दक्षिण कोरिया के मुआन एयरपोर्ट पर विमान में लगी आग
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दक्षिण कोरिया के मुआन अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे की घटना के बाद यह सवाल फिर सुर्खियों में है कि आखिरकार एक छोटा सा पक्षी इतने बड़े विमान को कैसे धराशायी कर सकता है। विशेषज्ञों की राय के जरिये यह समझने की कोशिश करते हैं कि पक्षी के विमान से टकराने की घटनाएं कब और कहां होती हैं, इसका कितना असर पड़ता है और किन परिस्थितियों में ये सबसे ज्यादा घातक साबित हो सकती हैं।
पक्षी के इंजन में फंसने से प्लेन का थ्रस्ट घटने लगता है, जिससे पावर प्लांट को नुकसान पहुंचता है। वहीं, विंडशील्ड यानी ग्लास से जोरदार टक्कर भी कई बार घातक साबित हो सकती है। खासकर जब विंडशील्ड में दरार की वजह से केबिन के अंदर हवा का दबाव तेजी से घटने लगता है।
परिंदों से टक्कर सोच से भी ज्यादा घातक
- जब 1.8 किलो का पक्षी किसी प्लेन से टकराता है तो यह टक्कर बुलेट की तुलना में करीब 130 गुना ज्यादा तीव्र होती है।
- एबीसी साइंस की एक रिपोर्ट के आधार पर, इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि 275 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से पांच किलो के एक पक्षी का किसी प्लेन से टकराना और 100 किलो भारी बैग का 15 मीटर की ऊंचाई से जमीन पर गिरना एक जैसा ही है।
- विशेषज्ञों की माने, तो टक्कर कितनी घातक हो सकती है, यह पक्षी के वजन, आकार, उसकी गति और उड़ान भरने की दिशा पर भी निर्भर करती है।
पायलट की सूझबूझ की होती है परीक्षा
ऐसे मामलों में जब पक्षी की टक्कर खतरनाक रही हो तो बहुत कुछ पायलट की सूझबूझ पर निर्भर करता है। उनके विचलित होने से आपात लैंडिंग की कोशिशें नाकाम हो सकती हैं। ऐसा एक मामला 2009 में सामने आया था जब यूएस एयरवेज की उड़ान 1549 के न्यूयॉर्क से उत्तरी कैरोलिना रवाना होने के एक मिनट बाद ही पक्षियों का झुंड उससे टकरा गया। दोनों इंजन नष्ट होने के बाद पायलट समझ गया कि वह हवाईअड्डे तक नहीं जा सकता। इसलिए उसने हडसन नदी पर लैंडिंग का फैसला किया। विमान 140 मील की रफ्तार से -7 डिग्री पानी में जा गिरा। लेकिन सभी 155 यात्री और चालक दल के सदस्य बचा लिए गए।
सुरक्षा के लिए किए जाते हैं तमाम उपाय
आधुनिक जेटलाइनर में कई अतिरिक्त सुविधाएं होती हैं और बोइंग 737 या एयरबस ए 320 जैसे आम यात्री विमान एक इंजन के साथ भी सुरक्षित उतरने के लिए डिजाइन किए गए हैं। एयरपोर्ट के आसपास पक्षियों के हमले रोकने के लिए रडार सिस्टम, ड्रोन रोबोट, एयर कैनन जैसे तरीके अपनाए जाते हैं। वहीं, कुछ जगहों पर लेजर गन का भी इस्तेमाल किया जाता है।
90% घटनाएं होती हैं एयरपोर्ट के आसपास
बर्ड स्ट्राइक के 90 फीसदी हादसे एयरपोर्ट के आसपास ही होते हैं। हवाईअड्डे के आसपास के खुले मैदानों में पानी या कूड़ा जमा हो जाने पर कीट पैदा होते हैं। इससे यहां पक्षियों की मौजूदगी बढ़ जाती है।
(इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक)