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Seat ka Samikaran: पिछले तीन में दो चुनाव रहे जदयू के नाम, ऐसा है वाल्मीकि नगर विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास

Mon, 11 Aug 2025 07:32 AM IST
संध्या इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला

सार

बिहार की विधानसभा सीटों से जुड़ी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज वाल्मीकि नगर विधानसभा सीट की बात करेंगे। इस सीट पर 2020 में जदयू के धीरेंद्र प्रताप सिंह ने दूसरी बार जीत दर्ज की थी। 
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वाल्मीकि नगर विधानसभा सीट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार विधानसभा चुनाव चंद महीने दूर हैं। सियासी बिसात पर शह मात का खेल भी शुरू हो चुका है। इस चुनावी साल में अमर उजाला अलग-अलग सीरीज के जरिए बिहार की सियासत के बारे में बता रहा है। इसी से जुड़ी ‘सीट का समीकरण’ सीरीज में आज हम वालमीकि नगर विधानसभा सीट की बात करेंगे।

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पहले जानते है वाल्मीकि नगर सीट के बारे में 
बिहार के 38 जिलों में से एक पश्चिमी चंपारण जिला भी है। वाल्मीकि नगर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र वाल्मीकि नगर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है। यह सीट वाल्मीकि नगर नाम से 2008 में अस्तित्व में आई थी। इससे पहले सीट धनहा के नाम से जानी जाती थी। वाल्मीकि नगर लोकसभा में कुल छह विधानसभा सीटें आती हैं। इसमें वाल्मिकी नगर, रामनगर (एससी), नरकटियागंज, बगहा, लौरिया, सिकटा शामिल है। धनहा सीट पर सबसे पहले चुनाव 1952 में हुए थे।

1952 में हुए सबसे पहले चुनाव 
धनहा सीट पर सबसे पहले 1952 में चुनाव हुए थे। इस चुनाव में यहां के कांग्रेस के सुदामा मिश्रा  ने निर्दलीय उम्मीदवार हरदेव लाल को 3,186 वोट से हरा दिया था।  

1957: जोगेंद्र प्रसाद को मिली जीत  
1957 के चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार जोगेंद्र प्रसाद को जीत मिली थी। निर्दलीय उम्मीदवार जोगेंद्र प्रसाद ने तत्कालीन विधायक और कांग्रेस उम्मीदवार सुदामा मिश्रा को 5,930 वोट से हरा दिया था।


 

1962 में कांग्रेस फिर जीती
1962 में एक बार फिर धनहा सीट से कांग्रेस को जीत मिली। कांग्रेस के रंगलाल प्रसाद ने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के योगेन्द्र प्रसाद श्रीवास्तव महज 193 वोट से हरा दिया था।

1967: पीएसपी को मिली जीत
1967 के विधानसभा चुनाव में मुकाबला कांग्रेस और पीएसपी के बीच था। एक बार फिर रंगलाल और योगेन्द्र प्रसाद आमने-सामने थे।  इस बार रंगलाल प्रसाद को हार का सामना करना पड़ा। जीत पीएसपी के योगेन्द्र प्रसाद को मिली। योगेन्द्र प्रसाद ने कांग्रेस के रांगलाल को 14,072 वोट से हरा दिया था। 
1969 में बिहार में एक बार फिर विधानसभा के चुनाव हुए इसमें फिर से धनहा सीट पर पीएसपी के योगेन्द्र प्रसाद को ही जीत मिली। उन्होंने कांग्रेस के मार्कंडेश्वर सिंह को 2,162 वोट से हरा दिया था।

हरदेव प्रसाद को मिली लगातार तीन बार जीत 
1972 से 1980 तक कांग्रेस के हरदेव प्रसाद को लगातार तीन बार धनहा सीट पर जीत मिली। 1972 में उन्होंने सोशलिस्ट पार्टी की तारा देवी को 3,836 वोट से हराया। 1977 में जनता पार्टी के योगेन्द्र पीडी. श्रीवास्तव को 124 वोट से हराया। हालांकि यह जीत उतनी बड़ी नहीं थी। 1980 में चरण सिंह की जनता पार्टी सेक्युलर के टिकट पर जीते रंग लाल प्रसाद को 6717 वोट से हरा दिया था।

1985: लोकदल को मिली जीत 
1985 में धनहा सीट पर कांग्रेस को जीत नहीं मिल पाई। इस बार लोकदल के नारदेश्वर प्रसाद कुशवाहा ने निर्दलीय उम्मीदवार अरुण कुमार तिवारी को 250 वोट से हरा दिया। 

1990: कांग्रेस को मिली जीत
1990 में एक बार फिर कांग्रेस को जीत मिली। कांग्रेस के श्याम एन प्रसाद ने लोकदल (बी) को सतन यादव को 5424 वोट से हरा दिया था।

1995 में समता पार्टी को जीत
1995 में में समता पार्टी के विष्णु प्रसाद कुशवाह ने निर्दलीय उम्मीदवार सतन यादव को 3,106 वोट से हरा दिया था। 

2000 में बसपा को मिली जीत
2000 में धनहा सीट पर बसपा को जीत मिली। बसपा के राजेश सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार अरुण तिवारी को 3,747 वोट से हरा दिया था।



 


2005: राजद को जीत

2005 में बिहार में दो बार चुनाव हुए थे। दोनों ही चुनावों में राजद के राजेश सिंह को ही जीत मिली। पहला चुनाव फरवरी 2005 में हुआ था, उसमें राजद के राजेश सिंह ने समाजवादी पार्टी के रामाधार यादव को 6,102 वोट से हरा दिया। 
2005 अक्तूबर में दूसरी बार चुनाव हुए थे। इसमें राजद के राजेश सिंह ने समाजवादी पार्टी के रामाधार यादव को 1,464 वोट से हरा दिया था। 

2010: बदला सीट का नाम
2008 में हुए परिसीमन के बाद धनहा सीट का नाम बदलकर वाल्मीकि नगर सीट कर दिया गया। 2010 में हुए चुनाव में फिर एक बार राजेश सिंह को ही जीत मिली। लेकिन इस बार वह जदयू के टिकट पर जीते। उन्होंने राजद के मुकेश कुमार कुशवाहा को 14,671 वोट से हरा दिया।

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2015: धीरेंद्र प्रताप सिंह जीते

2015 में राजेश सिंह को हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार धीरेंद्र प्रताप सिंह को जीत मिली। उन्होंने कांग्रेस के इरशाद हुसैन को 33,580 वोट से हरा दिया। 
2020 में फिर धीरेंद्र प्रताप सिंह को जीत मिली। इस सीट पर यह उनकी दूसरी जीत थी। इस बार उन्हें जदयू का टिकट मिला था। उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार और अलग-अलग पार्टी से सीट पर विधायक रहे राजेश सिंह को 21,585 वोट से हरा दिया।

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