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अरुणाचल में अब भाजपा सरकार, सीएम खांडू समेत 33 MLA ने बदली पार्टी

Sat, 31 Dec 2016 10:22 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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तेजी से घटे एक घटनाक्रम में मुख्यमंत्री पेमा खांडू के नेतृत्व में पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (पीपीए) के 43 में से 33 विधायकों के भाजपा में शामिल होने के बाद पार्टी ने शनिवार को अरुणाचल प्रदेश में अपनी सरकार का गठन किया।
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खांडू ने विधानसभा अध्यक्ष तेंजिंग नोरबू थोंगदोक के सामने विधायकों की परेड कराई। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने विधायकों के भाजपा में शामिल होने को मंजूरी दे दी।

पूरा नाटकीय घटनाक्रम बृहस्पतिवार को शुरू हुआ जब पीपीए के अध्यक्ष काहफा बेंगिया ने कथित पार्टी विरोधी गतिविधि के लिए खांडू, उप मुख्यमंत्री चौवना मेन और पांच विधायकों को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया।
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राज्य में नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (एनईडीए) सरकार की गठबंधन सहयोगी पीपीए ने शुक्रवार को तकाम पेरियो को राज्य का नया मुख्यमंत्री चुना था। हालांकि राजनीतिक समीकरण तब बदल गए जब शुरुआत में पेरियो को समर्थन देने वाले पीपीए के अधिकतर विधायक बाद में खांडू के खेमे में चले गए।

पीपीए ने शनिवार को चार और पार्टी विधायकों होनचुन नगानदम, बमांग फेलिक्स, पुंजी मारा और पानी तराम को भी निलंबित कर दिया।
 
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अरुणाचल प्रदेश में आखिरकार कमल खिल गया

खांडू ने विधानसभा परिसर में संवाददाताओं से कहा कि अरुणाचल प्रदेश में आखिरकार कमल खिल गया। राज्य में लोग नई सरकार के नेतृत्व में नए साल में विकास की नई सुबह देखेंगे। भाजपा में विलय के फैसले पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि परिस्थितियों ने विधायकों को लोगों एवं राज्य के हित में यह फैसला लेने के लिए मजबूर कर दिया।

खांडू ने पीपीए अध्यक्ष के विधायकों को निलंबित करने के फैसले को ‘अलोकतांत्रिक’ करार देते हुए कहा कि इस तरह का कदम उठाने से पहले पार्टी नेतृत्व को विधायकों को कारण बताओ नोटिस देना चाहिए था। 

कांग्रेस विधायकों के पीपीए में शामिल होने को लेकर अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस समिति (एपीसीसी) के अध्यक्ष पी रिचो द्वारा अदालत में दायर मामले के बारे में पूछे जाने पर खांडू ने कहा कि पार्टी में शामिल होना संविधान के दायरे में था। मामला गुवाहाटी हाईकोर्ट में लंबित है और उस पर आने वाले 7 जनवरी को सुनवाई होगी। 
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