पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में स्थानीय टीएमसी नेता भादु शेख की हत्या के मामले में तीन और लोगों को गिरफ्तार किया गया है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि एक आरोपी बीरभूम में पश्चिम बंगाल-झारखंड सीमा से, दूसरा रामपुरहाट से और तीसरा मालदा जिले से मंगलवार रात पकड़ा गया। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी फुटेज में वे भादू शेख की हत्या के दौरान बम फेंकने वालों के बीच देखे गए थे और घटना के बाद छिप गए थे। अधिकारी ने कहा कि तीनों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।
सीबीआई ने पांच जगहों की तलाशी ली
इससे पहले शेख की हत्या के मामले में एक और व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारियों की कुल संख्या चार हो गई। इस बीच, सीबीआई ने शेख की हत्या के बाद बोगतुई गांव में महिलाओं और बच्चों सहित नौ लोगों की हत्या के सिलसिले में रामपुरहाट पुलिस थाने के एक अधिकारी, गवाहों और गिरफ्तार लोगों से पूछताछ की। सीबीआई के अधिकारियों ने घटना की जांच के तहत पांच स्थानों पर तलाशी ली। जांचकर्ताओं ने घटना के बाद बचाव अभियान के दौरान मौके पर मौजूद दमकलकर्मियों और कुछ पुलिसकर्मियों की सूची तैयार कर उनसे बात की है। सीबीआई के एक अधिकारी ने कहा कि हमें और जानकारी के लिए उनसे दोबारा बात करने की जरूरत है। कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के बाद हत्याओं की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो ने अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं की है।
टीएमसी अब बैकफुट पर
गोवा और त्रिपुरा में चुनावों में अपनी छाप छोड़ने में टीएमसी की विफलता, बीरभूम हत्याओं के बाद मुश्किलें, पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ दल को अपनी राष्ट्रीय विस्तार रणनीति पर पुनर्विचार करने और कांग्रेस तक पहुंचने के लिए मजबूर होना पड़ा है। भाजपा विरोधी गठबंधन बनाने का प्रयास कर रही टीएमसी ने पहले कांग्रेस के खिलाफ हमला बोलने की रणनीति बनाई थी और इस पुरानी पार्टी को युद्ध में थका हुआ और अक्षम करार दिया था। पार्टी ने कांग्रेस को भाजपा के खिलाफ किसी भी संभावित गठन से बाहर रखने का प्रयास किया था। ऐसा लगता है कि पश्चिम बंगाल के बाहर हालिया चुनावों में सफाये के बाद ममता ने अपना रुख नरम कर लिया है।
तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने हाल ही में कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दलों को पत्र लिखकर सभी से एक साथ आने और भगवा ताकतों के खिलाफ एकजुट लड़ाई लड़ने का आह्वान किया था। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने कहा कि गोवा और त्रिपुरा में चुनावी हार ने इस बदलाव के एक प्रमुख कारण के रूप में देखा जा रहा है। इन पराजयों ने टीएमसी ने खुद को असली कांग्रेस के रूप में पेश करने की टीएमसी की रणनीति को पंगु बना दिया। ममता बनर्जी ने फरवरी में कहा था कि कांग्रेस के क्षेत्रीय सियासी संगठनों के साथ अच्छे संबंध नहीं हैं, जो भाजपा के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने के रास्ते में रोड़ा बन सकता है।