तटीय क्षेत्रों के हालात, प्रबंधन, पर्यावरण के अध्ययन के साथ सुनामी और तूफानों का पूर्वानुमान और सटीक होगा। केंद्रीय जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण मंत्रालय तटीय संसाधनों, पर्यावरण समेत इस क्षेत्र के प्रबंधन, अध्ययन और अनुसंधान के लिए नेशनल सेंटर फॉर सस्टनेबल कोस्टल मैनेजमेंट (एनसीएससीएम) संस्थान की स्थापना की गई है।
एनसीएससीएम का एकीकृत तटीय क्षेत्र प्रबंधन योजना अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर विकसित की गई है। इस संस्थान से भारत के समुद्री तटों के समग्र और स्थायी प्रबंधन के लिए नीतियों के निर्माण में मदद सुनिश्चित होगी साथ ही इससे पारंपरिक तटों और द्वीपों में बसे लोगों के विकास और लाभ का रास्ता प्रशस्त होगा। यह जानकारी केंद्रीय जलवायु परिवर्तन वन और पर्यावरण राज्यमंत्री बाबुल सुप्रियो ने लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के जवाब में दी।
इस संस्थान के माध्यम से केंद्र, राज्य सरकारों और अन्य संबंधित हितधारकों को सलाह और एकीकृत तटीय क्षेत्र प्रबंधन के संबंध में वैज्ञानिक मामलों में फैसला लेने में सहायता मिलेगी। तटीय इलाके में छह रिर्सच यूनिट वाला अनुसंधान प्रभाग कई मायनों में खास होगा।
इसमें भूस्थानिक विज्ञान, रिमोट सेंसिंग और भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) केसाथ एकीकृत सामाजिक विज्ञान और अर्थशास्त्र के साथ तटीय पर्यावरण की स्थिति, प्रभाव, मूल्यांकन का सटीक अध्ययन किया जा सकेगा। साथ ही तटों और समुद्री संसाधनों के संरक्षण में भी मदद होगी। इसकी मदद से भविष्य में नीतियों में होने वाले परिवर्तन और देश के तटों का द्वीपों का प्रबंधन भी किया जा सकेगा।