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BJP national executive: मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के लिए भाजपा की ये है रणनीति, 2024 के चुनावों पर नजर

सार

BJP national executive: बैठक में मौजूद सूत्रों के मुताबिक, भाजपा ने चुनावी राज्यों की लीडरशिप से जीत के ड्राफ्ट मंगाए थे। सभी राज्यों के ड्राफ्ट पर एक-एक बार चर्चा और मंथन किया गया। एमपी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, कर्नाटक के सीएम बसवराज बोम्मई और त्रिपुरा के सीएम माणिक साहा के साथ भाजपा हाईकमान ने अलग से बैठक की...
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BJP National Executive Meeting 2023 - फोटो : Agency
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भारतीय जनता पार्टी ने 2023 में होने वाले नौ राज्यों के विधानसभा चुनाव और 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यसमिति (BJP National Executive Meeting) की बैठक में चुनावी राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों ने अपनी रिपोर्ट हाईकमान के सामने पेश की। बैठक में मौजूद सूत्रों के मुताबिक, भाजपा हाईकमान ने चुनावी राज्यों की लीडरशिप से जीत के ड्राफ्ट मंगाए थे। सभी राज्यों के ड्राफ्ट पर एक-एक बार चर्चा और मंथन किया गया। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, कर्नाटक के सीएम बसवराज बोम्मई और त्रिपुरा के सीएम माणिक साहा के साथ भाजपा हाईकमान ने अलग से बैठक की। राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक के दौरान नेताओं में एमपी चर्चा का केंद्र रहा। सभी नेताओं के बीच चर्चा आम थी कि क्या गुजरात की तर्ज पर यहां भी चुनाव से एक साल पहले व्यापक फेरबदल होगा, मामूली होगा या मौजूदा टीम में समीकरण बैठाकर पार्टी चुनाव मैदान में उतरेगी।

मध्यप्रदेश: सत्ता विरोधी लहर बड़ी चिंता, आदिवासी सीटों पर जोर 

राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भी चर्चा हुई। बैठक में यह सामने में आया कि प्रदेश में सत्ता विरोधी लहर बहुत प्रभावी मानी जा रही है। अन्य राज्यों के विपरीत कांग्रेस पार्टी यहां भाजपा को टक्कर देने की स्थिति में है। पिछली बार की तुलना से कांग्रेस का संगठन भी मजबूत है। विधानसभा चुनाव 2023 की तैयारियों की एक रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व ने हाईकमान के सामने रखी। प्रदेश नेताओं ने आगामी चुनावों को लेकर की गई बैठकें, प्लानिंग, कार्यक्रम, आयोजन, प्रवास, रणनीति की जानकारी के अलावा सत्ता और संग़ठन के बीच तालमेल की स्थिति पर रिपोर्ट सौंपी। जबकि सीएम चौहान ने बैठक में बताया कि प्रदेश में गरीबों और एससी-एसटी से जुड़ी योजनाओं का अच्छा रिस्पांस देखने को मिल रहा है। ये योजना चुनाव में कैसे गेम चेंजर साबित होगी इसे लेकर भी एक रिपोर्ट प्रस्तुत की।

राज्य की अनुसूचित जाति और जनजाति की सीटों पर जीत हासिल करने के लिए प्रदेश नेतृत्व ने अलग से एक ड्राफ्ट रखा। लेकिन हाईकमान ने इसे और पुख्ता करने की सलाह दी। प्रदेश के नेताओं ने हारी हुई सीटों पर 10 फीसदी वोट बढ़ाने के साथ हर बूथ पर दो युवा को जोड़ने के लक्ष्य रखने की जानकारी भी दी। मप्र भाजपा की ओर से पिछले छह माह में चुनावी तैयारियों के सिलसिले में शुरू किए कार्यक्रमों को लेकर प्रेजेंटेशन भी दिया। सूत्रों ने बताया कि बैठक में प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन और संगठन प्रमुख के बदले जाने को लेकर फिलहाल कोई चर्चा नहीं हुई। बैठक में 2023 की तैयारी की जरूर चर्चा हुई। राष्ट्रीय कार्यसमिति में बैठक में मप्र से सीएम, प्रदेश अध्यक्ष के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, वीरेंद्र खटीक, ज्योतिरादित्य सिंधिया, फग्गन सिंह कुलस्ते, भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा आदि शामिल हुए।

