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Bihar Chunav 2025: प्रमंडलवार कितने बदले नतीजे, कहां हुआ महागठबंधन का सूपड़ा साफ; एनडीए का क्या हाल?

Sat, 15 Nov 2025 08:27 AM IST
संध्या इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला

सार

Bihar Vidhan Sabha Chunav Result 2025: बिहार में कुल नौ प्रमंडल है। इसमें 2020 विधानसभा नतीजों की बात करें तो इसमें से पांच एनडीए तो चार महागठबंधन के साथ रहे थे। वहीं 2025 के विधानसभा चुनाव के रुझानों में एनडीए फिर से बढ़त बनाती दिख रही है।
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बिहार चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं। अब तक के नतीजों में साफ है कि राज्य में एनडीए की सरकार बन रही है। किस पार्टी को कितनी सीट मिलेगी? कहां कौन अपने गढ़ को बचाने में सफल रहेगा? किसका किला ढह गया? ये साफ हो गया है। इसके साथ ही इस चुनाव में बिहार के किस प्रमंडल ने किसका साथ दिया यह भी सामने आ गया है ।

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नौ प्रमंडलों में बंटे बिहार में 2020 के नतीजों को देखें तो पांच में एनडीए और चार में महागठबंधन ने बढ़त बनाई थी। हालांकि, इस बार एनडीए ने लगभग सभी प्रमंडलों में एकतरफा तौर पर जीत हासिल की है। पढ़ें, बिहार के सभी प्रमंडलों का इस बार का हाल...

सबसे बड़े प्रमंडल में तिरहुत में किसका जोर?
प्रदेश में 243 सीटों में से 49 सीटें तिरहुत प्रमंडल में आती हैं। सीटों की संख्या के हिसाब से यह सबसे बड़ा प्रमंडल है। इस क्षेत्र में 6 जिले आते हैं। इनमें सबसे ज्यादा 12 सीटें पूर्वी चंपारण जिले में है। इसके बाद मुजफ्फरपुर में 11, पश्चिमी चंपारण में नौ, वैशाली और सीतामढ़ी में आठ-आठ और शिवहर जिले में सिर्फ एक सीट आती है। 2025 के चुनाव में इस प्रमंडल में एनडीए को 45 सीट मिली। इसमें सबसे ज्यादा भाजपा को 26 सीटें, जदयू को 13, लोजपा को पांच, एक सीट उपेंद्र कुशवाहा को राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) को मिली। यानी अकेले एनडीए को 45 सीटें मिली हैं। वहीं, महागठबंधन को चार सीटें मिली। 

2020 के चुनाव में भाजपा को तिरहुत में सबसे ज्यादा सीटें मिली थीं। एनडीए ने 33 सीटों के साथ इस प्रमंडल पर प्रभुत्व कायम किया था। महागठबंधन को यहां 16 सीटें मिल पाई थीं। दलवार आंकड़ों की बात करें तो एनडीए में शामिल भाजपा को 25, जदयू को छह और वीआईपी को दो सीट मिली थी। वहीं, महागठबंधन में राजद को 13 और कांग्रेस को दो वहीं एक सीट भाकपा (माले) के खाते में गई थी। 

 


 

43 सीटों वाले पटना प्रमंडल में कैसे रहे नतीजे?
प्रदेश में 243 सीटों में से 43 सीटें पटना प्रमंडल में आती हैं। इस क्षेत्र में कुल छह जिले आते हैं। सबसे ज्यादा 14 विधानसभा सीटें पटना जिले में है। इसी तरह नालंदा, भोजपुर और रोहतास में सात-सात सीटें हैं। सबसे कम चार-चार सीटें बक्सर और कैमूर जिले में हैं। 2025 में पटना प्रमंडल में एनडीए को 37, महागठबंधन को पांच और अन्य को एक सीट मिली है। 

इस प्रमंडल में एनडीए की तरफ से 16 सीटें भाजपा, 16 सीटें जदयू को मिली हैं। वहीं, लोजपा को तीन और रालोमो को दो सीटें मिलीं। महागठबंधन से राजद तीन सीटें और भाकपा-माले को दो सीट मिलीं। वहीं, एक सीट बसपा के पास भी गई है। 

2020 में पटना प्रमंडल के परिणाम की बात करें तो यहां के नतीजे महागठबंधन के पक्ष में रहे थे। पटना प्रमंडल की 29 सीटों पर महगठबंधन की जीत मिली थी। वहीं, एनडीए को 13 सीटों से संतोष करना पड़ा था। एक सीट बसपा के खाते में गई थी। दलवार आंकडों की बात करें तो पटना प्रमंडल की 18 सीटें राजद के खाते में गई थीं। वहीं, छह सीटों पर भाकपा माले और पांच सीट पर कांग्रेस को जीत मिली थी। इसी तरह एनडीए में भाजपा ने आठ, जदयू ने पांच सीट पर जीत दर्ज की थी।


