बिहार के 38 जिलों में से एक जिला नवादा भी है। नवादा जिला दो अनुमंडल और 14 ब्लॉक में बंटा है। जिले में पांच विधानसभा सीटें हैं। इनमें रजौली, हिसुआ, नवादा,गोविंदपुर, वारिसलीगंज शामिल हैं। आज सीट का समीकरण में हिसुआ सीट की बात करेंगे। यह सीट 1957 में अस्तित्व में आई।
1957: बीस साल तक कांग्रेस को मिली जीत
- हिसुआ सीट से लगातार बीस साल तक कांग्रेस को जीत मिली। हालांकि चेहरे बदलते रहे। 1957 के चुनाव में कांग्रेस की राज कुमारी देवी को जीत मिली। इस चुनाव में राज कुमारी ने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार बिशेश्वर महतो को 3,664 वोट से मात दी।
- इसके साथ ही राज कुमारी देवी ने 1962 में जीत दर्ज की। इस चुनाव में उन्होंने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के टेकनारायण प्रसाद यादव को 9,405 वोट से हराया। राजकुमारी को कुल 20,190 वोट मिले। वहीं, टेकनारायण को 10,785 वोट मिले।
- 1967 में हिसुआ सीट से कांग्रेस के शत्रुघ्न शरण सिंह को जीत मिली। शरण सिंह ने भाकपा के एल.एन सिंह को 24,687 वोट से हराया। शरण सिंह को कुल 38,607 वोट मिले। वहीं, एल.एन सिंह को 13,920 वोट मिले।
- 1969 के चुनाव में शत्रुघ्न शरण सिंह को 16,553 वोट से जीत मिली। इस चुनाव में भाकपा के लाल नारायण सिंह दूसरे नंबर पर रहे।
- 1972 के चुनाव में शत्रुघ्न शरण सिंह ने कांग्रेस (ओ) के मथुरा प्रसाद सिंह को 2044 वोट से हराया। इस चुनाव में शत्रुघ्न शरण को कुल 21,782 वोट मिले। वहीं, मथुरा प्रसाद को 19,728 वोट मिले।
1977: जनता पार्टी को मिली जीत
आपातकाल के बाद से हिसुआ विधानसभा सीट में कांग्रेस के जीत का सिलसिला टूटा। इस चुनाव में जनता पार्टी के बाबू लाल सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार आदित्य सिंह को मात्र 243 वोट से हराया। बाबू लाल को 17,545 वोट मिले। वहीं, आदित्य सिंह को 17,302 वोट मिले।
1980: आदित्य सिंह का गढ़ बना हिसुआ
- 1980 के चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार आदित्य सिंह को जीत मिली। आदित्य लगातार फरवरी 2005 तक विधायक रहे। हालांकि बीच में वह कांग्रेस पार्टी के टिकट पर भी चुनाव जीते। 1980 में आदित्य सिंह ने 7,949 वोट से जीत हासिल की। इस चुनाव में भाकपा के लाल नारायण सिंह दूसरे नंबर पर रहे।
- 1985 में आदित्य सिंह ने भाकपा के लाल नारायण सिंह को 7,750 वोट से मात दी। इस चुनाव में आदित्य सिंह को 29,691 वोट मिले। वहीं, लाल नारायण सिंह को 21,941 वोट मिले।
- 1990 में आदित्य सिंह ने कांग्रेस के टिकट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इस चुनाव में उन्होंने भकापा के लाल नारायण सिंह को 55,721 वोट से हराया।आदित्य सिंह को कुल 71,992 वोट मिले। वहीं, लाल नारायण सिंह को मात्र 16,271 वोट से संतोष करना पड़ा।
- 1995 में कांग्रेस के आदित्य सिंह ने भकापा के लाल नारायण को 12,524 वोट से शिकस्त दी। इस चुनाव में आदित्य सिंह को 36,034 वोट मिले। वहीं, लाल नारायण को 23,510 वोट मिले।
- 2000 के चुनाव में आदित्य सिंंह ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और 3920 वोट से जीत हासिल की। भाकपा के गणेश शंकर विद्यार्थी दूसरे नंबर पर रहे । आदित्य सिंह को 27,497 और गणेश शंकर विद्यार्थी को 23,577 वोट मिले।
- फरवरी 2005 में आदित्य सिंह ने दोबार कांग्रेस से जीत दर्ज की। इस चुनाव में उन्होंने भाकपा के गणेश शंकर विद्यार्थी को 17,284 वोट से मात दी।
अक्तूबर 2005: भाजपा का खाता खुला
- 25 साल तक हिसुआ सीट से विधायक रहे आदित्य सिंह को 2005 अक्तूबर में हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में भाजपा के अनिल सिंह को 16,467 वोट से जीत मिली। अनिल सिंह को कुल 43,276 वोट मिले। वहीं, आदित्य सिंह को 26,809 वोट मिले।
- 2010 में भाजपा के अनिल सिंह को ने 3,978 वोट से जीत हासिल की। वहीं, लोजपा के अनिल मेहता दूसरे नंबर पर रहे। अनिल सिंह को 43,110 वोट मिले। वहीं, अनिल मेहता को 39,132 वोट मिले।
- 2015 में हिसुआ सीट से भाजपा के अनिल सिंह ने हैट्रिक लगाई। इस चुनाव में उन्होंने जदयू के कौशल यादव को 12,239 वोट से हराया। अनिल सिंह को कुल 82,493 वोट मिले। वहीं, कौशल यादव को 70,254 वोट मिले।
2020 :15 साल बाद कांग्रेस की वापसी
हिसुआ सीट से 2020 में कांग्रेस ने वापसी की। कांग्रेस की नीतू कुमारी ने 17,091 वोट से जीच दर्ज की। वहीं, तीन बार के विधायक अनिल सिंह दूसरे नंबर पर रहे।