राज्यसभा के 250वें सत्र का आखिरी दिन हंगामे में बीता। सुबह शून्यकाल में सत्तापक्ष के हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी तो प्रश्नकाल में विपक्ष के अड़ जाने के चलते सदन दूसरी बार स्थगित करना पड़ा। सभापति एम. वेंकैया नायडू ने सत्र समाप्ति की घोषणा के दौरान कहा कि पूरे सत्र के व्यवस्थित चलने पर वह खुश हैं लेकिन आज की दिक्कत से बचा जा सकता था।
असम में हिंसा और पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में नागरिकता संशोधन बिल पर विरोध प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा ने नियम 256 के तहत चर्चा की मांग की थी। सभापति ने चर्चा से इनकार कर सदस्यों को अपनी बात रखने का आश्वासन दिया। शर्मा ने पूर्वोत्तर पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग रखी। उन्होंने बांग्लादेश, भूटान से घुसपैठ होने पर चिंता जताई। शून्यकाल के दौरान कुछ सदस्यों ने अपनी बात रखी।
तभी सांसद सोनल मानसिंह ने राहुल गांधी के रेप इन इंडिया वाले बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा, उन्होंने महिलाओं का अपमान किया, इसके लिए वह माफी मांगे। उनका साथ भाजपा की अन्य सांसदों ने भी दिया। दोनों ओर से शोरगुल शुरू हो गया। सभापति ने सदस्यों को समझाने के साथ इस विषय पर चर्चा की अनुमति नहीं दी। तभी भाजपा सांसद नारेबाजी करती अपनी सीट से उठकर गैलरी में आ गईं। जिस पर सभापति ने सदन दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दिया।
तृणमूल सांसद ने फाड़े सदन की कार्यवाही के कागज
प्रश्नकाल शुरू होते ही कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस असम में आगजनी और नागरिकता संशोधन बिल के विरोध में देशभर में चल रहे आंदोलन पर सरकार का जवाब मांगने लगे। विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि कांग्रेस हिंसा में विश्वास नहीं रखती सरकार सदन को जवाब दे। तृणमूल सांसद डोला सेन ने कहा कि असम में बड़ी संख्या में हिंसा हो रही है। सरकार ने मीडिया पर पाबंदी लगा दी है। इस बीच सभापति ने प्रश्नकाल की शुरूआत कर दी और कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने शोरशराबे के बीच जवाब देना भी शुरू कर दिया।
असम मुद्दे पर सुनवाई न होने से तृणमूल नेता डेरेक ओब्रायन सांसदों के साथ वेल में नारेबाजी करने लगे। आनंद शर्मा ने सभापति की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह पाठशाला नहीं जो उनकी बात नहीं सुनी जा रही। कांग्रेस सांसदों ने भी तृणमूल का साथ दिया। सेन ने अध्यक्ष के आसन के पास खड़े होकर सदन की कार्यवाही के कागजात फाड़कर विरोध जताया। वहीं, डेरेक सभापति के आसन पर चढ़ने लगे तो मार्शल ने उन्हें रोका।
छात्र-छात्राएं देख रहे हैं यहां क्या हो रहा है : सभापति
डीएमके नेता त्रिरूची शिवा ने हंगामे के बीच प्रश्नकाल चलाने पर व्यवस्था का प्रश्न उठाया। सभापति ने सबको सीट पर भेज कहा, मैं शिवा की अपील पर कुछ बोलना चाहता हूं कि आखिरी महत्वपूर्ण दिन ऐसा व्यवहार उचित नहीं है। दर्शक दीर्घा में बैठे छात्र-छात्राएं देख रहे हैं कि सदन में क्या हो रहा है। सभापति ने कहा कि सदन के व्यवस्थित होने पर ही कार्यवाही चल सकती है।
अराजकता की स्थिति है कुछ सदस्य चाहते हैं कि प्रश्नकाल चले और कुछ हंगामा करेंगे तो सदन स्थगित ही करूंगा। आजाद ने फिर कहा कि पूर्वोत्तर में हालात बिगड़े हुए हैं और सरकार को सामने आना चाहिए बयान देना चाहिए। करीब आधा घंटे की गहमा-गहमी और शोरशराबे के बाद सदन एक बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।