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संसद: थिएटर कमान में कमांडर-इन-चीफ को शक्ति देने वाला विधेयक पारित, अगले सप्ताह राज्यसभा में होगा आएगा

Sat, 05 Aug 2023 06:11 AM IST
जलज मिश्रा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

वर्तमान में, अंतर-सेवा संगठनों के कमांडर-इन-चीफ या ऑफिसर-इन-कमांड को अन्य सेवाओं के कर्मियों पर अनुशासनात्मक या प्रशासनिक शक्तियों का प्रयोग करने का अधिकार नहीं है। सिर्फ संबंधित सेवाओं के अधिकारियों को ही अपने संबंधित सेवा अधिनियमों के तहत सेवा कर्मियों पर अनुशासनात्मक शक्तियों का प्रयोग करने का अधिकार है।
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भारतीय सेना (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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तीनों सेनाओं की थिएटर कमान के कमांडर-इन-चीफ और ऑफिसर-इन-कमांड को उनके अंतर्गत कार्यरत सभी बलों के कर्मियों पर अनुशासनात्मक और प्रशासनिक शक्तियां प्रदान करने वाले अंतर-सेवा संगठन (कमान, नियंत्रण और अनुशासन) विधेयक, 2023 पर लोकसभा ने शुक्रवार को मुहर लगा दी। संसदीय पैनल ने विधेयक को बिना किसी संशोधन के पारित करने की सिफारिश की है। अगले हफ्ते इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा।

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विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी के बीच रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने सभापति से पीछे की किसी भी सीट से अपनी बात रखने की अनुमति मांगी। विधेयक पेश करते हुए राजनाथ सिंह ने बताया, अंतर-सेवा संगठन (कमान, नियंत्रण व अनुशासन) विधेयक सशस्त्र बलों को मजबूत करने के लिए सरकार के उठाए जा रहे कदमों की शृंखला का एक हिस्सा है। सिंह ने कहा, अब तक, सेना, नौसेना और वायुसेना के कर्मियों को विशिष्ट सेवा अधिनियमों - सेना अधिनियम, 1950, नौसेना अधिनियम, 1957 और वायुसेना अधिनियम, 1950 में निहित प्रावधानों के अनुसार शासित किया जाता है। जब ये अधिनियम बने थे, तब अधिकांश सेवा संगठनों में बड़े पैमाने पर एक ही सेवा के कर्मी शामिल थे। हालांकि, अब ऐसे कई अंतर-सेवा संगठन हैं, जहां ये कर्मी एक साथ काम करते हैं।

मौजूदा समय में अन्य सेवाओं के कर्मियों पर कार्रवाई का अधिकार नहीं
वर्तमान में, अंतर-सेवा संगठनों के कमांडर-इन-चीफ या ऑफिसर-इन-कमांड को अन्य सेवाओं के कर्मियों पर अनुशासनात्मक या प्रशासनिक शक्तियों का प्रयोग करने का अधिकार नहीं है। सिर्फ संबंधित सेवाओं के अधिकारियों को ही अपने संबंधित सेवा अधिनियमों के तहत सेवा कर्मियों पर अनुशासनात्मक शक्तियों का प्रयोग करने का अधिकार है। सिंह ने कहा, इन संगठनों में सेवारत अधिकारियों को किसी भी अनुशासनात्मक या प्रशासनिक कार्रवाई के लिए उनकी संबंधित मूल सेवा इकाइयों में वापस भेजा जाता है, जिसके परिणामस्वरूप देरी होती है। ऐसे में सरकार का नया बिल अगर कानून बना तो इस देरी को खत्म करेगा।

अनुशासन से जुड़े मामलों में आ रही थीं अड़चनें

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अगले हफ्ते यह विधेयक राज्यसभा में पेश किया जाएगा। अभी तीनों सेनाओं के अलग-अलग अधिनियमों के कारण एकीकृत सेना के कमान, नियंत्रण और अनुशासन संबंधी मामलों में गंभीर अड़चनें आ रही थीं। यह विधेयक सरकार को सेना के तीनों अंगों के मिलाकर अंतर-सेना संगठन गठित करने का अधिकार भी देता है।

पिछले सत्र में स्थायी समिति के पास भेजा गया था बिल
यह विधेयक पिछले सत्र में 15 मार्च को पेश किए जाने के बाद सेना संबंधी स्थायी समिति को भेज दिया गया था। समिति ने लंबे विमर्श के बाद इस विधेयक को बिना किसी संशोधन के अविलंब पारित कराने की सिफारिश की थी। कमांडर-इन-चीफ या ऑफिसर-इन-कमांड दरअसल विभिन्न अंगों के जनरल ऑफिसर, फ्लैग ऑफिसर या एयर ऑफिसर होते हैं, जिन्हें आईएसओ में कमांडर-इन-चीफ और ऑफिसर-इन-कमांड के रूप में नियुक्त किया जाता है।

148 हवाईअड्डों में सिर्फ 22 ही कमा रहे मुनाफा
देश के 148 हवाईअड्डों में से केवल 22 ही मुनाफा कमा रहे हैं और पिछले दो दशकों से विकास पथ पर होने के बावजूद यह क्षेत्र पूर्ण लाभ व जनसांख्यिकीय लाभांश प्राप्त नहीं कर पाया है। राज्यसभा के सांसद सुजीत कुमार की अध्यक्षता वाली समिति ने राज्यसभा में पेश रिपोर्ट में कहा कि हवाईअड्डों के निर्माण में तेजी आई है। दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ने वाला विमानन बाजार होने के बावजूद, भारत के हवाईअड्डों के विस्तार को अभी भी वांछित गति नहीं मिल पाई है। 

सेना की तीनों सेवाओं में 11,414 महिलाएं सेवारत
वायुसेना, नौसेना व थलसेना में फिलहाल 11,414 महिलाएं सेवारत हैं, जिनमें से सबसे अधिक 7,054 महिलाएं थलसेना में हैं। कुल संख्या में अधिकारी, अन्य रैंक के साथ-साथ चिकित्सा, दंत चिकित्सा और नर्सिंग सेवाओं की अधिकारी भी शामिल हैं। चिकित्सा, दंत चिकित्सा और नर्सिंग सेवाओं को छोड़कर तीनों सेवाओं में कार्यरत महिला कर्मियों की संख्या 4,948 है। रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट की ओर से लोकसभा में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए दिए गए विवरण के अनुसार, सेना में 1,733 महिला अधिकारी हैं, जबकि 100 महिला कर्मी अन्य रैंकों में कार्यरत हैं। यह आंकड़ा इस वर्ष एक जनवरी तक का है। वहीं, वायुसेना में महिला अधिकारियों की संख्या 1 जुलाई तक, 1,654 है, जबकि 155 अग्निवीर वायु के तौर पर कार्यरत हैं। जबकि नौसेना में 26 जुलाई तक 580 महिला अधिकारी कार्यरत हैं, जबकि 726 नाविक (अग्निवीर) हैं। 
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