भाजपा के बिहार प्रमुख सम्राट चौधरी के नेतृत्व में चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल शाह से मिला। इनमें सांसद राम कृपाल यादव, गोपाल जी ठाकुर और अशोक कुमार यादव शामिल थे। चौधरी ने शाह से मुलाकात के बाद संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'बिहार में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से विफल है, चाहे वह मुहर्रम के दौरान राज्य के विभिन्न जिलों में हुई झड़पों की घटनाएं हों या राज्य में दलितों के खिलाफ अत्याचार की घटनाएं हों।'
उन्होंने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार सरकार तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है और राज्य में अपराधियों को संरक्षण दे रही है। चौधरी ने कहा, 'हमने इस संबंध में आज गृहमंत्री शाह से मुलाकात की और उनसे राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगने का अनुरोध किया।'
शनिवार को बिहार के कैमूर जिले के भभुआ में मुहर्रम के दिन दो समुदायों के सदस्यों के बीच झड़प हो गई, जिसके बाद जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को कमान संभालनी पड़ी। बिहार भाजपा प्रमुख ने आरोप लगाया, 'भागलापुर, कैमूर, गया, दरभंगा, मोतिहारी और कटिहार में (दो समुदायों के बीच) संघर्ष की स्थिति पैदा हो गई क्योंकि सरकार तुष्टिकरण में लिप्त थी और कोई पुलिस बल तैनात नहीं किया गया था।'
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बिहार सरकार से रिपोर्ट सौंपने को कहा
वहीं, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आज बिहार सरकार से दरभंगा जिले में अनुसूचित जाति समुदाय के एक सदस्य के शव के कथित अपमान की जांच करने और इस पर एक रिपोर्ट सौंपने को कहा। बिहार के मुख्य सचिव आमिर सुबहानी को लिखे पत्र में केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय को दरभंगा जिले में अनुसूचित जाति समुदाय के खिलाफ कथित घोर दुर्व्यवहार के बारे में सूचना मिली है।
भल्ला ने कहा कि यह पता चला है कि दो जुलाई की रात को एक अनुसूचित जाति के व्यक्ति श्रीकांत पासवान के अंतिम संस्कार के दौरान, उनके शव को अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों द्वारा श्मशान घाट से बाहर निकाला गया, पीटा गया और बुरी तरह से अपवित्र किया गया। पत्र में कहा गया है कि आरोप यह है कि पैतृक श्मशान भूमि पासवान समुदाय की है, जहां वे हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार कर रहे हैं, और उन्हें इससे वंचित कर दिया गया है। गृह सचिव ने कहा कि कथित बेअदबी के बाद हुए हंगामे के दौरान पासवान (एससी) समुदाय के कुछ घरों को भी नुकसान पहुंचाया गया।
भल्ला ने अपने पत्र में कहा कि वहां पहुंचे पुलिसकर्मियों को भी चोट लगी है और उनके वाहनों को नुकसान पहुंचा है और यह पता चला है कि क्षेत्र में अनुसूचित जाति समुदाय को अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा मजबूर किया जा रहा है और धमकी दी जा रही है, और वे पलायन पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने पत्र में कहा, 'चूंकि यह संभवत: अनुसूचित जाति के खिलाफ अपराध का मामला हो सकता है और अंतिम संस्कार करने का संवेदनशील मुद्दा हो सकता है, जिससे क्षेत्र में कानून और व्यवस्था की समस्या पैदा हो सकती है, इसलिए मैं आपसे जल्द से जल्द विस्तृत जांच करने और इस मंत्रालय को एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का अनुरोध करता हूं।'