लालू के घर वाला सारण प्रमंडल ने किसका साथ दिया?
सारण प्रमंडल में तीन जिले सारण, सीवान और गोपालगंज आते हैं। प्रदेश में 243 सीटों में से 24 सीटें सारण प्रमंडल में आती हैं। इनमें सबसे ज्यादा 10 विधानसभा सीटें सारण जिले में हैं। वहीं, सीवान में आठ और गोपालगंज जिले में छह सीटें हैं। गोपालगंज वो जिला है जहां से बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव आते हैं।

2020 के विधानसभा चुनाव में राजद को सबसे बड़ी पार्टी बनवाने में सारण की बड़ी भूमिका रही थी। प्रमंडल की 24 में से 15 सीटों पर महागठबंधन को जीत मिली। बाकी नौ सीटें एनडीए को नौ सीट मिली थी। दलवार आंकड़ों का बात करें तो महागठबंधन में शामिल राजद को 11 सीटें और कांग्रेस को एक सीट मिली, वहीं भाकपा माले दो और माकपा को एक सीट जीतने में सफल रही। उधर एनडीए से भाजपा को सात सीटें और जदयू को दो सीटें सारण प्रमंडल से मिली थीं। 

2025 के नतीजे में सारण प्रमंडल में एनडीए को 20 और महागठबंधन को चार सीट मिली है। 

 

30 सीट वाले दरभंगा प्रमंडल किसे मिली बढ़त? 
प्रदेश में 243 सीटों में से 30 सीटें दरभंगा प्रमंडल में आती हैं। इस क्षेत्र में 03 जिले आते हैं। तीनों जिले में 10-10 विधानसभा सीटें हैं। यह मिथिला क्षेत्र का एक हिस्सा है। इसी प्रमंड की एक सीट अलीपुर से लोकगायिका मैथिली ठाकुर को भाजपा ने टिकट दिया है।

2020 के विधानसभा चुनाव में दरभंगा में एनडीए गठबंधन ने जबरदस्त जीत हासिल की। एनडीए को 30 में से 22 सीटों पर जीत मिली थी। महागठबंधन को 8 सीटें मिलीं थीं। दलवार आंकड़ों की बात करें तो दो सीटों पर सफलता मिली थी। एनडीए में शामिल भाजपा को 11 सीटें और जदयू को नौ सीटें मिली थी। वहीं, वीआईपी को दो सीटें मिलीं थी। इस चुनाव में वीआईपी एनडीए का साथ छोड़कर महागठबंधन का हिस्सा बन चुकी है। 2020 के चुनाव में महागठबंधन में राजद को सात सीटें मिलीं थीं। वहीं उसकी सहयोगी दल माकपा को एक सीट पर संतोष करना पड़ा था। कांग्रेस इस इलाके में अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी। 

दरभंगा प्रमंडल में 2025 के नतीजे में एनडीए को 26 और महागठबंधन को चार सीटें मिली है। 


 

भागलपुर प्रमंडल में बरकरार रहा एनडीए का प्रभुत्व
भागलपुर प्रमंडल में कुल दो जिले- भागलपुर और बांका शामिल हैं। इनमें कुल 12 विधानसभा सीटें हैं। इनमें सात सीटें भागलपुर जिले में आती हैं। पांच सीटें बांका जिले का हिस्सा हैं। विधानसभा सीटों के लिहाज से भागलपुर बिहार का सबसे छोटा प्रमंडल है।

2020 के विधानसभा चुनाव में भागलपुर प्रमंडल में एनडीए ने सीधे महागठबंधन को मात दी। एनडीए को नौ और महागठबंधन को तीन सीटों पर जीत मिली। दलवार आंकड़ों की बात करें तो एनडीए में भाजपा को पांच और जदयू को चार सीटें मिलीं थीं। दूसरी तरफ महागठबंधन की राजद को दो और कांग्रेस को एक सीट मिली।

2025 में भागलपुर प्रमंडल को देखें तो यहां एनडीए को 12 सीट मिली है। 

कोसी ने किसकी नैया पार लगाई? 
कोसी प्रमंडल में कुल तीन जिले सहरसा, मधेपुरा और सुपौल आते हैं। यहां कुल 13 विधानसभा सीटें हैं। पांच सीटें सुपौल जिले में, चार सीटें मधेपुरा में और चार सीटें सहरसा में हैं।

कोसी प्रमंडल की बात करें तो 2020 के विधानसभा चुनाव में यहां की 13 में से 10 सीटें एनडीए को मिली थीं। वहीं महागठबंधन ने तीन सीटें हासिल की थी। दलवार आंकड़ों की बात करें तो एनडीए में शामिल जदयू ने आठ सीटें और भाजपा ने दो सीटें जीती थीं। वहीं, महागठबंधन में केवल राजद को तीन सीटें मिली थीं।

2025 में कोसी प्रमंडल में एनडीए को 10 और महागठबंधन को तीन सीट मिलीं। 


 

मुंगेर प्रमंडल में कैसे रहे नतीजे?
मुंगेर में कुल छह जिले- मुंगेर, बेगूसराय, जमुई, खगड़िया, शेखपुरा और लखीसराय हैं। इन छह जिलों में कुल 22 सीटें हैं। सबसे ज्यादा सात सीटें बेगूसराय में हैं। इसके बाद चार-चार सीटें खगड़िया और जमुई में, तीन सीटें मुंगेर में, दो-दो सीटें लखीसराय और शेखपुरा जिले में हैं।

