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Seat Ka Samikaran: रघुवंश प्रसाद सिंह का गढ़ रहा है बेलसंड, ऐसा है इस विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास

Thu, 25 Sep 2025 05:29 AM IST
संध्या इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला

सार

बिहार की विधानसभा सीटों से जुड़ी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज बेलसंड विधानसभा सीट की बात करेंगे। इस सीट पर 2020 में राजद के संजय कुमार गुप्ता को जीत मिली थी। 

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बिहार चुुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार विधानसभा चुनावों में तारीखों के इंतजार से ज्यादा इंतजार सीट बंटवारे को लेकर हो रहा है। सियासी खींचतान के बीच अमर उजाला की बिहार की विधानसभा सीटों से जुड़ी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज बेलसंड विधानसभा सीट की बात।

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पहले जानते है बेलसंड सीट के बारे में 

बिहार के 38 जिलों में से एक सीतामढ़ी जिला भी है। जिले में कुल 8 विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें रीगा, बथनाहा (एससी), परिहार, सुरसंड, बाजपट्टी, सीतामढ़ी, रुन्नीसैदपुर, बेलसंड विधानसभा सीटें शामिल हैं। बेलसंड विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र शिवहर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है। शिवहर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में कुल छह विधानसभा सीटें आती हैं, जिसमें तीन पूर्वी चंपारण, एक शिवहर और दो सीतामढ़ी जिले का हिस्सा हैं। इसमें मधुबन, चिरैया और ढाका पूर्वी चंपारण, शिवहर विधानसभा सीट शिवहर और रीगा और बेलसंड सीतामढ़ी जिले का हिस्सा हैं। बेलसंड सीट पर 1952 में पहली बार चुनाव हुए थे। 

1952 में शिवहर और बेलसंड एक ही सीट 

1952 में बिहार में शिवहर और बेलसंड दो सीटे एक ही विधानसभा की हिस्सा था। सीट पर दो विधायक चुने जाते थे। शिवहर सीट पर कांग्रेस के ठाकुर गिरजानंदन सिंह और बेलसंड सीट पर कांग्रेस के चुल्हाई दुसाध को जीत मिली थी। दूसरे स्थान पर सोशलिस्ट पार्टी के रामानन्दन सिंह और बिलास महरा थे। 

1957 में बेलसंड और शिवहर अलग-अलग सीट बनी

 1957 के चुनाव में सीट पर प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के रामानंद सिंह को जीत मिली थी। निर्दलीय उम्मीदवार यमुना प्रसाद सिंह को 3927 वोट से हरा दिया था। 

1962 में फिर रामानंद को जीत 

इस चुनाव में एक बार फिर प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के रामानंद सिंह को जीत मिली थी। उन्होंने स्वतंत्र पार्टी के जमुना प्रसाद सिंह को 2908 वोट से हरा दिया था। 

1967 में कांग्रेस को जीत 

कांग्रेस को बेलसंड सीट पर 1967 में जीत मिली। कांग्रेस के सी.पी. सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार आर. सिंह को 13859 वोट से हरा दिया था। 

1969 में फिर रामानंद सिंह को जीत 

प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के रामानंद सिंह को एक बार फिर 1969 में जीत मिली। इससे पहले वह दो बार यहां से जीत चुके थे। रामानंद सिंह ने कांग्रेस के चंद्रेश्वर एन. पी. डी. सिंह को 2917 वोट से हरा दिया था। 

1972 में कांग्रेस को जीत 

इस चुनाव में कांग्रेस के राम सूरत सिंह ने तत्कालीन विधायक और सोशलिस्ट पार्टी के रामानंद सिंह को 12130 वोट से हरा दिया था। राम सूरत सिंह को 30501 और रामानंद सिंह को 18371 वोट मिले थे। 

1977 से रघुवंश प्रसाद सिंह की लगातार तीन जीत

इस चुनाव में जनता पार्टी के रघुवंश प्रसाद सिंह को जीत मिली थी। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार रामचन्द्र राय को 6976 वोट से हरा दिया था। 

1980 के चुनाव में जनता पार्टी के रघुवंश प्रसाद सिंह ने कांग्रेस (आई) के रामानंद सिंह को 1563 वोट से हरा दिया था। 

1985 के चुनाव में एक बार फिर जीत दर्ज करके रघुवंश प्रसाद ने हैट्रिक लगा दी। लेकिन इस बार उन्होंने लोकदल से चुनाव लड़ रहा था। लोकदल के रघुवंश प्रसाद सिंह ने कांग्रेस के दिग्विजय प्रताप सिंह को 1181 वोट से हरा दिया था। 

