काठमांडू में बिमस्टेक का दो दिवसीय चौथा शिखर सम्मेलन खत्म हुआ। नेपाल की राजधानी काठमांडू में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की अध्यक्षता में 'बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टरल टेक्निकल एंड इकनॉमिक को-ऑपरेशन (BIMSTEC)' यानी बिम्सटेक का दो दिवसीय सम्मेलन में भारत भी शामिल हुआ। यह बिम्सटेक का चौथा सम्मेलन है और यह "शांत, संपन्न और स्थिर बंगाल की खाड़ी क्षेत्र' थीम पर आधारित है। इसमें करीब-करीब वही देश शामिल हैं, जो दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) में हैं।
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क्या है यह बिम्सटेक ?
बैंकॉक में बांग्लादेश, भारत, श्रीलंका और थाइलैंड इनकॉमिक कॉर्पोरेशन नाम से एक क्षेत्रीय समूह की स्थापना 21 साल पहले हुई थी। तब इन देशों के पहले नाम के अक्षरों के आधार पर इसका नाम बिस्टेक(BIST-EC) रखा गया था। मगर 22 दिसंबर 1997 को म्यांमार भी इसका पूर्णकालिक सदस्य बन गया। ऐसे में बिम्सटेक (BIMST-EC) इसका नाम कर दिया। बाद में साल 2004 में नेपाल और भूटान भी इसके सदस्य बन गए। ऐसे में 31 जुलाई 2004 को इसके नाम का अर्थ बदलते हुए 'बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टरल टेक्निकल एंड इकनॉमिक को-ऑपरेशन' कर दिया गया।
अध्यक्ष नियुक्ति की प्रक्रिया
देशों के नाम के प्रथम अक्षर के अनुसार क्रम से इस समूह की अध्यक्षता का निर्णय होता है। फिलहाल नेपाल इसका अध्यक्ष है। इससे पहले बांग्लादेश (1997-99), भारत (2000), म्यांमार (2001-02), श्रीलंका (2002-03), थाइलैंड (2003-05) और बांग्लादेश (2005-06) बिम्सटेक की अध्यक्षता कर चुके हैं। भूटान के मना करने पर भारत ने 2006-09 तक अध्यक्षता की थी।
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महत्वपूर्ण पड़ाव
1997 - 6 जून को बैंकॉक में बिस्ट-एक की घोषणा हो गई थी।
2004- फरवरी माह में नेपाल और भूटान भी शामिल हुए। तब इसका नाम बदलकर बिम्सटेक हो गया।
1.5 अरब लोगों की आबादी का प्रतिनिधित्व करता है यह संगठन। यह विश्व की कुल आबादी का 22% है।
सार्क की स्थापना से 12 साल बाद बना बिम्सटेक। सार्क की स्थापना 1985 में हुई थी।
बिम्सटेक
बिम्सटेक सार्क का विकल्प क्यों बना ?
पाकिस्तान का सार्क में अड़ियल रूख
बिम्सटेक की स्थापना आज से 1997 में हुई थी। इसकी शुरुआत गुजराल डॉक्ट्रिन के वक्त से ही मानी जा सकती है, जिसमें पाकिस्तान को शामिल न करने की बात कही गई थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल ने साफ संकेत दिया था कि अगर पाकिस्तान अपना असहयोगात्मक रवैया नहीं छोड़ेगा, तो भारत क्षेत्रीय सहयोग में उसे शामिल नहीं करेगा। इसका वर्तमान स्वरूप 2004 में स्थिर हुआ जब सम्मेलन की प्रक्रिया और अन्य चीजें तय हुईं। इसमें एक मुद्दा यह था कि सार्क-जो एक क्षेत्रीय संगठन के रूप में दक्षिण एशिया में है।
दरअसल, दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) की सीमित सफलता और पाकिस्तान के लगातार असहयोगात्मक रवैये के चलते एक क्षेत्रीय संगठन की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को बढ़ावा देना जारी रखने के चलते भारत ने पाकिस्तान में होने वाले सार्क शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया था, तभी से सार्क के अस्तित्व और अस्मिता पर सवाल उठना शुरू हो गया था। अब माना जा रहा है कि भारत की ओर से बिम्सटेक को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे बिम्सटेक में शामिल सार्क देशों के बीच भी क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि बिम्सटेक में पाकिस्तान नहीं है।