राजस्थान: आंदोलन तेज करने और एकजुट रहने की नसीहत

राजस्थान से पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे, प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह, प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष सतीश पूनिया, ओम माथुर सहित कई अन्य नेता इस बैठक में शामिल हुए। प्रदेश अध्यक्ष पूनिया और संगठन महामंत्री चंद्रशेखर ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ निकाली गई जनाक्रोश रथ यात्रा और जनाक्रोश सभाओं से मिले रिस्पांस की रिपोर्ट दी। हाईकमान ने प्रदेश के नेताओं से कहा कि गहलोत और पायलट गुट की खींचतान पर नजर बनाए रखें। सरकार को लेकर जो नाराजगी है पार्टी के कार्यकर्ता उसे लोगों के बीच लेकर जाए। हाईकमान ने भाजपा नेताओं को फटकार लगाते हुए नसीहत दी कि कांग्रेस सरकार के खिलाफ होने वाले आंदोलनों में सभी नेता मिलजुल कर रहे। सूत्रों की मानें तो पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में प्रदेश में होने वाले कार्यक्रमों और अन्य गतिविधियों को लेकर आगामी छह माह की रूपरेखा भी तैयार हुई। इसके तहत पार्टी राजस्थान में अपना चुनावी शंखनाद करेगी।

छत्तीसगढ़: भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मुखर होगी भाजपा

बैठक में छत्तीसगढ़ भाजपा के नेताओं ने आगामी महीनों में होने वाले प्रमुख आंदोलनों की जानकारी साझा की है। प्रदेश के नेताओं ने इन आंदोलन में राष्ट्रीय स्तर के नेताओं को भी आमंत्रित किया है। आने वाले दिनों में भाजपा स्थानीय मुद्दों से लेकर जिला और राज्य स्तरीय मुद्दों पर आंदोलन तेजी करेगी। इसमें प्रधानमंत्री आवास योजना से लेकर जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, आयुष्मान भारत योजना जैसे केंद्रीय योजनाओं को लेकर भाजपा ने आंदोलन करने का निर्णय लिया है। बैठक में छत्तीसगढ़ से राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डा. रमन सिंह, प्रदेशाध्यक्ष अरुण साव, संगठन महामंत्री पवन साय, नेता प्रतिपक्ष नारायण सिंह चंदेल समेत अन्य नेता शामिल हुए। प्रदेश के नेताओं ने भाजपा हाईकमान को छत्तीसगढ़ में पार्टी की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं का प्रतिवेदन भी सौंपा है। हाईकमान ने बूथ स्तर पर संगठन को आक्रामक और मजबूत बनाने के लिए अभियान के चलाने का निर्देश भी दिया।

चुनावी राज्यों को हाईकमान का निर्देश

  • दो दिन की राष्ट्रीय कार्यसमिति में नौ राज्यों के चुनावों पर विस्तार से चर्चा हुई। मध्यप्रदेश, त्रिपुरा और कर्नाटक भाजपा को निर्देश दिया गया कि वे केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का प्रचार प्रसार तेज करें। वोट प्रतिशत बढ़ाने के लिए बूथों को मजबूत करने पर जोर दे।
  • गैर भाजपा शासित राज्य राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में भाजपा आक्रामक होकर मैदान में उतरे। सत्ताधारी पार्टी को घेरने के लिए नए सिरे से रणनीति तैयार करे। हर माह कोई बड़ा आंदोलन करें जिसमें केंद्रीय मंत्री में शामिल होंगे।
  • हाईकमान ने चुनावी राज्यों के संगठनों को निर्देश दिया कि वे हर माह का प्लान तैयार करें। समय-समय पर राज्य और केंद्रीय नेतृत्व के साथ इसकी समीक्षा करे। नए वोटर को कैसे पार्टी से जोड़ा जाए। इसकी रणनीति तैयार करे।
  • आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद सहित अन्य संगठनों से समय समय फीडबैक लेते रहे। चुनाव की तैयारियों के दौरान संगठनों की कहां मदद ली जा सकते हैं इसके लिए प्रदेश संगठन प्लान तैयार करे।
  • जाति, धर्म के आधार पर राज्यों की विधानसभा सीटों पर कौन सा स्टार कैंपेनर प्रचार के लिए होना चाहिए। इसके सुझाव केंद्र और प्रदेश संगठन को दें।
  • चुनावी राज्यों को हिदायत दी गई है कि गुजरात की तर्ज पर पांच कार्यकर्ताओं की एक पन्ना समिति बनाई जाए। पन्ना समिति े के सदस्यों को सबसे पहले अपने ही परिवार के सदस्यों को भाजपा को वोट देने के लिए राजी करने का काम सौंपा जाएगा। हर परिवार में भाजपा का सदस्य हो यह लक्ष्य रखा जाए।
  • प्रचार के दौरान पीएम मोदी के चेहरे के साथ-साथ राम मंदिर, धारा 370 जैसे मुद्दों को भुनाया जाए।
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