रघुवंश प्रसाद राजद के एक कद्दावर नेता थे। उन्होंने 32 साल तक लालू प्रसाद यादव के साथ काम किया। 2020 मेंं कोविड के दौरान उनका निधन हो गया। जाते-जाते वह राजद से इस्तीफा दे गए थे। उन्होंने लालू को एक चुट्ठी लिखी थी जिसके बाद राजनीति में हड़कंप मच गया था। उन्होंने चिट्ठी में लिखा था, 'संगठन को मजबूत करने के लिए मैंने पत्र लिखा तो उसे ताक पर रख दिया गया। पढ़ने का भी कष्ट नहीं किया गया। जिस समाजवादी मंच से हम कहते रहे हैं कि रानी के पेट से नहीं बैलेट के बक्से से राजा पैदा होता है। वहां क्या हो रहा है, लोग सब देख रहे हैं। संगठन में सचिव से ज्यादा महासचिव बनना हास्यास्पद नहीं है तो क्या है। जयकारे लगवाने और रोजाना के बयान से पार्टी अपने विरोधियों से कैसे निपटेगी। इतना बड़ा जनाधार और कार्यकर्ताओं को बिना काम के बैठाकर रखने का उदाहरण दुनिया में कहीं नहीं मिलेगा।'

रघुवंश सिंह वैशाली लोकसभा से निर्वाचित होकर कई बार लोकसभा भी पहुंचे। वह राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे। कर्पूरी ठाकुर मंत्रिमंडल में बिहार के ऊर्जा मंत्री बनाए गए थे। मनमोहन सिंह की सरकार के यूपीए-I में ग्रामीण विकास मंत्री रहे थे। 

1990 में कांग्रेस को जीत 

पिछले चुनाव में हारे दिग्विजय प्रताप सिंह ने इस बार जीत दर्ज की थी। कांग्रेस के दिग्विजय प्रताप सिंह ने जनता दल के रघुवंश प्रसाद  सिंह को 2405 वोट से हरा दिया था। 

1995 में रघुवंश प्रसाद सिंह की वापसी

तीन बार लगातार जीतने के बाद 1990 में रघुवंश प्रसाद को हार का सामना करना पड़ा था। 1995 में जनता दल ने रघुवंश प्रसाद सिंह ने एक बार फिर कांग्रेस के दिग्विजय प्रताप सिंह को 33310 वोट से हरा दिया था। 

1996 हुए उपचुनाव में वृषिण पटेल को जीत 

1996 में उस सीट पर उपचुनाव कराने पड़े थे। तत्कालीन विधायक रघुवंश प्रसाद सिंह वैशाली सीट से लोकसभा के लिए निर्वाचित हो गए थे। इसके बाद सीट खाली हो गई थी। चुनाव में समता पार्टी के टिकट पर वृषिण पटेल को जीत मिली थी। उन्होंने जनता दल के नागेंद्र प्रसाद को 1783 वोट से हरा दिया था।  

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2000 में राजद को पहली जीत

2000 के चुनाव में राजद के राम स्वर्थ राय को जीत मिली थी। उन्होंने समता पार्टी के  राणा रणधीर सिंह चौहान को 31401 वोट से हरा दिया था। 

2005 में लोजपा को जीत 

2005 में बिहार में दो बार चुनाव हुए थे। पहले चुनाव 2005 फरवरी में हुए थे। इस चुनाव में लोजपा की सुनीता सिंह ने राजद के राम स्वार्थ राय को 7205 वोट से हरा दिया था। 

दूसरी बार चुनाव 2005 अक्तूबर में हुए थे। इस चुनाव में राजद के संजय कुमार गुप्ता ने जदयू की सुनीता सिंह को 1383 वोट से हरा दिया था। 

2010 में जदयू को जीत 

2010 में एक बार फिर सुनीता सिंह को जीत मिली थी। लेकिन इस बार वह लोजपा से नहीं बल्कि जदयू से चुनाव लड़ रहीं थीं। उन्होंने राजद के संजय कुमार गुप्ता को 19580 वोट से हरा दिया था। 

2015 में एक बार फिर जदयू की सुनीता सिंह चौहान को जीत मिली थी। उन्होंने लोजपा के मोहम्मद नासिर अहमद को 5575 वोट से हरा दिया था। 

2020 में राजद को मिली जीत 

2020 में इस सीट पर राजद के संजय कुमार गुप्ता को जीत मिली थी। उन्होंने जदयू की सुनीता सिंह चौहान को 13931 वोट से हरा दिया था।

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