भविष्य में उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी का भाजपा से गठबंधन और राजग का सहयोगी दल बनना भी तय है। दरअसल बीते साल नीतीश कुमार के भाजपा से नाता तोड़ने के बाद से ही जदयू के कई नेता अपने भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं।
जदयू के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने सोमवार को अपनी नई पार्टी राष्ट्रीय लोक जनता दल (आरएलजेडी) बनाने की घोषणा कर एक और नई सियासी पारी की शुरुआत की है। इस नई सियासी पारी में कुशवाहा की नजर जदयू की विरासत के साथ जदयू के वोट बैंक पर है।
विज्ञापन
भविष्य में उनकी पार्टी का भाजपा से गठबंधन और राजग का सहयोगी दल बनना भी तय है। दरअसल बीते साल नीतीश कुमार के भाजपा से नाता तोड़ने के बाद से ही जदयू के कई नेता अपने भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं। राजद से नाता जोड़ने के बाद जदयू की भविष्य की रणनीति को ले कर अस्पष्टता अब तक बनी हुई है। मसलन कभी राजद-जदयू में विलय की चर्चा होती है तो कभी सरकार की कमान उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को दिए जाने की चर्चा जोर पकड़ती है।
कुशवाहा की रणनीति
कुशवाहा की रणनीति नई पार्टी के सहारे जदयू के वोट बैंक और विरासत पर दावा करने की है। कुशवाहा के करीबियों का मानना है कि फिलहाल नीतीश के स्वजातीय कुर्मी बिरादरी को छोड़ कर गैरयादव पिछड़ी जातियों में जदयू के खिलाफ रोष है। ये गैरयादव पिछड़ी जातियां राजद का नेतृत्व स्वीकार नहीं कर सकती। नीतीश को स्वजातीय वोट तभी तक मिलेंगे, जब तक कि वह सरकार की अगुवाई कर रहे हैं। ऐसे में कुशवाहा जदयू के नाराज नेताओं को साध कर पार्टी की विरासत पर भी दावा जताना चाह रहे हैं।
विज्ञापन
नाराज नेताओं और वोट बैंक पर नजर
जदयू में बड़ी संख्या में ऐसे नेता हैं जिन्हें राजद से गठबंधन रास नहीं आ रहा। यही हाल जदयू के कोर वोटबैंक का भी है। तीन विधानसभा उपचुनाव के नतीजे बताते हैं कि जदयू का राजद से हाथ मिलाने के बाद अति पिछड़ों में भाजपा की पैठ बढ़ी है। दरअसल जदयू-भाजपा गठबंधन ने गैरयादव पिछड़ी जातियों में मजबूत आधार बनाया था। अब जदयू-राजद के साथ आने से गैरयादव पिछड़ी जातियां ऊहापोह में हैं।
नीतीश को अलग-थलग करने की है भाजपा की रणनीति
भाजपा की रणनीति जदयू के ऐसे नेताओं को कुशवाहा की पार्टी की छाया देने की है जो सीधे उसकी पार्टी का दामन नहीं थाम सकते। पार्टी चाहती है कि लोकसभा चुनाव के आते आते जदयू से अधिक से अधिक नेताओं का मोहभंग हो, जिससे नीतीश को अलग-थलग किया जा सके। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि अगर जदयू के अहम नेताओं ने पार्टी छोड़ी तो भाजपा लोजपा और कुशवाहा के जरिये जदयू के वोट बैंक को राजग के पाले में रख सकती है।
शनिवार से जोर आजामाइश
भाजपा और महागठबंधन के बीच शनिवार से सियासी जोर आजमाइश शुरू होगी। इसी दिन गृह मंत्री अमित शाह पटना में तो महागठबंधन के नेता पूर्णिया में शक्ति प्रदर्शन करेंगे।