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Bihar: क्या 100 यूनिट फ्री बिजली देने से पीछे हटी नीतीश सरकार, बिहार चुनाव में फ्री का खेला क्यों बंद?

सार

बड़ा सवाल यह भी है कि जिस समय मुफ्त की योजनाओं की घोषणा करना चुनावी जीत की गारंटी बन गया है, बिहार सरकार ने इस फैसले से कदम क्यों वापस खींचे? अभी इस मुद्दे पर महागठबंधन के पत्ते खुलने बाकी हैं।
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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार में जैसे ही लोगों को यह पता चला था कि नीतीश कुमार ने हर परिवार को सौ यूनिट मुफ्त बिजली देने का फैसला लिया है, लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई थी। करीब आठ रूपये प्रति यूनिट की दर से बिजली की कीमत चुका रहे बिहार के लोगों ने इसे अपने लिए बड़ी चुनावी सौगात माना था। लेकिन शाम होते-होते यह सूचना गलत साबित हुई। सरकार के वित्त विभाग ने एक नोटीफिकेशन जारी कर यह साफ कर दिया कि सरकार ने इस तरह का कोई निर्णय नहीं लिया है। 

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इसको लेकर लोगों में निराशा भी दिखाई पड़ी। लेकिन बड़ा सवाल यह भी है कि जिस समय मुफ्त की योजनाओं की घोषणा करना चुनावी जीत की गारंटी बन गया है, बिहार सरकार ने इस फैसले से कदम क्यों वापस खींचे? अभी इस मुद्दे पर महागठबंधन के पत्ते खुलने बाकी हैं। यदि महागठबंधन इस खेल में अपना दांव लगाता है, क्या तब भी एनडीए इस तरह के वादों से पीछे ही रहने का निर्णय करेगा? 

दरअसल, बिहार अपने आर्थिक पिछड़ेपन के बाद भी एक मामले में देश के दूसरे राज्यों से बेहतर स्थिति में है। देश के कई राज्यों की अर्थव्यवस्था कर्ज पर टिकी हुई है। हद से ज्यादा कर्ज लेने के कारण पंजाब जैसे राज्य अपनी कर्ज लेने की क्षमता तक खो चुके हैं, लेकिन ऐसे दौर में जबकि कर्ज लेकर राज्य को बेहतर बनाने को एक आजमाया हुआ नुस्खा मान लिया गया है, नीतीश कुमार ने इस नीति को नहीं अपनाया है। वे राज्य की अपनी आय और केंद्र सरकार के द्वारा दिए जा रहे आर्थिक अनुदान से राज्य की सरकार संभालते रहे हैं।  
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बिहार ने शराबबंदी भी लागू कर रखी है। इससे बिहार को आबकारी विभाग से मिलने वाली सबसे बड़ी आय पर भी पाबंदी लग गई है। कई राज्यों की सरकार की बड़ी कल्याणकारी योजनाएं  और शिक्षा-स्वास्थ्य आबकारी विभाग से प्राप्त आय पर टिकी हुई है। लेकिन इस घाटे को सहने के बाद भी बिहार ने शराब बेचने की अनुमति नहीं दी है। 

अर्थव्यवस्था पर पहले से दबाव
बिहार के सत्तारूढ़ दल के सूत्रों के अनुसार, राज्य की अर्थव्यवस्था पहले से बहुत दबाव में है। लगातार बढ़ती आबादी के कारण सभी कल्याणकारी योजनाओं पर लगातार खर्च बढ़ रहा है। ऐसे में सरकार कोई नया खर्च वहन करने की स्थिति में नहीं है। यदि बिहार में सौ यूनिट बिजली मुफ्त देने की घोषणा की जाती है तो इससे राज्य सरकार पर बहुत अधिक दबाव पड़ेगा। बिहार में बिजली की स्थिति पहले से ही बदहाल स्थिति में है। लोगों को बिजली उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। यदि ऐसे में हर परिवार को सौ यूनिट बिजली मुफ्त देने का निर्णय लिया जाता है तो इससे सरकार पर बड़ा आर्थिक दबाव पड़ना तय है। यही कारण है कि एक सोची समझी रणनीति के अंतर्गत यह निर्णय वापस ले लिया गया है। 

राज्य की अर्थव्यवस्था को संभालना मकसद
जदयू सूत्रों के अनुसार, पार्टी यह मानकर चल रही है कि उसकी सत्ता में वापसी तय है। ऐसे में सत्ता में वापसी के बाद भी उसे राज्य की अर्थव्यवस्था को संभालना है। ऐसे में वह अपने लिए कोई ऐसा खतरा नहीं पैदा करना चाहती जो सत्ता वापसी के बाद उसे ही भारी पड़ जाए। जदयू नेता का दावा है कि नीतीश कुमार ने पिछले 20 वर्षों में जो भी दावा किया है, उसे पूरा निभाया है। ऐसे में वह कोई ऐसा दावा नहीं करना चाहते जिसे पूरा न किया जा सके। 

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