बिहार की विधानसभा सीटों से जुड़ी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज निर्मली विधानसभा सीट की बात करेंगे। इस सीट पर 2020 में जदयू के अनिरुद्ध प्रसाद यादव को जीत मिली थी।
बिहार में विधानसभा चुनाव का एलान हो गया है। इस बार के चुनाव में 7,41,92,357 मतदाता पंजीकृत हैं। 2020 में यह आकड़ा 7,36,47,660 था। यानी, 2020 के मुकाबले इस बार चुनाव में 5,44,697 मतदाताओं का इजाफा हुआ है। हालांकि, एसआईआर के बाद राज्य में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या में 47,77,487 कमी आई है। ये मतदाता नई सरकार को चुनेंगे जो अगले महीने सत्ता में आ जाएगी। इस सियासी हलचल के बीच अमर उजाला की खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज निर्मली विधानसभा सीट की बात करेंगे।
कब है बिहार में चुनाव
243 विधानसभा सीटों के लिए दो चरण में- 6 नवंबर और 11 नवंबर को मतदान होगा। 14 नवंबर को नतीजे आएंगे। पहले चरण में 6 नवंबर को 121 सीटों पर वोटिंग होगी। वहीं दूसरे चरण में 11 नवंबर को 122 सीटों पर वोटिंग होगी। इस बार राज्य में कुल 7.43 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इनमें लगभग 14 लाख नए मतदाता शामिल हैं, जो पहली बार वोट डालेंगे।
पहले चरण में मधेपुरा, सहरसा, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, सिवान, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, खगड़िया, मुंगेर, लखीसराय, शेखपुरा, नालंदा, पटना, भोजपुर, बक्सर जिलों में चुनाव होगा।
दूसरे चरण में पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर, बांका, कैमूर, रोहतास, अरवल, जहानाबाद, औरंगाबाद, गया, नवादा, जमुई जिलों में चुनाव होगा।
अब जानते हैं निर्मली सीट के बारे में
बिहार के 38 जिलों में से एक सुपौल जिला भी है। जिले में कुल 5 विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें निर्मली, पिपरा, सुपौल, त्रिवेणीगंज (एससी), छातापुर विधानसभा सीटें शामिल हैं। निर्मली विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र सुपौल लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है। सुपौल लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में कुल छह विधानसभा सीटें आती है जिसमें पांच सुपौल और एक मधेपुरा जिले का हिस्सा है। इसमें निर्मली, पिपरा, सुपौल, त्रिवेणीगंज (एससी), छातापुर सुपौल और सिंहेश्वर (एससी) मधेपुरा जिले का हिस्सा है। इस सीट पर 1952 में पहली बार चुनाव हुए थे। लेकिन पहले चुनाव के बाद सीट को निष्क्रिय कर दिया गया था। इसके बाद 2008 में परिसीमन के बाद वापस यह सीट अस्तित्व में आई।
1952 में कांग्रेस को मिली जीत
जब यहां पहली बार चुनाव हुए थे, तब सीट पर कांग्रेस को जीत मिली थी। कांग्रेस के कामता प्रसाद गुप्ता ने सोशलिस्ट पार्टी के बिनायक प्रसाद यादव को 9187 वोट से हरा दिया था। कांग्रेस के कामता प्रसाद गुप्ता को 13773 और सोशलिस्ट पार्टी के बिनायक प्रसाद यादव को 4586 वोट मिले थे।
पहले चुनाव के बाद यह सीट निष्क्रिय कर दी गई थी। इसके बाद 2008 में परिसीमन के बाद यह सीट वापस अस्तित्व में आई।
2010 में जदयू के अनिरुद्ध प्रसाद यादव को जीत
2010 में इस सीट पर हुए चुनाव में जदयू को जीत मिली थी। जदयू के अनिरुद्ध प्रसाद यादव ने कांग्रेस के विजय कुमार गुप्ता को 46010 वोट से हरा दिया था। अनिरुद्ध प्रसाद यादव को 70150 और विजय कुमार गुप्ता को 24140 वोट मिले थे।
2015 में एक बार फिर जदयू के अनिरुद्ध प्रसाद यादव को जीत मिली। जदयू के अनिरुद्ध प्रसाद यादव ने भाजपा के राम कुमार राय को 23951 वोट से हरा दिया था। जदयू उम्मीदवार को 79600 और भाजपा उम्मीदवार को 55649 वोट मिले थे।
2020 में अनिरुद्ध प्रसाद यादव ने जीत की हैट्रिक लगाई। जदयू के अनिरुद्ध प्रसाद यादव ने राजद के यदुवंश कुमार यादव को 43922 वोट से हरा दिया था। जदयू उम्मीदवार को 92439 और राजद उम्मीदवार को 48517 वोट मिले थे।