राष्ट्र को जाति, रंग, धर्म के संकीर्ण विचारों से ऊपर रखा, समावेशी राजनीति को बढ़ाया आगे
भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षक वाजपेयी ने सद्भावना और आपसी विश्वास के आधार पर समावेशी राजनीति को निरंतर बढ़ाने का प्रयास किया, ताकि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया हमेशा बरकरार रहे। उनका मानना था कि पार्टी, पावर और पद की राजनीति स्थायी नहीं। राष्ट्र और लोकतंत्र ही महत्वपूर्ण और शाश्वत हैं। उन्होंने सदैव राष्ट्र और लोकतंत्र को जाति, रंग, पंथ, धर्म और क्षेत्रीय के संकीर्ण विचारों से ऊपर रखा। उनका विचार था कि राजनीति का केंद्र बिंदु राष्ट्र का विकास होना चाहिए, जिसमें सभी वर्गों के लोगों को साथ लेकर चलना चाहिए।
संसद के बाहर होनी चाहिए सियासी लड़ाई
जब लालकृष्ण आडवाणी को बिहार में रथयात्रा के दौरान गिरफ्तार किया गया, तब मैं सांसद था। एक सप्ताह तक संसद की कार्यवाही बाधित रही, लेकिन फिर वाजपेयी ने संसदीय बैठक में हमें कहा कि राजनीतिक लड़ाई संसद के बाहर होनी चाहिए। राजनीतिक शासन के प्रति उनका दृष्टिकोण इतना समावेशी व स्पष्ट था कि विपक्षी दलों को भी सरकार का हिस्सा होने का अहसास होता था। वे कहते थे कि संसद बहस, संवाद और चर्चा के लिए एक प्लेटफार्म है, किसी भी तरह की लड़ाई या हाथापाई के लिए नहीं।
क्षेत्रीय विवादों को भी कम किया, कई देशों से संबंध सुधारे
1998 में पोखरण परीक्षण के बाद अमेरिका सहित अन्य देशों द्वारा व्यापारिक, सामरिक व प्रतिबंध लगाने वाले बयानों से वह तनिक भी परेशान नहीं हुए। इस सबके बावजूद विभिन्न देशों से व्यापार संबंधों में सुधार किया और चीन के साथ क्षेत्रीय विवादों को भी कम किया।
धरातल पर लोगों को लाभ पहुंचाना रहा लक्ष्य
वाजपेयी ने प्रधानमंत्री के रूप में सड़क, रेल और हवाई संपर्क में सुधार कर ढांचागत सुविधाओं को मजबूती प्रदान की। वाजपेयी का मानना था कि सरकार के असली मायने तभी हैं, जब वह धरातल पर लोगों को तुरन्त लाभ पहुंचाए, जिससे लोगों को प्रत्यक्ष रूप से फायदा मिले। बतौर प्रधानमंत्री उन्होंने यह करके भी दिखाया।
भारत को विश्व गुरु बनाना ही सच्ची श्रद्धांजलि
आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वच्छ, पारदर्शी व सुशासन के माध्यम से वाजपेयी के दृष्टिकोण को मूर्तरूप दे रहे हैं, ताकि कोई भी पीछे न रहे और ‘आत्मनिर्भर भारत’ का सपना साकार हो। वाजपेयी को सम्मानपूर्वक याद करना तभी सार्थक होगा, जब हम समाज के सभी वर्गों के बीच पारदर्शिता, समावेश और आत्मीयता को बढ़ावा देकर सुशासन सुनिश्चित करने के उनके दृष्टिकोण का पालन करें। आइए, हम कड़ी मेहनत करें और भारत को विश्व गुरु बनाएं, जो हमारे महान नेता को सच्ची श्रद्धांजलि होगी! (लेखक हरियाणा के राज्यपाल हैं।)