लोकसभा से पारित
तीन तलाक अर्थात मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक-2017 बुधवार को
राज्यसभा में पेश होगा। लोकसभा में बहुमत के चलते सरकार ने इसे पारित करा लिया है, लेकिन राज्यसभा में विधेयक का पारित होना विपक्ष के रुख पर निर्भर करेगा। कांग्रेस समेत लगभग सभी विपक्षी दलों की मंशा इसे स्थायी समिति के समक्ष भेजने की है।
कांग्रेस ने अभी तक बिल को लेकर अपनी राय स्पष्ट नहीं की है, लेकिन अधिकतर विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे पर एकजुट दिख रही हैं। विधेयक को लेकर कांग्रेस पर राजनीतिक दबाव है। लिहाजा कांग्रेस अन्य विपक्षी पार्टियों के साथ मिलकर कोई फैसला लेना चाहती है। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस, भाकपा, माकपा, द्रमुक, सपा, बीजद, अन्नाद्रमुक आदि ने विधेयक को लेकर अपनी भावनाओं से राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू को अवगत करा दिया है।
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इन पार्टियों की कोशिश है कि विधेयक स्थायी समिति को भेजा जाए, जिससे कि उनकी ओर से उठाई जा रही आपत्तियों को लेकर विधेयक में संशोधन हो सके। हालांकि संसदीय कार्य राज्यमंत्री विजय गोयल इस कोशिश में हैं कि लोकसभा की तरह ही राज्यसभा में भी विधेयक पारित हो जाए। सरकार की ओर से कांग्रेस नेताओं से बातचीत कर आमसहमति बनाने की कोशिश जारी है।
राज्यसभा में संशोधन न लाए कांग्रेस : सरकार
triple talaq
सरकार ने मंगलवार को कांग्रेस से अनुरोध किया कि मुस्लिम महिलाओं को एक बार में तीन तलाक कहे जाने के चलन को फौजदारी अपराध बनाने के प्रावधान वाला विधेयक जब राज्यसभा में आए तो वह किसी संशोधन पर जोर न दे। संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने कहा कि सरकार चाहेगी कि कांग्रेस संशोधन पर जोर न देने के अपने उसी रुख पर कायम रहे जो उसने लोकसभा में अपनाया था।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘हमारी कांग्रेस सहित विपक्षी दलों से निरंतर बातचीत चल रही है। हमने कांग्रेस से कहा है कि चूंकि उन्होंने लोकसभा में किसी संशोधन पर बल नहीं दिया है, उन्हें राज्यसभा में भी यही करना चाहिए।’ कांग्रेस ने इस विधेयक के कुछ प्रावधानों पर लोकसभा में संशोधन पेश किया था, लेकिन उन्हें पारित करवाने पर जोर नहीं दिया।
रेणुका चौधरी, कांग्रेस सांसद- कांग्रेस पार्टी हमेशा महिलाओं के सशक्तिकरण के पक्ष में रही है, लेकिन पार्टी को यह देखना होगा कि विधेयक में वास्तव में क्या है। महिलाओं के सशक्तिकरण के पक्ष में हम खड़े न हो, यह सवाल ही नहीं उठता। इसका कोई स्पष्ट समाधान नहीं है। हमें देखना होगा कि चर्चा कैसे होती है। वास्तव में क्या शामिल किया गया है और इसे कैसे लागू किया जा सकता है।