नागालैंड में उपजे सियासी संकट पर भाजपा आलाकमान की पैनी नजर है। सूबे के सियासी संकट से निपटने के लिए पार्टी ने पूर्वोत्तर के प्रभारी एवं राष्ट्रीय महासचिव राम माधव को सियासी डैमेज कंट्रोल में जुटा दिया है। भाजपा रणनीतिकारों को उम्मीद है कि नागालैंड के विधानसभा चुनाव में सूबे के सभी सियासी दल शिरकत करेंगे।
केंद्र सरकार का गृह मंत्रालय भी नागालैंड के राजनीतिक हालातों पर नजर जमाए हुए है। दरअसल सोमवार को नगा राजनीतिक समस्या को लेकर घटे एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत प्रदेश की सत्तारूढ़ नागा पीपल्स फ्रंट और कांग्रेस समेत करीब 10 दलों ने 27 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव में भाग नहीं लेने का ऐलान कर दिया।
तब से भाजपा आलाकमान और केंद्र सरकार हरकत में आ गई है। भाजपा के लिए मुश्किल यह है कि चुनाव बहिष्कार के ऐलान से आदिवासी संगठनों और नागरिक समाज समूहों के साथ राजनीतिक दलों की हुई बैठक में भाजपा के स्थानीय नेता भी शामिल थे। लेकिन भाजपा ने चुनाव बहिष्कार के ऐलान के तुरंत बाद इस फैसले से न सिर्फ दूरी बनाई बल्कि उन दो स्थानीय नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जो नागरिक समाज की बैठक में उपस्थित थे। राज्य भाजपा प्रभारी एवं केंद्रीय राज्य मंत्री कीरेन रिजिजू ने नागालैंड के सियासी दलों से आह्वान किया है कि वे चुनाव प्रक्रिया में भाग लें।