भाजपा ने मार्च में होने वाले मणिपुर विधानसभा चुनावों में अकेले मैदान में उतरने का फैसला किया है। वह राज्य की सभी 60 सीटों पर उम्मीदवार खड़े करेगी। वैसे, बीते साल असम विधानसभा चुनावों में सत्तारूढ़ कांग्रेस को शिकस्त देने के लिए पार्टी ने क्षेत्रीय दलों के साथ गठजोड़ किया था। लेकिन इस बार अपनी रणनीति बदलते हुए अपने ही बूते पर मैदान में उतरने का फैसला किया है।
भाजपा के मणिपुर प्रभारी प्रह्लाद सिंह पटेल ने बताया कि पार्टी सभी 60 सीटों पर अकेले ही अपने बूते पर ही चुनाव लड़ेगी। उन्होंने इन चुनावों में बेहतर प्रदर्शन का भी भरोसा जताया। वैसे, भाजपा पड़ोसी नगालैंड में सत्तारूढ़ नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) की साझीदार है।
बीते साल भाजपा की पहल पर क्षेत्रीय दलों को लेकर गठित नार्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक एलायंस (नेडा) में एनपीएफ भी शामिल है। खासकर मणिपुर के पर्वतीय इलाके के वोटरों पर एनपीएफ की खासी पकड़ है। लेकिन भाजपा ने उसके साथ चुनावी गठजोड़ के प्रति कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है।
भाजपा के अलावा सत्तारूढ़ कांग्रेस भी अकेले ही चुनाव लड़ेगी। दूसरी ओर, वामपंथी दलों ने आम आदमी पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और जद (यू) को साथ लेकर लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट आफ मणिपुर नामक एक तीसरे मोर्चे का गठन किया है। राज्य के पर्वतीय इलाकों में 20 और घाटी में 40 सीटें हैं । घाटी की सीटों पर मैतेयी तबके के लोग ही निर्णायक हैं जबकि पर्वतीय इलाकों में नगा वोटरों की तादाद ज्यादा है।
राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी विवेक कुमार देवांगन के मुताबिक इस बार वोटरों की तादाद 18.94 लाख है। इस राज्य में भी महिला वोटरों की तादाद पुरुषों के मुकाबले ज्यादा है।