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कर्ज वसूली के नाम पर मनमानी पर लगेगी रोक: महाराष्ट्र में अवैध साहूकारी पर सख्त हुआ कानून; क्या प्रावधान बदले?

Tue, 07 Jul 2026 11:02 PM IST
निर्मल कांत पीटीआई, मुंबई।

सार

महाराष्ट्र विधानसभा ने अवैध साहूकारी पर रोक लगाने के लिए नये विधेयक को मंजूरी दी गई है। इसमें बिना लाइसेंस कर्ज देने वालों पर सात साल तक की जेल और एक लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। पढ़िए रिपोर्ट-
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महाराष्ट्र में अवैध साहूकारी पर नकेल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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महाराष्ट्र विधानसभा ने मंगलवार को गैरकानूनी तरीके से कर्ज देने वाले साहूकारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई वाला विधेयक पारित कर दिया। इसमें बिना अनुमति के कर्ज देने वालों को अधिकतम सात साल की जेल और एक लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
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इस विधेयक का मकसद कर्ज लेने वाले लोगों को सुरक्षा देना है। महाराष्ट्र साहूकारी (नियमन) (संशोधन) विधेयक, 2026 को सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने विधानसभा में पेश किया था।

इसमें मौजूदा कानून में बदलाव कर बिना वैध लाइसेंस के कर्ज देने, फर्जी नाम से लाइसेंस लेने, बिना अनुमति वाली जगह से काम करने और कर्ज वसूली के लिए कर्ज लेने वालों को परेशान करने वालों पर सजा बढ़ाने का प्रस्ताव है। 
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बिना लाइसेंस कर्ज देने वालों पर क्या कार्रवाई होगी?
  • बिना लाइसेंस के साहूकारी करने पर अधिकतम सजा पांच साल से बढ़ाकर सात साल की जाएगी।
  • जुर्माने की अधिकतम राशि 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दी जाएगी।
  •  विधेयक में फर्जी नाम से लाइसेंस लेने या बिना अनुमति वाली जगह से साहूकारी करने पर भी सजा बढ़ाने का प्रस्ताव है।
  • पहली बार अपराध करने पर अधिकतम जेल की सजा एक साल साल से बढ़ाकर 3 साल और जुर्माना 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये किया जाएगा। 
  • दोबारा अपराध करने पर अधिकतम जेल की सजा 5 साल से बढ़ाकर 7 साल और जुर्माना 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये किया जाएगा।

कर्ज वसूली में परेशान करने पर क्या सजा होगी?
इसके अलावा, कर्ज वसूली के दौरान कर्ज लेने वाले व्यक्ति से छेड़छाड़ करने या इसके लिए उकसाने पर भी सजा बढ़ाने का प्रस्ताव है। इसमें जेल की सजा 2 साल से बढ़ाकर 3 साल और अधिकतम जुर्माना 5 हजार रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये किया जाएगा।

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विधेयक के उद्देश्य और कारणों के अनुसार, मौजूदा सजा के प्रावधानों के बावजूद कुछ लोग और संस्थाएं अब भी अवैध रूप से कर्ज देने का काम कर रही हैं। इससे कर्ज लेने वाले लोगों को नुकसान हो रहा है और कानून का डर कम हो रहा है।

सरकार का कहना है कि इन बदलावों का मकसद बार-बार होने वाले अपराधों को रोकना, कर्ज लेने वालों को शोषण से बचाना और दोषियों की जवाबदेही तय करना है।
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