बंगाल की खाड़ी के देश भारत के लिए अहम
दूसरी बात यह है कि भारत की लुक ईस्ट नीति है। नब्बे के दशक में शुरू हुई इस नीति के तहत पूर्व की तरफ देखने की पहल के तहत हमने बंगाल की खाड़ी से सटे देशों के साथ बिम्सटेक शुरू किया। आज इसमें 7 देश हैं जिनकी पहुंच बंगाल की खाड़ी से है-श्रीलंका, थाइलैंड, भारत, म्यांमार, बांग्लादेश। इनके अलावा नेपाल और भूटान जमीन से घिरे हुए हैं मगर उनका पोर्ट एक्सेस बंगाल की खाड़ी के पास है।
बिम्सटेक का लक्ष्य
बिम्सटेक ने लगभग 14 एजेंडे तय किए, जो आपस में आर्थिक और तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर आधारित हैं। इस बार भी इन मुद्दों को प्राथमिकता दी जानी है, मगर सभी मुद्दों पर बात हो पाना संभव नहीं हैं। बिम्सटेक के सदस्य देशों में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का प्रस्ताव है, ताकि आपस में व्यापार को बढ़ावा दिया जा सके। अभी इन देशों में आपस में इतना व्यापार नहीं है।भारत और श्रीलंका में, भारत और नेपाल में या म्यांमार और थाइलैंड के बीच बेहतर व्यापारिक संबंध हैं मगर भारत का थाइलैंड के साथ और नेपाल का बांग्लादेश के साथ उतना व्यापार नहीं है।
अब एक्ट ईस्ट पॉलिसी पर जोर
बिम्सटेक के सफर से जुड़े दो महत्वपूर्ण तथ्य हैं। एक, दक्षिण एशियाई देशों के बीच उप-क्षेत्रीय सहयोग का विकास हुआ और दूसरा, इसमें आसियान संगठन के दो (दक्षिण-पूर्वी एशियाई) देशों- म्यांमार और थाइलैंड- के शामिल होने से सदस्य देशों के बीच अंतरक्षेत्रीय सहयोग का विकास हुआ। म्यांमार और थाइलैंड का बिम्सटेक में शामिल होना भारत की 'लुक ईस्ट पॉलिसी' का परिणाम था, जिसे मोदी ने अब 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' का रूप दिया है।
दक्षिण एशिया पर बिम्सटेक का फोकस
जाहिर है दक्षिण एशियाई सहयोग संगठन यानी सार्क तक तो भारत सिर्फ दक्षिण एशिया में ही क्षेत्रीय सहयोग, व्यापार, आयात-निर्यात आदि कर रहा था, लेकिन बिम्सटेक को बढ़ावा मिलने से पहुंच दक्षिण-पूर्वी एशिया तक हो गई है। भारत पहले सिर्फ दक्षिण एशिया पर ही फोकस कर रहा था, लेकिन अब उसने अपना विस्तार शुरू कर दिया है। अब भारत ने विकल्प के रूप में बहुपक्षीय संगठनों को प्रोत्साहन देना शुरू कर दिया है, जिसमें सबसे ऊपर है बिम्सटेक।
फंडिंग
बंगाल की खाड़ी से जुड़े देशों के संगठन बिम्सटेक के विकास के लिए इस संगठन का डेवलपमेंटल पार्टनर एडीबी (एशियन डेवलपमेंट बैंक) बना। बिम्सटेक देशों के बीच में भौतिक संपर्क, आर्थिक संपर्क और सांस्कृतिक संपर्क इन तीनों को बढ़ाने के लिए एडीबी प्रोत्साहन करता है और फंड देता है।
8 साल में 50 अरब डॉलर व्यापार बढ़ा
इसके लिए त्रिपक्षीय संपर्क मार्ग की व्यवस्था बनाई है, जो भारत, थाइलैंड और म्यांमार के बीच है। वर्ष 2013 में इस समूह का आंतरिक व्यापार 74.63 अरब डॉलर था, जो 2005 में महज 25.16 अरब डॉलर ही था। मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने के बाद इस समूह के अंदर व्यापार में 43 से 59 अरब डॉलर तक की बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन इसके लिए हर सदस्य देश को यातायात और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं में बहुत अधिक बेहतरी करनी होगी।