दिल्ली भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता
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दिल्ली नगर निगम चुनाव में भाजपा की हार के कारण प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। सात दिसंबर को आए नगर निगम चुनाव परिणाम में भाजपा को 104 सीटें मिली थीं और वह नगर निगम में चौथी बार सरकार बनाने से वंचित रह गई थी। पार्टी की हार के बाद से ही आदेश गुप्ता के इस्तीफे की अटकलें लगाई जा रही थीं। अंततः पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से इशारे के बाद रविवार को उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनकी जगह पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा को कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया है।
आदेश गुप्ता प्रदेश अध्यक्ष पद पर नियुक्त होने के पहले एक पार्षद थे। दिल्ली विधानसभा चुनाव में हार के बाद मनोज तिवारी के इस्तीफा देने के बाद उन्हें 2 जून 2020 को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। पार्टी कार्यकर्ताओं और दिल्लीवासियों के लिए वे एक अनजान चेहरे थे, लिहाजा उनकी नियुक्ति के बाद से ही उनके अध्यक्ष बनने के फैसले को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे थे। लेकिन केंद्रीय नेताओं के आशीर्वाद से वे अब तक अपने पद पर बने रहे। निगम चुनाव में अपने विधानसभा क्षेत्र में भी पार्टी की साख न बचा पाने के कारण उनकी कुर्सी छः महीने पहले ही चली गई। पार्टी के सामान्य नियमों के मुताबिक वे नियुक्ति के बाद तीन साल तक अपने पद पर बने रह सकते थे।
चुनाव परिणाम आने के दिन ही दोपहर में पार्टी कार्यालय में पार्टी के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक से आदेश गुप्ता अनुपस्थित थे। बैठक में पार्टी नेता हरीश खुराना, आशीष सूद और कई अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित थे, जबकि उसी समय कार्यालय में मौजूद आदेश गुप्ता का बैठक में शामिल न होना भी पार्टी की आंतरिक खींचतान को बयान कर रहा था।
बीजेपी सूत्रों के अनुसार, शाम के समय चुनाव परिणाम की समीक्षा बैठक में उन्होंने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था। कथित तौर पर आदेश गुप्ता ने अपनी नियुक्ति को पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व का आशीर्वाद बताया था और कहा था कि उन पर इस्तीफा देने का दबाव न बनाया जाए। जब तक केंद्रीय नेता चाहेंगे, वे अध्यक्ष बने रहेंगे। लेकिन इसके बाद उन पर इस्तीफा देने का दबाव बढ़ गया और अंततः रविवार को उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
कौन हैं वीरेंद्र सचदेवा
वीरेंद्र सचदेवा भाजपा के विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं और पार्टी के बहुत पुराने कार्यकर्ता हैं। पंजाबी समुदाय से होने के कारण दिल्ली के पंजाबी समुदाय पर उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। यह नियुक्ति अस्थाई बताई जा रही है। माना जा रहा है कि पार्टी आने वाली चुनौतियों को देखते हुए नए अध्यक्ष का चुनाव शीघ्र कर सकती है।