नोटबंदी के मुद्दे पर विपक्ष के निशाने पर आई सरकार को गुलाम नबी आजाद के एक बयान ने ऐसी राहत दी है कि दो दिन तक बैकफुट पर रहने वाली सरकार तीसरे दिन एकाएक फ्रंटफुट पर आ गई है। सरकार इस हाथ आए मुद्दे को किसी भी हाल में छोड़ने के लिए तैयार नहीं है।
यही कारण रहा कि तीसरे दिन लोकसभा और राज्यसभा दोनों जगह सरकार और विपक्ष में जमकर खींचतान मिली नतीजतन शनिवार तक के लिए दोनों सदनों को स्थगित करना पड़ा। मामला साफ है कि एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर होने वाली चर्चा एक बार फिर आपसी खींचतान की भेंट चढ़ने वाली है।
सदन में जहां भाजपा इस मुद्दे को लेकर विपक्ष पर हमलावर थी तो बाहर भाजपा और उससे जुड़े यूथ विंग के कार्यकर्ता इस मुद्दे पर कांग्रेस और आजाद के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन कररहे थे।
बता दें कि गुरुवार को राज्यसभा में चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने नोटबंदी में कई घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों की तुलना उडी में शहीद हुए जवानों से कर दी थी। आजाद ने कहा था कि उड़ी हमले में भी इतने लोग शहीद नहीं हुए जितने सरकार के नोटबंदी के फैसले के बाद लोग जान गंवा चुके हैं।
नकवी ने की आजाद से बयान पर माफी मांगने की मांग
आजाद का यह बयान सामने आना था कि अभी तक बैकफुट पर चल रही भाजपा और सरकार एकाएक हमलावर हो गए। इससे भाजपा को कांग्रेस की उस मांग की काट भी मिल गई जिसमें वह सदन में प्रधानमंत्री से बयान देने की मांग कर रही थी।
भाजपा ने साफ कर दिया कि प्रधानमंत्री अभी इस मुद्दे पर अपना बयान नहीं देंगे। इस बात की भी संभावना है कि अभी अगले पूरे हफ्ते वह सदन की कार्यवाही से दूर रहेंगे। शुक्रवार को राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई तो भाजपा ने शुरू से ही इस मुद्दे पर हमलावर रुख अख्तियार कर लिया।
भाजपा के तेवरों को देख साफ था कि वह आजाद के बयान को और तूल देकर सीधे कांग्रेस पर दबाव बनाने की रणनीति बना चुकी है। भाजपा के इस रुख के पीछे सुबह प्रधानमंत्री मोदी की उस क्लास का भी असर माना जा रहा था जिसमें उन्होंने अपने सांसदों से नोटबंदी के मुद्दे पर किसी भी हाल में पीछे न हटने की बात कही थी।
हाथ आए मुद्दे को छोड़ने के मूड में नहीं भाजपा
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यही कारण था कि भाजपा ने सुबह ही अपने सांसदों को तीन लाइन का व्हिप जारी कर आज संसद में मौजूद रहने के निर्देश जारी कर दिए थे। इसका असर भी देखने को मिला सुबह जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई भाजपा नेताओं ने गुलाम नबी आजाद से अपने बयान के लिए माफी मांगने की मांग कर दी।
संसदीय कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा आजाद को अपने बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए। भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने कहा कि आजाद के भाषण से शहीदों का अपमान हुआ है इसलिए उन्हें पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए।
भाजपा के जोधपुर से सांसद गजेन्द्र सिंह शेखावत ने भी आजाद से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की। दोनों पक्षों के अपने अपने मुद्दों पर अड़ने के कारण राज्यसभा और लोकसभा की कार्यवाही दिनभर में कई बार स्थगित करनी पड़ी जिससे बाद में सोमवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
सरकार के तेवरों से साफ है कि वह अभी इस मुद्दे को इतनी आसानी से छोड़ने के मूड़ में नहीं है। आखिर मामला विपक्ष के नेता से जुड़ा हुआ जो है।