मुंगेर प्रमंडल में 2020 का विधानसभा चुनाव काफी दिलचस्प रहा था। इस प्रखंड में भाजपा, जदयू और राजद तीनों ही प्रमुख दलों को 5-5 सीटें मिली थीं। वहीं, कांग्रेस और भाकपा को दो-दो सीटें मिलीं थीं। वहीं, एक-एक सीट पर लोजपा, हम और निर्दलीय के खाते में गई थी। गठबंधनों की बात करें तो एनडीए ने मुंगेर प्रमंडल की11 सीटें जीती थीं।  दूसरी तरफ महागठबंधन नौ सीटें जीतने में सफल रहा था। जमुई जिले की चकाई सीट से जीतने वाले निर्दलीय सुमित कुमार सिंह ने एनडीए सरकार का समर्थन किया था। वहीं, लोजपा से जीतने वाले राज कुमार सिंह ने भी बाद में जदयू का दामन थाम लिया था। 

मुंगेर प्रमंडल में एनडीए को एनडीए को 19 और महागठबंधन को तीन सीटें मिली है। 


पूर्णिया प्रमंडल में किसका दिखेगा प्रभाव?
बिहार के पूर्णिया प्रमंडल में चार जिले- अररिया, कटिहार, किशनगंज और पूर्णिया जिले आते हैं। इनमें कुल 24 सीटें हैं। इनमें सबसे ज्यादा सात-सात सीटें कटिहार और पूर्णिया जिले में आती हैं। अररिया जिले में छह तो किशनगंज में चार सीटें हैं।

2020 के विधानसभा चुनाव में पूर्णिया प्रमंडल की 12 सीटों पर एनडीए को जीत मिली थी। वहीं, महागठबंधन को सात सीट से संतोष करना पड़ा था। एआईएमआईएम ने इस इलाके में बड़ी सेंध लगाई और पांच सीटों पर जीत दर्ज की। दलवार आंकड़ों की बात करें को भाजपा को आठ और जदयू को चार सीटें मिली। महागठबंधन में कांग्रेस को पांच, राजद और भाकपा (माले) को एक-एक मिली थी। 2025 में यहां एनडीए को 14 महागठबंधन को पांच और एआईएमआईएम पांच सीटें मिलीं। 


मगध प्रमंडल में क्या बरकरार रहेगा महागठबंधन का दबदबा?
मगध प्रमंडल में पांच जिले आते हैं। इनमें अरवल, जहानाबाद, औरंगाबाद, गया और नवादा शामिल हैं। इन पांच जिलों में बिहार विधानसभा की कुल 26 सीटें हैं। मगध में सबसे ज्यादा 10 सीटें गया जिले में हैं। इसके बाद औरंगाबाद में छह, नवादा में पांच, जहानाबाद में तीन और अरवल में दो सीटें हैं।

2020 के चुनाव में भले ही महागठबंधन को हार मिली थी। लेकिन मगध प्रमंडल में राजद ने अपना दबदबा बरकरार रखा था। इस प्रमंडल में महागठबंधन के खाते में 20 सीटें गईं थीं। वहीं, एनडीए को छह सीटों से संतोष करना पड़ा था। दलवार आंकड़ों की बात करें तो महागठबंधन में शामिल राजद को 15 सीटें, कांग्रेस को तीन और भाकपा (माले) को दो सीटें मिली थीं। एनडीए में भाजपा को महज तीन सीटें हासिल हुईं। जबकि उसकी साथी जीतनराम मांझी की हिंदुस्तानी आवामी मोर्चा (हम) यहां तीन सीटें पाने में सफल रही। नीतीश कुमार की पार्टी जदयू को मगध प्रमंड में एक भी सीट नहीं मिली थी।

दूसरी तरफ 2025 के चुनाव में मगध प्रमंडल में एनडीए को 20 और महागठबंधन को छह सीटें मिलीं। 


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कैसे थे 2020 में बिहार के नतीजे? 
2020 के विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला एनडीए और महागठबंधन के बीच में था। 243 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए ने 125 सीटें जीतीं थीं। इनमें सबसे ज्यादा 74 सीटें भाजपा के खाते में गई थीं। जदयू को 43, वीआईपी और हम को 4-4 सीट पर सफलता मिली थी।  राज्य की 110 सीटें महागठबंधन के खाते में गई थीं। 75 सीटें जीतकर राजद राज्य की सबसे बड़ा दल बना था। इसके साथ ही कांग्रेस को 19, वामदलों को 16 सीट पर जीत मिली थी। इनमें 12 सीटें भाकपा (माले) और दो-दो सीटें भाकपा और माकपा के खाते में गईं थी। अन्य दलों की बात करें तो एआईएमआईएम ने पांच, बसपा, लोजपा और निर्दलीय को एक-एक सीट पर जीत मिली थी। 

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