ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक।
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बीजू जनता दल (बीजेडी) अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले किसी गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेगा। ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक पहले की तरह भाजपा और कांग्रेस से समान दूरी बनाए रखने की नीति पर ही आगे बढ़ेंगे। बीजेडी सूत्रों के मुताबिक मंगलवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात में उन्हें पटनायक ने अपने निर्णय से अवगत करा दिया।
नीतीश-पटनायक मुलाकात के तत्काल बाद विपक्षी एकता की मुहिम से दूरी का संकेत मिला। दोनों नेताओं की मुलाकात के बाद नीतीश ने कहा, हमारे बीच कोई राजनीतिक बातचीत नहीं हुई। दोपहर के भोजन के बाद मीडिया को साझा संबोधन में पटनायक ने भी गठबंधन पर किसी प्रकार की चर्चा नहीं होने की पुष्टि की। दोनों नेताओं ने एक दूसरे को अपना पुराना मित्र बताया और कहा कि हमारे बीच बातचीत होती रहती है।
गठबंधन में शामिल होना घाटे का सौदा
बीजेडी के एक वरिष्ठ सांसद ने कहा कि पार्टी के लिए किसी एक गठबंधन में शामिल होना घाटे का सौदा है। पार्टी समान दूरी की नीति पर चलते हुए ही नवीन पटनायक के नेतृत्व में लगातार पांच विधानसभा चुनाव जीतने में कामयाब रही है। अब भी राज्य में सत्ता विरोधी रुझान नहीं है। ऐसे में कांग्रेसनीत गठबंधन का अंग बनने में पार्टी अपना कोई लाभ नहीं देख रही।
नीतीश अब उद्धव और पवार से करेंगे मुलाकात
विपक्षी एकता की मुहिम के तहत नीतीश कुमार अब बृहस्पतिवार को एनसीपी प्रमुख शरद पवार और शिवसेना उद्धव गुट के मुखिया उद्धव ठाकरे से अलग-अलग मुलाकात करेंगे। जदयू सूत्रों का कहना है कि नीतीश से बात नहीं बनने के बाद नवीन पटनायक को साधने के लिए अब पवार मोर्चा संभाल सकते हैं।
मोदी मैजिक का डर
विपक्षी गठबंधन बनने पर पार्टी को मोदी मैजिक का भी डर है। 2019 में राज्य में लोकसभा और विधानसभा चुनाव में अलग-अलग दिलचस्प ट्रेंड दिखा था। लोकसभा चुनाव में भाजपा ने बीजेडी को बड़ा झटका देते हुए 21 में से 8 सीटें जीत ली थी। जबकि विधानसभा चुनाव में बीजेडी को दो तिहाई बहुमत हासिल हुआ था। लोकसभा चुनाव में जहां दोनों दलों के मत का अंतर करीब चार फीसदी था, वहीं विधानसभा चुनाव में यह अंतर 12 फीसदी का था। दोनों ही चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा था। बीजेडी को डर है कि कहीं कांग्रेस की अगुवाई वाले गठबंधन का अंग बनने से उसका प्रतिकूल प्रभाव विस चुनाव में न पड़े।