कोल्हू की भट्ठी से अतिरिक्त गर्म हवा और पर्टिकुलेट मैटर (खतरनाक कण) बाहर न निकलें इसके लिए उसे ठीक से ढ़कने की भी व्यवस्था कोल्हू मालिक को करनी होगी। एक कोल्हू अधिकतम पर्टिकुलेट मैटर 500 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से ज्यादा पर्टिकुलेट मैटर का उत्सर्जन नहीं कर सकता। वहीं राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की यह जिम्मेदारी होगी कि वह पर्टिकुलेट मैटर को नियंत्रित करने के लिए मानक तय करे। कोल्हू पूरी साफ-सफाई के साथ ही चलने चाहिए।
180 दिन भरपूर चलते हैं यूपी के 5000 कोल्हू
उत्तर प्रदेश में करीब 5000 कोल्हू हैं। गन्ना पेराई सीजन में पश्चिमी उत्तर प्रदेश व मध्य उत्तर प्रदेश इलाके में करीब 180 दिन कोल्हू के जरिए चीनी व अन्य उत्पादों का उत्पादन किया जाता है। वहीं इस दौरान कोल्हू के जरिए कार्बन डाई ऑक्साइड और कॉर्बन मोनो ऑक्साइड जैसी कई खतरनाक गैसों का उत्सर्जन होता है। जबकि इसकी किसी तरह की जांच का प्रावधान नहीं था। यह पूरा औद्योगिक क्षेत्र ही अनियंत्रित था।