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2017-18 में विकास दर में अव्वल रहा बिहार, रोजगार निर्माण में पिछड़े ज्यादातर बड़े राज्य

Tue, 22 Jan 2019 10:24 AM IST
अजय सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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nitish kumar
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'बिहार में बहार है, विकास दर 10% के पार है।' यह बात रेटिंग्स एजेंसी क्रिसिल की रिपोर्ट कह रही है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में राज्यों में विकास दर के मामले में बिहार टॉप पर रहा है। इस दौरान बिहार का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (ग्रॉस स्टेट डोमेस्टिक प्रॉडक्ट यानी जीएसडीपी) 11.3% की दर से बढ़ा। इस रैंकिंग में उन 17 राज्यों को शामिल किया गया है जो केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय के आंकड़ों (सेंट्रल स्टैटिस्टिक्स डेटा) पर आधारित विभिन्न मापदंडों के अनुसार विशेष श्रेणी में नहीं आते हैं। छोटा राज्य होने के कारण गोवा को इस रैंकिंग में शामिल नहीं किया गया है। 
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इस रिपोर्ट में आंध्र प्रदेश दूसरे और गुजरात तीसरे नंबर पर है। जीएसडीपी के मामले में सबसे खराब प्रदर्शन झारखंड, केरल और पंजाब का रहा है। वहीं वित्त वर्ष 2018 में विकास, महंगाई और वित्तीय घाटे की रैंकिंग्स में गुजरात और कर्नाटक बेहतरीन करने वाले टॉप तीन राज्यों में शामिल हैं। 

गुजरात और कर्नाटक में उत्पादन ने विकास दर को बढ़ाया, मध्यप्रदेश में कृषि इसके पीछे का मुख्य कारण रही। इसके अलावा पश्चिम बंगाल के पिछड़ने का कारण खनन और झारखंड के पिछड़ेपन का कारण बिजली और अन्य सुविधाएं रहीं। 
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वित्त वर्ष 207-18 में देश की जीडीपी ग्रोथ में सुस्ती का ट्रेंड दिखा, लेकिन इन 17 में 12 राज्यों की विकास दर पिछले पांच सालों के मुकाबले ज्यादा रही। वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर से अधिक तेजी से वृद्धि करने वाले 12 बड़े राज्य इसका फायदा रोजगार सृजन में नहीं उठा सके हैं।

एक रिपोर्ट के अनुसार इन राज्यों की जीडीपी में वृद्धि मुख्यत: ऐसे क्षेत्रों में हुई है जिनमें रोजगार के कम अवसर होते हैं।
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क्रिसिल की यह रिपोर्ट ऐसे समय में आयी है जब सेंटर फोर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी ने सिर्फ 2018 में ही 1.10 करोड़ नौकरियां समाप्त होने की बात कही है।

क्रिसिल ने सोमवार को कहा कि अधिकांश राज्यों में आर्थिक वृद्धि रोजगार सृजन के अनुकूल नहीं रही है। रिपोर्ट में कहा गया कि 11 राज्यों में विनिर्माण, निर्माण, व्यापार, होटल, परिवहन और संचार सेवाओं जैसे रोजगार केंद्रित क्षेत्रों में राष्ट्रीय दर की तुलना में कम रफ्तार से वृद्धि हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार पिछले वित्त वर्ष में 12 राज्यों की आर्थिक वृद्धि दर राष्ट्रीय दर की तुलना में अधिक रही। क्रिसिल ने कहा कि इस दौरान कम आय वाले राज्यों तथा अधिक आय वाले राज्यों के बीच प्रति व्यक्ति आय की खाई चौड़ी हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार गुजरात, बिहार और हरियाणा में रोजगारोन्मुख क्षेत्रों की वृद्धि सबसे तेज रही। राजस्थान, झारखंड और मध्य प्रदेश में इनकी वृद्धि दर सबसे कम रही। राजस्थान, झारखंड और उत्तर प्रदेश पिछले तीन वर्ष में क्षमता विस्तार के अनुपात में सबसे ऊपर रहे। पर इन राज्यों में स्वास्थ्य, सिंचाई और शिक्षा जैसे क्षेत्रों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। 

गुजरात और कर्नाटक महंगाई दर, वृद्धि और राजकोषीय घाटे के मामले में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले तीन शीर्ष राज्य रहे। इस मामले में केरल और पंजाब का प्रदर्शन फिसड्डी रहा।
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