16 अप्रैल 2018 को राजस्थान प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अशोक परनामी ने पद से इस्तीफा दे दिया था। परनामी का यह इस्तीफा भाजपा हाई कमान के दबाव में हुआ था। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को परनामी के अध्यक्ष बने रहने में कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन वह हाई कमान को मंजूर नहीं थे। इसके बाद से पार्टी के नये अध्यक्ष के लिए कसरत शुरू हो गई थी। 26 अप्रैल 2018 को इस संदर्भ में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से भी मिली थी, लेकिन मनमाफिक नाम पर सहमति नहीं बन पाई थी।
उस समय कर्नाटक विधानसभा चुनाव भी चल रहे थे। इसलिए केन्द्रीय नेतृत्व और मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे को टकराव को टालना उचिकत समझा। इसी दौरान वसुंधरा ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और संगठन मंत्री रामलाल से फिर मुलाकात की। बताते हैं काफी मशक्कत के बाद मदन लाल सैनी के नाम पर आखिरकार मुहर लग सकी।
खत्म हुआ सस्पेंस
राजस्थान प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद के लिए कई नाम चर्चा में आए। भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व गजेन्द्र सिंह शेखावत को इस पद पर देखना चाहता था, लेकिन बताते हैं वसुंधरा राजे के वीटो लगाने के बाद इस पर सहमति नहीं बन पाई। इस कड़ी में केन्द्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, सुरेन्द्र सिंह पारीक, श्रीचंद कृपलानी का भी नाम उछला।
भूपेन्द्र को भी इस दौड़ में जोड़ा गया। लेकिन बताते हैं कि वसुंधरा राजे भी इस पर अपनी सहमति नहीं दे रही थी। इसके लिए राजस्थान के संघ के नेताओं ने भी काफी मशक्कत की। एक तरह से देखा जाए तो 2014 के बाद से पहला ऐसा पद रहा जिसे भर पाने में केन्द्रीय नेतृत्व को काफी मशक्कत करनी पड़ी। फिलहाल अब सस्पेंस खत्म हो गया है। माली समाज से आने वाले मदन लाल सैनी के नाम पर मुहर लगाकर भाजपा ने एकजुटता के राजस्थान विधानसभा चुनाव तैयारियों को धार दे दी है।