परिवार के मुताबिक़, उन्होंने रिंकू और उसके तीन साथियों नीरज पाठक, विशाल राम और खटूस के खिलाफ अपहरण करने की लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। लेकिन पुलिस ने शिकायत से रिंकू और उसके एक साथी खटूस का नाम हटाने की शर्त पर बच्चे के सकुशल वापसी का वायदा किया। परिवार के द्वारा शिकायत वापस लेने के बाद भी उनका बच्चा पवन वापस नहीं आया और उन्हें टाला जाता रहा।
अंतत: परिवार ने इस मामले की जांच करने के लिए पटना हाई कोर्ट में (वर्ष 2014 में केस नंबर 211) अपील किया। कोर्ट ने लापरवाही बरतने पर थाने को जमकर फटकार लगाई और मामले की पूरी तफ्तीश का आदेश पटना के मशहूर आईपीएस अधिकारी मनु महाराज को दिया था।
आरोप है कि इस आदेश के बाद मामले के जांच अधिकारी फहीम आज़ाद खान और उसके कुछ साथियों ने पीड़ित परिवार के साथ ही मारपीट की थी। उनसे से फोन छीन लिए गए जिनमें अपराधियों से बातचीत की पूरी रिकॉर्डिंग थी। यह मामला तब स्थानीय मीडिया की सुर्ख़ियों में भी आ गया था। लेकिन इस सबके बाद भी आज तक इस मामले में कोई प्रगति नहीं हुई।
पीड़ित परिवार ने इस मामले की जांच के लिए मंगलवार 16 जुलाई 2019 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में अपील की है। शिकायत पवन कुमार पाण्डेय की मां की तरफ से दाखिल की गई है। दूसरे को न्याय दिलाने के लिए अपनी जिंदगी खपा देने वाले एक सिपाही को आज भी अपने बेटे की वापसी का इंतज़ार है।