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नागालैंड विधानसभा: चुनाव बहिष्कार के ऐलान से बैकफुट पर BJP, डैमेज कंट्रोल में जुटे राम माधव

Wed, 31 Jan 2018 11:22 AM IST
संजय मिश्र
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Ram MAdhav - फोटो : File Photo
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 नागालैंड में उपजे सियासी संकट पर भाजपा आलाकमान की पैनी नजर है। सूबे के सियासी संकट से निपटने के लिए पार्टी ने पूर्वोत्तर के प्रभारी एवं राष्ट्रीय महासचिव राम माधव को सियासी डैमेज कंट्रोल में जुटा दिया है। भाजपा रणनीतिकारों को उम्मीद है कि नागालैंड के विधानसभा चुनाव में सूबे के सभी सियासी दल शिरकत करेंगे।
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केंद्र सरकार का गृह मंत्रालय भी नागालैंड के राजनीतिक हालातों पर नजर जमाए हुए है। दरअसल सोमवार को नगा राजनीतिक समस्या को लेकर घटे एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत प्रदेश की सत्तारूढ़ नागा पीपल्स फ्रंट और कांग्रेस समेत करीब 10 दलों ने 27 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव में भाग नहीं लेने का ऐलान कर दिया।

तब से भाजपा आलाकमान और केंद्र सरकार हरकत में आ गई है। भाजपा के लिए मुश्किल यह है कि चुनाव बहिष्कार के ऐलान से आदिवासी संगठनों और नागरिक समाज समूहों के साथ राजनीतिक दलों की हुई बैठक में भाजपा के स्थानीय नेता भी शामिल थे। लेकिन भाजपा ने चुनाव बहिष्कार के ऐलान के तुरंत बाद इस फैसले से न सिर्फ दूरी बनाई बल्कि उन दो स्थानीय नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जो नागरिक समाज की बैठक में उपस्थित थे। राज्य भाजपा प्रभारी एवं केंद्रीय राज्य मंत्री कीरेन रिजिजू ने नागालैंड के सियासी दलों से आह्वान किया है कि वे चुनाव प्रक्रिया में भाग लें। 
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चुनाव बहिष्कार के ऐलान के पीछे क्या है वजह 

किरण रिजिजू - फोटो : ANI
नागालैंड के राजनैतिक दलों के जरिए विधानसभा चुनाव के बहिष्कार के ऐलान के पीछे मुख्य वजह नागा शांति समझौते के प्रारूप का ऐलान है। अलगाववादी नेता मुईवा ने आयोग के जरिए चुनाव की घोषण से पहले ही इस बात का फरमान जारी किया था कि केंद्र सरकार पहले नागा शांति समझौते के प्रारूप को लागू करे, उसके बाद चुनाव का ऐलान करे।

​ मगर आयोग ने सूबे को लोकतांत्रिक संकट से बचाने की कवायद में चुनाव को तय समय पर ही कराने का निर्णय लिया है।  केंद्र सरकार के सामने भी शांति समझौता जारी करने में व्यवहारिक कठिनाइयां हैं। जबकि नागालैंड चुनाव में भाग न लेने का मन बना रहे राजनीतिक दलों का कहना है कि केंद्र और नगा नागरिक समूहों के बीच वर्ष 2015 में पीएम मोदी की उपस्थिति में शांति समझौता के लिए फ्रेमवर्क एग्रीमेंट हुआ था। मगर दो वर्ष बीत जाने के बाद भी सरकार की ओर से इस दिशा में कुछ ठोस नहीं हुआ है। बावजूद उसके भाजपा को उम्मीद है कि सूबे के सभी दल राज्य विधानसभा चुनाव में भाग लेंगे। 

आदिवासी और नागरिक संगठनों की क्या है घोषणा 

नागरिक संगठन (सीसीएनटीएचसीओ) और नागा आदिवासी (होहो) संगठनों की ओर से सोमवार को हुई बैठक के बाद जारी एक संयुक्त घोषणापत्र में कहा गया कि वे 27 फरवरी को राज्य में होने वाले चुनाव में भाग नहीं लेंगे। केंद्र सरकार और केंद्रीय चुनाव आयोग को कड़ा संदेश देते हुए चुनाव टालने की मांग की गई है।

घोषणापत्र में कहा गया है कि नगा लोगों की सर्वसम्मत राय है कि राजनीतिक समाधान या नगा शांति समझौता, चुनाव से ज्यादा महत्वपूर्ण है। इस वजह से अमन चैन के लिए नागालैंड के विधानसभा चुनाव को टालना जरूरी है ।
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