भाजपा का झंडा (सांकेतिक तस्वीर)
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बिहार में भाजपा अपने दिग्गज नेताओं को विधानसभा चुनाव में उतार सकती है। लोकसभा चुनाव में हारे हुए कुछ चेहरों को भी बिहार विधानसभा चुनाव में उतारा जा सकता है। पार्टी का यह फॉर्मूला मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में हिट रहा था। अब बिहार चुनाव में भी इस फॉर्मूले को आजमाने की तैयारी है। पार्टी इन दिग्गज नेताओं को उनके प्रभाव वाले क्षेत्रों से उतारकर विपक्षी दलों के समीकरण को उलट-पुलट करना चाहती है।
इसके पहले मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में पार्टी ने पूर्व केंद्रीय मंत्रियों नरेंद्र सिंह तोमर, प्रहलाद सिंह पटेल और फग्गन सिंह कुलस्ते को चुनाव मैदान में उतारा था। इसके अलावा कैलाश विजयवर्गीय और कुछ अन्य सांसदों को भी चुनाव मैदान में उतार दिया गया था। इसी तरह राजस्थान में पूर्व केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर, दिया कुमारी, बालक नाथ और किरोड़ी लाल मीणा को चुनाव मैदान में उतारा गया था।
इनमें से ज्यादातर दिग्गज बड़ी जीत हासिल करने में कामयाब हुए थे। इससे पार्टी और कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ा था। पार्टी अब इसी फॉर्मूले को बिहार में आजमाने की तैयारी कर रही है। हालांकि, वर्तमान सांसदों को चुनाव में उतारे जाने की कोई संभावना नहीं है।
बिहार में पिछले लोकसभा चुनाव में रामकृपाल यादव, आरके सिंह, सुशील कुमार सिंह, मिथिलेश तिवारी और शिवेश कुमार जैसे नेताओं को हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन क्षेत्र और स्थानीय जातीय समीकरणों में फिट बैठने के कारण पार्टी इन नेताओं को विधानसभा चुनाव मैदान में उतार सकती है। इनके अलावा पार्टी संगठन में प्रभावी नेताओं को भी चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है।
भाजपा सूत्रों के अनुसार, पार्टी बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर बहुत गंभीर है। हर सीट पर सामाजिक-जातीय समीकरणों का अध्ययन कर इस पर जिताऊ उम्मीदवार दिए जाने की तैयारी की जा रही है। पिछले दिनों अमित शाह की पटना यात्रा के दौरान कोर कमेटी की बैठक के दौरान इस पर चर्चा हुई थी। जानकारी के अनुसार, एनडीए के सहयोगी दलों से भी बातचीत करके उनकी सीटों पर भी केवल जिताऊ उम्मीदवारों को ही टिकट दिए जाने की योजना है। पार्टी सहयोगी दलों के साथ बेहतर समन्वय करते हुए कुछ सीटों की अदला-बदली पर भी विचार कर रही है।