बिहार में विधानसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। चुनाव आयोग बिहार में तीन चरणों में चुनाव कराने को लेकर तारीखों की घोषणा भी कर चुका है और इसी के साथ राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू हो गया है।
इन सबके बीच राजनीतिक पार्टियों में सीट बंटवारे को लेकर मंथन जारी है। राजद नेतृत्व वाले महागठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। इस गठबंधन के दो प्रमुख घटक दलों आरजेडी और कांग्रेस के बीच सीटों को लेकर खींचतान का सिलसिला शुरू हो गया है। वहीं, राजद के साथ सीटों के बंटवारे की चर्चा के बीच कांग्रेस पार्टी ने बुधवार को बिहार इकाई और कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) के नेता को दिल्ली बुलाया है। बिहार की अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) की स्क्रीनिंग कमेटी भी कल दोपहर तीन बजे बैठक करेगी।
कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक
विधानसभा चुनाव के लिए संभावित उम्मीदवारों के नामों पर विचार के लिए बुधवार को कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक होगी। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि पूर्व महासचिव अविनाश पांडे की अध्यक्षता वाली स्क्रीनिंग कमेटी विभिन्न सीटों पर संभावित उम्मीदवारों के नामों पर मंथन करेगी।
उन्होंने कहा कि ‘अभी राजद के साथ सीटों के तालमेल को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। ऐसे में हम सभी 243 सीटों के लिए विभिन्न नामों पर विचार करेंगे। सीट बंटवारा होने के बाद कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों के नाम केंद्रीय चुनाव समिति के पास भेजे जाएंगे।’
बता दें कि इससे पहले कांग्रेसी खेमे की ओर से 243 सीटों पर तैयारी संबंधी बयान के बाद आरजेडी ने दो टूक जवाब दिया था। आरजेडी ने सोमवार को कांग्रेस को 58 विधानसभा और वाल्मीकि नगर लोकसभा सीट से लड़ने का ऑफर दिया था। पहले अंदरखाने कांग्रेस के खाते में 65 से 70 सीटें जाने की उम्मीद जताई जा रही थी। इस नई उलझन के बाद अब सीट बंटवारे की घोषणा में भी कुछ देरी हो सकता है।
सोमवार को आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने साफ शब्दों में कहा कि कांग्रेस को 58 विधानसभा और एक वाल्मीकि नगर लोकसभा सीट ही मिलेगी। उनका तर्क था कि कांग्रेस राष्ट्रीय पार्टी है और देशभर में लड़ती है। आरजेडी का बिहार में अधिक सीटों पर लड़ने का स्वाभाविक हक बनता है। उन्होंने यह भी कहा कि एनडीए में घर के चिराग से ही आग लग गई है। महागठबंधन में सबकुछ ठीक है।
वहीं वाम दल अपनी सीटें बढ़ाने के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं। भाकपा माले को जो सीटें दी जा रही हैं, वह उनमें कुछ बदलाव चाहता है। 'वीआईपी' भी सीटों की संख्या बढ़वाने को लेकर राजद और कांग्रेस के दिल्ली दरबार तक चक्कर लगा रहा है। अभी तक राजद और कांग्रेस की बातचीत पटरी पर थी मगर कुछ हालिया घटनाक्रमों से वो भी बेपटरी हो चली है। हालांकि दोनों ही दल मामला सुलझने की ही बात कह रहे हैं।