बिहार में विधानसभा चुनाव का एलान हो गया है। इस बार के चुनाव में 7,41,92,357 मतदाता पंजीकृत हैं। 2020 में यह आकड़ा 7,36,47,660 था। यानी, 2020 के मुकाबले इस बार चुनाव में 5,44,697 मतदाताओं का इजाफा हुआ है। हालांकि, एसआईआर के बाद राज्य में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या में 47,77,487 कमी आई है। ये मतदाता नई सरकार को चुनेंगे जो अगले महीने सत्ता में आ जाएगी। इस सियासी हलचल के बीच अमर उजाला की खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज मधुबनी विधानसभा सीट की बात करेंगे।
पहले जानते है मधुबनी सीट के बारे में
बिहार के 38 जिलों में से एक मधुबनी जिला भी है। जिले में कुल 10 विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें हरलाखी, बेनीपट्टी, खजौली, बाबूबरही, बिस्फी, मधुबनी, राजनगर (एससी), झंझारपुर, फुलपरास, लौकहा विधानसभा सीटें शामिल हैं। मधुबनी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र मधुबनी लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है। मधुबनी लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में कुल छह विधानसभा सीटें आती हैं, जिसमें हरलाखी, बेनीपट्टी, बिस्फी, मधुबनी यह चार मधुबनी जिले, वहीं केवटी और जाले दरभंगा जिले का हिस्सा है। मधुबनी सीट पर सबसे पहले चुनाव 1952 में हुए थे।
1952 में पहली बार चुनाव
1952 में हुए राज्य के पहले विधानसभा चुनाव में इस सीट दो विधायक चुने गए। इनमें कांग्रेस के हरि नाथ मिश्रा और निर्दलीय रामकृष्ण महतो शामिल थे।
1957 में दो सीटों में बटी
इस चुनाव में यह सीट मधुबनी पूर्व और पश्चिम में बंट चुकी थी। मधुबनी पूर्व सीट पर 1957 में कांग्रेस के अर्जुन प्रसाद सिंह ने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के चक्रधर झा को 648 वोट से हरा दिया था।
मधुबनी पश्चिम सीट की बात करें तो यहां 1957 में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के रमाकांत झा ने कांग्रेस के इज़हारुल हक़ को 4446 वोट से हरा दिया था।
1962 में दोनों सीटों पर अलग नतीजे
इस चुनाव में मधुपबनी पूर्व सीट की बात करें तो यहां प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के सूरज नारायण सिंह ने कांग्रेस के अर्जुन प्रसाद सिंह को 2522 वोट से हरा दिया था।
मधबनी पश्चिम सीट की बात करें यहां कांग्रेस के सफीकुल्लाह अंसारी को जीत मिली थी। उन्होनें प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के दिगंबर ठाकुर को 8163 वोट से हरा दिया था।
1967 में कांग्रेस को मिली जीत
1967 में पूर्व पश्चिम खत्म करके केवल मधुबनी विधानसभा सीट बन गई थी। इस सीट पर कांग्रेस के एस. अंसारी ने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के एस.एन. सिंह को 573 वोट से हरा दिया था।
1969 में पीएसपी को जीत
इस बार के चुनाव में पिछली बार हारे प्रसपा के सूर्य नारायण सिंह को जीत मिली। उन्होंने कांग्रेस के शफीकउल्लाह अंसारी को 21841 वोट से हरा दिया था।
1972 में भी सीट पर सूर्य नारायण सिंह को ही जीत मिली थी। संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे सूर्य नारायण सिंह ने कांग्रेस के लोकेश नाथ झा को 23197 वोट से हरा दिया था।
जनता पार्टी को मिली जीत
1977 के चुनाव में मधुबनी सीट पर जनता पार्टी के दिगंबर ठाकुर को जीत मिली थी। उन्होंने कांग्रेस के लोकेश नाथ झा को 12007 वोट से हरा दिया था।
1980: राज कुमार महासेठ को मिली जीत
1980 में जनता पार्टी सेक्युलर के राज कुमार महासेठ ने कांग्रेस (आई) के पद्मा चौबे को 2827 वोट से हरा दिया था।
1985 में कांग्रेस को जीत
इस चुनाव में पिछली बार के नतीजे बदल गए थे। कांग्रेस के पद्मा चौबे ने जनता पार्टी के राज कुमार महासेठ को 5791 वोट से हरा दिया था।
1990 में राज कुमार महासेठ को फिर मिली जीत
इस चुनाव में एक बार फिर राज कुमार महासेठ की वापसी हुई। निर्दलीय चुनाव लड़ रहे राज कुमार महासेठ ने कांग्रेस के प्रेम चंद्र मिसिर को 9889 वोट से हरा दिया था।
1995 में फिर राज कुमार महासेठ को जीत मिली। लेकिन इस बार वह जनता दल से चुनाव लड़ रहे थे। उन्होंने कांग्रेस के प्रेम चंद्र मिश्रा को 26090 वोट से हरा दिया था।
पहली बार भाजपा को जीत
2000 के चुनाव में पहली बार भाजपा को मधुबनी सीट पर जीत मिली। भाजपा के रामदेव महतो ने राजद के टिकट पर चुनाव लड़ रहे राजकुमार महासेठ को 18076 वोट से हरा दिया था।
2005 में भाजपा को जीत
2005 में बिहार में दो बार चुनाव हुए थे। पहले चुनाव फरवरी में हुए थे इसमें भाजपा के राम देव महतो को ही जीत मिली थी। उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ रहे राज कुमार महासेठ को 8683 वोट से हरा दिया था।
2005 में दूसरी बार चुनाव अक्तूबर में हुए थे। इस चुनाव में नतीजे भी पिछले चुनाव जैसे ही थे। भाजपा के राम देव महतो ने राजद के असलम को 11952 वोट से हरा दिया था।
2010 में एक बार फिर भाजपा के राम देव महतो को जीत मिली थी। उन्होंने राजद के नैयर आज़म को 588 वोट से हरा दिया था। मधुबनी सीट पर ये राम देव महतो की लगातार चौथी जीत थी।
2015: राजद को मिली जीत
इस चुनाव में लगातार जीत दर्ज कर रही भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था। राजद के समीर कुमार महासेठ ने भाजपा के रामदेव महतो को 7307 वोट से हरा दिया था। समीर महासेठ राज कुमार महासेठ के बेटे हैं जो इस सीट से तीन बार विधायक रह चुके थे।
2020 में भी राजद के समीर कुमार महासेठ को जीत मिली। उन्होंने वीएसआईपी के सुमन कुमार महासेठ को 6,814 वोट से हरा दिया था।