ज्ञानेश कुमार, मुख्य चुनाव आयुक्त
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बिहार में मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर चुनाव आयोग द्वारा चलाया गया विशेष सघन पुनरीक्षण अभियान अब लगभग पूरा हो चुका है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने राज्य के मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी के लिए आभार जताया है। उन्होंने कहा कि बिहार के लोगों ने लोकतंत्र को मजबूत करने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने जानकारी दी कि बिहार के कुल 7.89 करोड़ मतदाताओं में से अब तक करीब 7 करोड़ यानी 88.65% ने अपना एन्यूमरेशन फॉर्म भरकर जमा कर दिया है। इनमें से 81.96% डेटा पहले ही डिजिटल सिस्टम में अपलोड हो चुका है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि जनता ने चुनाव आयोग के अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है।
35 लाख से ज्यादा फर्जी या डुप्लीकेट वोटर की पहचान
चुनाव आयोग के अनुसार, इस प्रक्रिया में 35.6 लाख मतदाताओं की पहचान की गई है जो अपने रजिस्टर्ड पते पर नहीं मिले। इनमें से 12.55 लाख मृतक, 17.37 लाख स्थायी रूप से बाहर चले गए मतदाता और 5.76 लाख ऐसे मतदाता हैं जिनके नाम एक से अधिक जगह दर्ज हैं। यह जानकारी आयोग की पारदर्शिता और सटीकता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रही है।
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राजनीतिक दलों और बूथ एजेंटों को सौंपी जा रही है जिम्मेदारी
चुनाव आयोग अब 17 जुलाई से 1.5 लाख बूथ लेवल एजेंट और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को यह डेटा सौंपेगा ताकि वे मतदाता की स्थिति की पुष्टि कर सकें। यह प्रक्रिया 25 जुलाई तक चलेगी और इसके बाद 1 अगस्त को संशोधित वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट जारी किया जाएगा।
शहरी क्षेत्रों में लगाए जा रहे हैं विशेष कैंप
राज्य के 261 शहरी निकायों के 5,683 वार्डों में विशेष कैंप लगाए जा रहे हैं ताकि जिन लोगों ने अब तक फॉर्म नहीं भरे हैं, वे जल्द से जल्द फॉर्म जमा करें। आयोग का उद्देश्य है कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से वंचित न रहे। इन कैंपों में मतदाता अपना नाम, पता, फोटो और अन्य जानकारी सुधार सकते हैं।
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प्रवासी मतदाताओं के लिए ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध
जो मतदाता बिहार से बाहर रह रहे हैं, वे ईसीआई नेट ऐप या चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से अपना फॉर्म ऑनलाइन भर सकते हैं। चुनाव आयोग ने सभी लोगों से अपील की है कि 25 जुलाई तक फॉर्म भरकर अपने लोकतांत्रिक अधिकार का हिस्सा बनें।