूबे में पार्टी ने विभिन्न जातियों के बड़े नेताओं को पार्टी में शामिल कराने में ज्यादा भरोसा किया है। इस चुनाव में करीब 40 फीसदी टिकट पिछड़ी जातियों की झोली में डाले हैं। इस कारण बीते विधानसभा चुनाव के मुकाबले पार्टी में ब्राह्मण और ठाकुर बिरादरी के उम्मीदवारों की संख्या में कमी आई है।

इसके अलाव बिहार की तर्ज पर ही उत्तर प्रदेश में भी पार्टी का चेहरा नरेंद्र मोदी हैं। जबकि एक मुद्दे को पूरे राज्य पर तरजीत देने के बदले पार्टी ने सूबे को चार क्षेत्रों में बांट कर इनसे जुड़े अलग-अलग मुद्दों को तरजीह दी है। मसलन पश्चिम उत्तर प्रदेश में हिंदुत्व से जुड़ा पलायन का मुद्दा पार्टी का मुख्य एजेंडा है तो बुंदेलखंड क्षेत्र में मुख्य एजेंडा विकास है।
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38 फीसदी उम्मीदवार गैरयादव पिछड़ी जातियों से

पार्टी द्वारा अब तक 370 सीटों पर घोषित किए गए उम्मीदवारों में से करीब 38 फीसदी उम्मीदवार गैरयादव पिछड़ी जातियों से हैं। पार्टी ने इस क्रम में पहली वरीयता कोइरी, कुशवाहा, लोध, निषाद और जाट बिरादरी को दी है। इसके अलावा पार्टी की कृपा राजभर, नोनिया, बघेल जातियों पर भी बरसी है। 

पार्टी के रणनीतिकारों में शामिल एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक निषाद बिरादरी से जुड़े बिंद, कश्यप के अलावा राजभर, नोनिया, बघेल बिरादरी के नेताओं को पहली बार उभारा गया है। इस बिरादरी से जुड़े मतदाता करीब 7 दर्जन विधानसभा सीटों में उल्लेखनीय संख्या में है।

चूंकि बिहार में सहयोगी दल के नेता मसलन जीतन राम मांझी, उपेंद्र कुशवाहा, रामविलास पासवान बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाए। ऐसे में पार्टी ने राजनीति में अब तक उपेक्षित या प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज नहीं करा सकने वाले इन बिरादरी के नेताओं को सीधे अपने पाले में लाने पर जोर दिया। यही कारण है कि अब तक घोषित उम्मीदवारों में यादव बिरादरी के महज 7 लोगों को ही टिकट दिया गया है।

पार्टी के खुल कर पिछड़ा कार्ड खेलने और इस मामले में बीते विधानसभा चुनाव के मुकाबले ब्राह्मण-ठाकुर उम्मीदवारों की संख्या कम हुई है। बीते चुनाव में पार्टी ने 73 ब्राह्मणों को उम्मीदवार बनाया था। जबकि इस बार यह संख्या 50 से कुछ ही ज्यादा है।
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