पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल गरमा गया है। भाजपा के प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से मुलाकात कर मांग की कि चुनाव अधिकतम तीन चरणों में कराए जाएं। इतना ही नहीं पार्टी ने हिंसा-मुक्त और निष्पक्ष चुनाव के लिए सख्त सुरक्षा इंतजाम की भी मांग की।
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर जारी सियासी टकराव के बीच सोमवार को कोलकाता में चुनाव आयोग की फुल बेंच ने विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ अहम बैठक की। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में हुई इस बैठक में भाजपा, तृणमूल कांग्रेस, वाम दलों और कांग्रेस ने अपने-अपने मुद्दे और आपत्तियां आयोग के सामने रखीं। बैठक के बाद सभी दलों ने चुनाव प्रक्रिया, सुरक्षा व्यवस्था और मतदाता सूची को लेकर अलग-अलग मांगें और आरोप लगाए, जिससे राज्य की राजनीति और गरमा गई है।
शिशिर बाजोरिया ने लगाए गंभीर आरोप
भाजपा नेता शिशिर बाजोरिया ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्रीय बलों की रूट मार्च संवेदनशील इलाकों के बजाय शांत इलाकों में कराई जा रही है। उनके अनुसार, कई जगह रूट मार्च ऐसी सड़कों पर हो रहा है जहां लोग नहीं रहते, सिर्फ गाड़ियां गुजरती हैं। उन्होंने कहा कि यह चुनाव आयोग के नियमों के खिलाफ है। भाजपा ने चुनाव आयोग से यह भी अनुरोध किया कि चुनाव प्रक्रिया की अवधि कम की जाए।
पार्टी का कहना है कि सात या आठ चरणों में चुनाव कराने की जरूरत नहीं है। इतना ही नहीं भाजपा ने आयोग से संवेदनशील मतदान केंद्रों (सेंसिटिव बूथ) की पहचान के नियमों में बदलाव की मांग की। पार्टी का सुझाव है कि जिन बूथों पर 85 प्रतिशत से ज्यादा मतदान होता है या जहां पहले चुनावों में हिंसा हुई है, उन्हें अपने आप संवेदनशील माना जाए और वहां अतिरिक्त सुरक्षा दी जाए।
वाम दलों ने उठाए एसआईआर पर सवाल
वाममोर्चा के प्रतिनिधियों ने भी आयोग से मुलाकात कर एसआईआर की प्रक्रिया पर कड़ी आपत्ति जताई। वाम नेताओं की ओर से मोहम्मद सलीम ने कहा कि उनकी पार्टी एक चरण में चुनाव कराने के पक्ष में है, हालांकि अधिकतम दो चरणों में मतदान कराने पर भी उन्हें आपत्ति नहीं होगी। उन्होंने आरोप लगाया किमतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में लोगों को अनावश्यक रूप से परेशानकिया जा रहा है और चुनाव आयोग को अपनी निष्पक्षता बनाए रखनी चाहिए।
कांग्रेस ने सुरक्षा को बताया प्राथमिकता
कांग्रेस नेता प्रदीप भट्टाचार्य ने बैठक के बाद कहा कि चुनाव कितने चरणों में होंगे, यह उतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना कि मतदान की सुरक्षा।उन्होंने कहा कि आयोग को निष्पक्ष और सुरक्षित मतदान सुनिश्चित करना चाहिए।
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